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महाबोधि मंदिर में हुई विशेष पूजा, आज के दिन ही सारनाथ में बुद्ध ने दी थी पांच तपस्वियों को धम्मोपदेश

By Prabhat khabar Digital
Updated Date
महाबोधि वृक्ष के सामने सूत्तपाठ करते भिक्षु
महाबोधि वृक्ष के सामने सूत्तपाठ करते भिक्षु
प्रभात खबर

बोधगया : भगवान बुद्ध के पहले धम्मचक प्रवर्तन (धम्मोपदेश) दिये जाने की तिथि के मौके पर महाबोधि मंदिर में शनिवार को विशेष पूजा-अर्चना की गयी. महाबोधि मंदिर के मुख्य पुजारी भिक्खु चालिंदा के नेतृत्व में पवित्र बोधि वृक्ष के सामने भिक्षुओं ने सूत्तपाठ किया. मुख्य पुजारी ने बताया कि आज आषाढ़ पूर्णिमा के एक दिन पहले भगवान बुद्ध ने ज्ञान प्राप्ति के बाद पहला धम्मोपदेश दिया था.

सारनाथ की थेरवाड़ा परंपरा के भिक्षुओं ने मूलगंधकुटी विहार में धम्म काक्का पावट्टन सुत्त का जप किया. उसके बाद सारनाथ की महायान परंपरा के भिक्षुओं द्वारा धम्म काका पावट्टन सुत्त का जप केंद्रीय उच्चतर अध्ययन संस्थान में किया गया. इस मौके पर कंबोडिया की राजकुमारी नॉरडोम शमी भी मौजूद थीं.

महाबोधि मंदिर में चीनी परंपरा के अनुसार धर्मचक्र प्रवर्तन सूत्त का पाठ किया गया. त्रिपुरा के थेरवाद संघ द्वारा मंगलाचरण, धर्म चक्र प्रवर्त्तन सूत्र, धम्म दीप विहार और मंगोलिया के गंडन तेग्चेंलिंग मठ के महासंघ ने भगवान बुद्ध की प्रतिमा पर दीप प्रज्वलित कर सभी सदस्यों को पुष्प अर्पित किये.

कार्यक्रम को संस्कृति मंत्रालय और पर्यटन मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रह्लाद पटेल ने स्वागत भाषण दिया. उन्होंने मंगोलियाई कंग्युर (बुद्ध के अनुवादित शब्द) के डिजिटलीकृत प्रकाशन का लोकार्पण भी किया. साथ ही युवा मामले व खेल मंत्रालय के राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) किरेन रिजिजू और भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद के अध्यक्ष व सांसद डॉ विनय सहस्त्रबुद्धे ने संबोधित किया.

इसके अलावा राष्ट्रपति का संदेश पढ़ा गया. जबकि, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो के जरिये संबोधित किया. कार्यक्रम के दौरान सारनाथ के बौद्ध तीर्थ-यात्रा के महत्व की ऑडियो विजुअल की प्रस्तुति भी दी गयी.

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