रिश्वतखोरी के मामले में 48 दिनों तक सोता रहा जल संसाधन विभाग, बेल मिलने पर दो इंजीनियरों को किया सस्पेंड
Published by : KumarVishwat Sen Updated At : 04 Jun 2026 8:01 PM
हजारीबाग में जल संसाधन विभाग का कार्यालय. फोटो: प्रभात खबर
Hazaribagh News: हजारीबाग में एसीबी द्वारा रिश्वत लेते गिरफ्तार किए गए जल संसाधन विभाग के कार्यपालक अभियंता राहुल कुमार मालतो और सहायक अभियंता चिरंजीवी कुमार दांगी को 48 दिन बाद निलंबित किया गया. विभागीय कार्रवाई में देरी को लेकर सवाल उठ रहे हैं, जबकि एक अभियंता को जमानत भी मिल चुकी है. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.
हजारीबाग से आरिफ की रिपोर्ट
Hazaribagh News: झारखंड के हजारीबाग जिले में जल संसाधन विभाग के दो अभियंताओं पर रिश्वतखोरी के आरोप में कार्रवाई को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं. भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) द्वारा गिरफ्तार किए जाने के 48 दिन बाद विभाग ने कार्यपालक अभियंता राहुल कुमार मालतो और सहायक अभियंता चिरंजीवी कुमार दांगी को निलंबित किया है. दिलचस्प बात यह है कि यह कार्रवाई तब हुई जब एक आरोपी अभियंता को न्यायालय से जमानत मिल चुकी थी.
अवर सचिव ने जारी किया निलंबन आदेश
जल संसाधन विभाग की ओर से सरकार के अवर सचिव उपेंद्र कुमार सिन्हा ने 27 मई 2026 को निलंबन संबंधी आदेश जारी किया. आदेश के अनुसार, निलंबन अवधि के दौरान दोनों अभियंताओं का मुख्यालय हजारीबाग स्थित जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता कार्यालय को बनाया गया है. विभागीय कार्रवाई में हुई देरी को लेकर प्रशासनिक हलकों में भी चर्चा हो रही है. आम तौर पर भ्रष्टाचार के मामलों में गिरफ्तारी के बाद तत्काल प्रभाव से निलंबन की प्रक्रिया शुरू की जाती है, लेकिन इस मामले में लगभग डेढ़ महीने से अधिक का समय लग गया.
एसीबी ने 9 अप्रैल को किया था गिरफ्तार
गौरतलब है कि 9 अप्रैल 2026 को एसीबी की टीम ने जल संसाधन विभाग के जलपथ प्रमंडल संख्या-दो कार्यालय में छापेमारी कर कार्यपालक अभियंता राहुल कुमार मालतो और सहायक अभियंता चिरंजीवी कुमार दांगी को गिरफ्तार किया था. दोनों अधिकारियों पर 1.75 लाख रुपये रिश्वत लेने का आरोप लगा था. एसीबी की कार्रवाई के बाद दोनों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था और उन्हें हजारीबाग स्थित जयप्रकाश नारायण केंद्रीय कारा में रखा गया. इस गिरफ्तारी ने उस समय विभाग में हलचल मचा दी थी, क्योंकि दोनों अधिकारी महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत थे और विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन में उनकी अहम भूमिका थी.
सहायक अभियंता को मिल चुकी है जमानत
मामले में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम यह रहा कि सहायक अभियंता चिरंजीवी कुमार दांगी को न्यायालय से जमानत मिल गई. जमानत मिलने के बाद उन्होंने 27 मई को निलंबन आदेश की प्रति के साथ जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता कार्यालय में योगदान भी कर दिया. यही तथ्य अब विभागीय कार्रवाई पर सवाल खड़े कर रहा है. कई लोग यह सवाल उठा रहे हैं कि यदि गिरफ्तारी के तुरंत बाद निलंबन की कार्रवाई होती, तो विभाग की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवालों से बचा जा सकता था.
राहुल कुमार मालतो भी मिली बेल
वहीं, कार्यपालक अभियंता राहुल कुमार मालतो को चार जून तक उन्हें जमानत नहीं मिल गई है. झारखंड हाइकोर्ट के जस्टिस रंगन मुखोपाध्याय की अवकाशकालीन पीठ ने रिश्वत मामले में आरोपी हजारीबाग में जल संसाधन विभाग के तत्कालीन कार्यपालक अभियंता राहुल कुमार मालतो की ओर से दायर जमानत याचिका पर सुनवाई की. मामले की सुनवाई के दौरान पीठ ने प्रार्थी व एसीबी का पक्ष सुना. पक्ष सुनने के बाद पीठ ने याचिका को मंजूर करते हुए प्रार्थी को जमानत की सुविधा प्रदान की.
कृष्ण कुमार को सौंपी गई डीडीओ की जिम्मेदारी
राहुल कुमार मालतो के निलंबन के बाद विभाग ने प्रशासनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए नई जिम्मेदारियां भी तय कर दी हैं. जलपथ प्रमंडल संख्या-दो में कार्यपालक अभियंता के पद पर कार्यरत राहुल मालतो की जगह प्राक्कलन पदाधिकारी कृष्ण कुमार को जिला निकासी एवं व्यय पदाधिकारी (डीडीओ) की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी गई है. इस निर्णय का उद्देश्य विभागीय कार्यों को प्रभावित होने से बचाना और वित्तीय प्रक्रियाओं को सुचारु बनाए रखना बताया गया है.
उत्तरी छोटानागपुर में महत्वपूर्ण है जल संसाधन विभाग
हजारीबाग स्थित जल संसाधन विभाग का मुख्यालय उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल का प्रमुख प्रशासनिक केंद्र माना जाता है. इसके अधीन केवल हजारीबाग ही नहीं, बल्कि कोडरमा, चतरा, गिरिडीह, रामगढ़ तथा बोकारो जिले के कुछ हिस्सों का भी संचालन होता है. विभाग की जिम्मेदारी नहरों, चेक डैम, सिंचाई परियोजनाओं और अन्य जल संसाधन योजनाओं के निर्माण एवं रखरखाव से जुड़ी है. करोड़ों रुपये की योजनाओं के संचालन और क्रियान्वयन का दायित्व इसी विभाग पर होता है.
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कार्रवाई में देरी पर उठ रहे सवाल
भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों में गिरफ्तारी के बावजूद 48 दिनों तक निलंबन नहीं होने से विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं. प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि ऐसे मामलों में त्वरित विभागीय कार्रवाई से पारदर्शिता और जवाबदेही का संदेश जाता है. फिलहाल दोनों अभियंताओं के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया जारी है, जबकि विभागीय स्तर पर निलंबन की कार्रवाई लागू कर दी गई है. अब सभी की नजरें इस मामले की आगे की जांच और न्यायिक प्रक्रिया पर टिकी हुई हैं.
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By KumarVishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.
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