गया जी : मुंशी प्रेमचंद जयंती पर संगोष्ठी, साहित्यकार बोले- आज भी समाज को दिशा देता है उनका साहित्य

संगोष्ठी में शामिल लोग | Prabhat Khabar Network
मुंशी प्रेमचंद की जयंती पर हादी हाशमी स्कूल में प्रेमचंद विचार मंच द्वारा एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया. इस कार्यक्रम में साहित्यकारों और बुद्धिजीवियों ने प्रेमचंद के साहित्य को आज भी समाज के लिए प्रासंगिक बताया.
स्वराज्यपुरी रोड स्थित हादी हाशमी स्कूल प्रांगण में प्रेमचंद विचार मंच के तत्वावधान में शुक्रवार को मुंशी प्रेमचंद की जयंती पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया. कार्यक्रम की अध्यक्षता विद्यालय के प्राचार्य ने की.
चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर दी गई श्रद्धांजलि
कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने सबसे पहले कथाकार मुंशी प्रेमचंद के चित्र पर माला-फूल अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी व नमन किया. इसके बाद वक्ताओं द्वारा प्रेमचंद के साहित्य और उनकी रचनाओं पर विचार व्यक्त किए गए.
डॉ. कृष्णानंद यादव ने प्रेमचंद को बताया युग दृष्टा
संगोष्ठी को संबोधित करते हुए मंच के संयोजक व पूर्व विधायक डॉ. कृष्णानंद यादव ने कहा कि प्रेमचंद कथा सम्राट, उपन्यास सम्राट के साथ-साथ युग दृष्टा थे. उन्होंने लगभग 300 कहानी, डेढ़ हजार उपन्यास, नाटक एवं निबंध लिखे. 'गोदान', 'सेवा सदन', 'रंगभूमि', 'कर्मभूमि', 'कायाकल्प', 'मंगलसूत्र' उनकी चर्चित रचनाएं रहीं. उनकी कहानियों- 'कफन', 'सद्गति', 'मुक्ति मार्ग', 'बासी भात में खुदा का साझा', 'बड़े घर की बेटी', 'सवा सेर गेहूं' में महाजनी सभ्यता व मध्यम वर्ग की दुर्दशा का यथार्थ चित्रण मिलता है.
प्रेमचंद 20वीं सदी के महानतम साहित्यकार
प्रो. राम सिहासन सिंह ने अपने विचार रखते हुए कहा कि 20वीं सदी के विश्व स्तर के महानतम साहित्यकारों में प्रेमचंद का नाम सर्वोपरि है.
कार्यक्रम में शामिल अन्य साहित्यकार और बुद्धिजीवी
संगोष्ठी को इनके अलावा मंच के महासचिव मसउद मंजर, रामेश्वर प्रसाद यादव, छात्र कुमार किसलय, लकी कुमार, मो. इकबाल हुसैन, मजदूर नेता अर्जुन प्रसाद यादव, कपिल देव प्रसाद सिन्हा, विजय कुमार बौद्ध, विनोद सिंह, गजेंद्र सिंह, लालजी प्रसाद, लाल देव यादव, पूर्व प्राचार्य हीरालाल प्रसाद, जिला हिंदी साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष सुरेंद्र सिंह सुरेंद्र, समाजवादी नेता रामेश्वर प्रसाद, नदीम जाफरी, अखिलेश रावत, गौतम कुमार, स्कूल की शिक्षिका बिंदु सिंह, योगेंद्र कुशवाहा, प्रो. उमेश प्रसाद, प्रगतिशील लेखक संघ के अध्यक्ष कृष्ण कुमार सहित कई अन्य साहित्यकारों व बुद्धिजीवियों ने संबोधित किया. कार्यक्रम का धन्यवाद ज्ञापन रामबली बिंद ने किया.
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