एमसीएच के सेकेंड फ्लोर पर एसी के कारण बेड छोड़ने को तैयार नहीं होते मरीज

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बहुत हद तक सरकारी अस्पताल में सुविधाएं बेहतर की गयी हैं.

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गया. एएनएमएमसीएच के एमसीएच बिल्डिंग में हर दिन बेड को लेकर विवाद सामने आता ही है. यहां दूसरे तल्ले के वातानुकूलित वार्ड से कोई जनरल में जाना नहीं जाना चाहता है. हर कोई वातानुकूलित वार्ड में रहने के लिए अपनी हैसियत के हिसाब से पैरवी करने से पीछे नहीं हटता है. अस्पताल प्रशासन को इसके लिए हर दिन मंत्री, विधायक, सांसद व अधिकारियों के साथ यहां के कर्मचारियों का भी ताप झेलना पड़ता है. अस्पताल से मिली जानकारी के अनुसार, गाइनी में गर्भवती महिलाओं के ऑपरेशन के बाद ऑब्जर्वेशन में द्वितीय तल्ले पर मरीजों को स्टेबल होने तक रखा जाता है. यह वार्ड पूरी तौर से एसी है. मरीज के स्टेबल होने के बाद प्रथम या तीसरे तल्ले के जनरल वार्ड में शिफ्ट किया जाता है, ताकि अन्य मरीजों को यहां जगह दी जा सके. हर दिन इस अस्पताल में पांच से छह या फिर इससे भी अधिक ऑपरेशन किये जाते हैं. यहां से स्टेबल मरीज के बेड नहीं खाली करने की स्थिति में दूसरे मरीजों को रखने में परेशानी सामने आ जाती है. हाल के दशक में बहुत हद तक सरकारी अस्पताल में सुविधाएं बेहतर की गयी हैं. इसके बाद यहां पर मरीजों की संख्या में काफी इजाफा हुआ है. देखा जाये, तो गाइनी, सर्जरी व मेडिसिन आदि विभागों में मरीजों की संख्या में कभी भी कोई कमी नहीं होती है. गाइनी का हाल यह है कि जिले में महिला अस्पताल ( प्रभावती हॉस्पिटल ) होने के बाद भी थोड़ा सा भी मरीज को अधिक दिक्कत है, तो उसे मगध मेडिकल ही रेफर कर दिया जाता है. सदर हॉस्पिटल से भी यही हाल होता है. अब मगध मेडिकल के गाइनी में मरीजों की संख्या बढ़ जाती है. हालांकि, इन दिनों सभी अस्पतालों में इस विभाग के मरीज कम ही दिखते हैं. हाल के दिनों में देखा जा रहा है कि एमसीएच बिल्डिंग में चल रहे गाइनी के मरीजों में कोई भी दूसरे तल्ले से प्रथम या तीसरे पर ट्रांसफर होना नहीं चाहता है. इतना ही नहीं बेड के लिए बड़े-बड़े लोगों की पैरवी तक आती है. हर किसी को ऑपरेशन के दूसरे दिन स्टेबल होने के बाद प्रथम या फिर तीसरे तल्ले के वार्ड में शिफ्ट किया जाता है. अब यहां से कोई पंखा होने के चलते जाना ही नहीं चाहता है. इसको लेकर कई बार मरीज के परिजन व स्टाफ के बीच विवाद भी हो चुका है. प्रथम व तीसरे तल्ले पर भी वार्ड में एसी लगाने का प्रस्ताव रखा जा रहा है. बैठक में स्वीकृति मिलने के बाद एसी लगा दिया जायेगा. डॉ एनके पासवान, उपाधीक्षक, एएनएमएमसीएच

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