वेकेशन बेंच में जस्टिस रंगन मुखोपाध्याय का रिकॉर्ड, छह दिनों में 853 मामलों का किया निपटारा

Published by : KumarVishwat Sen Updated At : 04 Jun 2026 9:02 PM

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झारखंड हाईकोर्ट के जस्टिस रंगन मुखोपाध्याय.

Jharkhand High Court: झारखंड हाईकोर्ट के जस्टिस रंगन मुखोपाध्याय ने ग्रीष्मावकाश के दौरान वेकेशन बेंच में रिकॉर्ड 853 मामलों का निपटारा किया. छह दिनों की सुनवाई में 891 में से 95.73 प्रतिशत मामलों का निष्पादन हुआ. सबसे अधिक जमानत और अग्रिम जमानत याचिकाओं पर फैसला सुनाया गया. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.

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रांची से राणा प्रताप की रिपोर्ट

Jharkhand High Court: झारखंड हाईकोर्ट के इतिहास में ग्रीष्मावकाश के दौरान एक नया रिकॉर्ड दर्ज हुआ है. हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस रंगन मुखोपाध्याय ने वेकेशन बेंच में महज छह दिनों की सुनवाई के दौरान 853 मामलों का निपटारा कर उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है. न्यायिक कार्यों की गति और दक्षता का यह उदाहरण झारखंड हाईकोर्ट में चर्चा का विषय बना हुआ है. हाईकोर्ट की ओर से जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार, वेकेशन बेंच में सूचीबद्ध मामलों के निष्पादन के मामले में यह अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा माना जा रहा है. माना जा रहा है कि झारखंड हाईकोर्ट में पहली बार किसी एक न्यायाधीश ने ग्रीष्मावकाश के दौरान इतनी बड़ी संख्या में मामलों का निष्पादन किया है.

891 मामलों में से 853 का हुआ निष्पादन

ग्रीष्मावकाश के दौरान जस्टिस रंगन मुखोपाध्याय की वेकेशन बेंच में कुल 891 मामले सूचीबद्ध किए गए थे. इनमें से 853 मामलों का सफलतापूर्वक निपटारा किया गया. यह कुल सूचीबद्ध मामलों का लगभग 95.73 प्रतिशत है. इतनी बड़ी संख्या में मामलों के निष्पादन को न्यायिक व्यवस्था की प्रभावशीलता और न्यायाधीश की कार्यक्षमता का उदाहरण माना जा रहा है. इससे लंबित मामलों के बोझ को कम करने में भी मदद मिली है.

जनहित याचिकाओं से हुई शुरुआत

22 मई को जस्टिस रंगन मुखोपाध्याय खंडपीठ में शामिल हुए थे. इस दौरान दो जनहित याचिकाओं पर सुनवाई की गई. इसके बाद उन्होंने वेकेशन बेंच में विभिन्न प्रकार के अर्जेंट मामलों की सुनवाई शुरू की. गर्मी की छुट्टियों के दौरान आमतौर पर केवल अत्यावश्यक मामलों की सुनवाई होती है. ऐसे में बड़ी संख्या में लंबित अर्जेंट मामलों का निष्पादन न्यायिक व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

जमानत याचिकाओं के निपटारे में सबसे आगे

वेकेशन बेंच में सबसे अधिक जमानत याचिकाओं (बीए) का निपटारा किया गया. आंकड़ों के अनुसार कुल 649 नियमित जमानत याचिकाओं पर फैसला सुनाया गया. इसके अलावा 169 अग्रिम जमानत याचिकाओं (एबीए) का भी निपटारा किया गया. इस श्रेणी का स्थान दूसरा रहा. जमानत और अग्रिम जमानत याचिकाओं के त्वरित निष्पादन से बड़ी संख्या में आवेदकों को राहत मिली.

विभिन्न तिथियों पर हुई सुनवाई

हाईकोर्ट द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, 22 मई को दो जनहित याचिकाएं सूचीबद्ध थीं. इसके बाद 26 मई को जमानत, अग्रिम जमानत, रिट और क्वैशिंग से जुड़े 224 मामलों की सुनवाई हुई. 29 मई को सबसे अधिक 331 मामले सूचीबद्ध किए गए, जिनमें जमानत, अग्रिम जमानत, रिट और रिव्यू याचिकाएं शामिल थीं. एक जून को दो आपराधिक रिट याचिकाओं पर सुनवाई हुई. दो जून को 180 मामलों तथा चार जून को 152 मामलों की सुनवाई की गई. इन सभी दिनों में बड़ी संख्या में मामलों का निपटारा किया गया.

इन श्रेणियों के मामलों का हुआ निष्पादन

वेकेशन बेंच में जिन मामलों का निपटारा किया गया, उनमें 649 नियमित जमानत याचिकाएं, 169 अग्रिम जमानत याचिकाएं, 15 आपराधिक अपील (एसजे), 10 रिट याचिकाएं और पांच आपराधिक रिट याचिकाएं शामिल हैं. इसके अलावा दो-दो आपराधिक पुनर्विचार याचिकाएं (क्रिमिनल रिव्यू) और सीआरएमपी मामलों का भी निपटारा किया गया. एक सिविल मिसलेनियस पिटीशन (सीएमपी) का भी निष्पादन हुआ.

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लंबित मामलों को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि अवकाश के दौरान भी बड़ी संख्या में मामलों का निपटारा न्यायिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है. इससे लंबित मामलों का दबाव कम होता है और जरूरतमंद पक्षकारों को समय पर राहत मिलती है. जस्टिस रंगन मुखोपाध्याय द्वारा छह दिनों में 853 मामलों का निष्पादन न केवल झारखंड हाईकोर्ट के लिए एक रिकॉर्ड है, बल्कि यह न्यायिक कार्य संस्कृति और दक्षता का भी उत्कृष्ट उदाहरण माना जा रहा है. यह उपलब्धि भविष्य में वेकेशन बेंच की कार्यप्रणाली के लिए भी एक मानक स्थापित कर सकती है.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

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कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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