Gaya News: 21 साल बाद भी महेश-सरिता की याद में रोता है शब्दों गांव, अपराधियों के कारण सपना रह गया था अधूरा

महेश और सरिता
Gaya News: महेश और सरिता कुछ बेहतर करने का सपना लेकर गया जिले के शब्दों गांव में आये थे. उनके कारण इस गांव के लोगों के जीवन में सकारात्मक सुधार आ रहा था. ये बार अपराधियों को नहीं रस आई और दोनों की हत्या कर दी.
Gaya News: गया जिले के फतेहपुर प्रखंड के शब्दों गांव के विकास की नयी गाथा लिखने में जुटे महेश-सरिता की हत्या 24 जनवरी 2004 की रात हुई थी. घटना के 21 वर्ष बाद भी गांव अब भी वहीं खड़ा है, जहां दोनों इसे छोड़ गये. इनकी हत्या के बाद कई राजनीतिक दलों के प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव, समाजसेवी मेधा पाटकर, संदीप कुमार सहित कई लोगों ने शब्दो गांव का दौरा किया. सभी ने महेश-सरिता के सपनों को पूरा करने का संकल्प लिया. साथ ही दोनों का स्मारक स्थल बनाने की घोषणा की. गांव के लोगों को विश्वास था कि उनके गांव में विकास का पहिया नहीं थमेगा, पर ऐसा हो नहीं सका. आज दो दशक के बाद गांव में कोई स्मारक तो दूर, उनकी याद में कोई नेता भी गांव में नहीं आते. शब्दों के ही कुछ ग्रामीण उनके फोटो पर माल्यार्पण कर उनको श्रद्धा सुमन अर्पण करते हैं. शब्दों के ग्रामीण आज भी महेश-सरिता को याद कर भावुक हो जाते हैं. उन्हें याद कर कहते हैं कि अगर दोनों जिंदा होते तो गांव के साथ-साथ फतेहपुर प्रखंड का नाम देश-विदेश में रोशन रहता.
शब्दों गांव के लिए क्यों खास हैं हरियाणा के महेश व खगौल की सरिता
कुछ बेहतर करने की सोच लेकर हरियाणा के महेश और खगौल की सरिता अगस्त 2002 में एक ऐसे गांव की खोज में निकले थे, जहां उस दौर में पूर्ण शराबबंदी जैसी स्थिति हो और गांव के किसी व्यक्ति पर केस दर्ज नहीं हुआ हो. शब्दों गांव पहुंचने पर उनकी खोज पूरी हुई. दोनों ने गांव में रहकर वहां का विकास करने का फैसला लिया. गांववालों ने भी उनके प्रयास में कदम से कदम मिलाकर चलने का निर्णय लिया. इनके प्रयासों को देखते हुए तत्कालीन आयुक्त हेमचंद्र सिरोही का सहयोग मिला. इनके प्रयास किसानों ने गांव में सामूहिक खेती का निर्णय लिया व खेतों के मेड़ को तोड़ कर देश में एक नजीर पेश की.
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24 जनवरी 2004 को हुई थी हत्या
महेश-सरिता ने गांव में इरा इंस्टिट्यूट ऑफ रिसर्च एंड एक्शन नाम से एक संस्था भी बनायी. संस्था का अध्यक्ष सत्येंद्र प्रसाद व सचिव रामाशीष यादव को बनाया गया. सरकारी मदद व समाजसेवियों के प्रयास के बाद गांव की तस्वीर धीरे-धीरे बदलने लगी. गांव में जगजननी भवन, पशुपालन केंद्र, सामूहिक खेती, बिजली की स्थिति में व्यापक सुधार होना शुरू हो गया. विकास का पहिया अपनी तेज गति से चल रहा था. इसी बीच 24 जनवरी 2004 की वह काली रात आयी, जब अपराधियों ने महेश-सरिता की रात करीब सात बजे हत्या कर दी. उनकी हत्या पर राज्यभर में सनसनी फैल गयी थी. उनकी पहल पर तैयार हो रहा पशुपालन का शेड आज भी वैसे ही अधूरा पड़ा है, जगजननी भवन की स्थिति जर्जर है. पंजाब नेशलन बैंक जम्हेता में इरा संस्था के नाम पर सरकार द्वारा दिया गया सात लाख रुपये का आवंटन पड़ा हुआ है. इसको 2004 से ही फ्रिज कर दिया गया है.
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By Paritosh Shahi
परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.
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