Magadh University में नए शिक्षकों की मुश्किलें बढ़ी, वेतन रोककर शुरू हुई सर्टिफिकेट की जांच

Updated:
विज्ञापन

मगध यूनिवर्सिटी. फाइल फोटो

Magadh University : मगध विश्वविद्यालय में BSUSC के माध्यम से नियुक्त नए असिस्टेंट प्रोफेसरों के एक्सपीरियंस सर्टिफिकेट की जांच शुरू कर दी गई है. सत्यापन पूरा होने तक शिक्षकों के वेतन भुगतान पर रोक लगा दी गई है.

विज्ञापन

Magadh University : बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग (BSUSC) के माध्यम से मगध विश्वविद्यालय मुख्यालय और इसके कॉलेजों में नियुक्त हुए नए असिस्टेंट प्रोफेसर के एक्सपीरियंस सर्टिफिकेट की सघन जांच शुरू कर दी गई है. यह कदम कुछ असफल अभ्यर्थियों द्वारा फर्जी प्रमाणपत्रों के सहारे नौकरी पाने की शिकायत के बाद उठाया गया है.

सभी शिक्षकों के वेतन पर रोक

उच्च शिक्षा विभाग और आयोग के सख्त आदेश पर जब तक यह जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक इन सभी शिक्षकों के वेतन भुगतान पर रोक लगा दी गई है. इसके साथ ही उन्हें अभी नौकरी में स्थायी भी नहीं माना जाएगा.

जांच रिपोर्ट का इंतजार

आगे इस मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन संबंधित शिक्षण संस्थानों से आने वाली जांच रिपोर्ट का इंतजार करेगा, जिसके आधार पर ही वेतन जारी करने या फर्जीवाड़ा पाए जाने पर बर्खास्तगी जैसी कानूनी कार्रवाई तय होगी.

शिकायत के बाद जांच के आदेश

बीएसयूएससी के जरिए 2024 से ही शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया चल रही है. नियुक्ति के बाद कुछ अभ्यर्थियों ने आयोग में शिकायत दर्ज कराई कि कई लोगों ने फर्जी अनुभव प्रमाणपत्र लगाकर मेरिट लिस्ट में जगह बनाई है.

शिक्षकों की नियुक्ति पेंडिंग

इस शिकायत को गंभीरता से लेते हुए आयोग और उच्च शिक्षा विभाग ने सभी नवनियुक्त शिक्षकों के प्रमाणपत्रों के सत्यापन (वेरिफिकेशन) का आदेश दिया. हालांकि, एमयू में अभी भी जूलॉजी, बॉटनी, इतिहास और कॉमर्स विषयों के लिए शिक्षकों की नियुक्ति पेंडिंग है.

बिना परीक्षा के हो रही भर्ती

इन शिक्षकों की नियुक्ति के लिए कोई लिखित परीक्षा नहीं ली गई है. चयन का आधार पूरी तरह से एकेडमिक रिकॉर्ड और अनुभव है, जिसे स्कोर कहा जाता है. कुल 100 अंकों में से 80 अंक स्नातक, स्नातकोत्तर, पीएचडी और पढ़ाने के अनुभव पर दिए जाते हैं, जबकि 20 अंक इंटरव्यू के होते हैं.

पांच साल के अनुभव के लिए 10 अंक

नियमानुसार, किसी प्रमाणित संस्थान में एक साल पढ़ाने के अनुभव के लिए दो अंक मिलते हैं. एक अभ्यर्थी को अधिकतम पांच साल के अनुभव के लिए 10 अंक दिए जा सकते हैं. इसी 10 अंक का फायदा उठाने के लिए फर्जी प्रमाणपत्रों के इस्तेमाल की आशंका जताई जा रही है.

कुलपति से मिले परेशान शिक्षक

प्रमाणपत्रों की जांच के लिए मगध विश्वविद्यालय ने एक स्पेशल कमेटी का गठन किया है. यह कमेटी शिक्षकों के अनुभव प्रमाणपत्रों को उन शिक्षण संस्थानों के पास भेज रही है, जहां से वे जारी हुए हैं. लेकिन संबंधित संस्थानों की ओर से रिपोर्ट भेजने में हो रही देरी के कारण शिक्षकों का वेतन अटका हुआ है. परेशान शिक्षकों के एक दल ने एमयू के कार्यवाहक कुलपति प्रो दिलीप कुमार केसरी से मुलाकात की है और जांच प्रक्रिया में तेजी लाने की गुहार लगाई है.

क्या कहते हैं कुलपति

एमयू के कार्यवाहक कुलपति प्रो दिलीप कुमार केसरी ने बताया कि उच्च शिक्षा विभाग के आदेश का सख्ती से पालन किया जा रहा है. कमेटी के माध्यम से सभी संबंधित संस्थानों के कुलसचिवों (रजिस्ट्रार) को प्रमाणपत्र भेजे गए हैं. वहां से रिपोर्ट आने में हो रही देरी के कारण वेतन रुका है.

रिपोर्ट उच्च शिक्षा विभाग को भेजा जाएगा

उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी की रिपोर्ट आने के बाद इसे आयोग और उच्च शिक्षा विभाग को भेजा जाएगा. इसके बाद ऊपर से जो निर्देश मिलेगा, उसी के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी.

Also Read : कोचिंग और लाइब्रेरी में कितने सुरक्षित हैं छात्र? गया जी में 25 संस्थानों का फायर सेफ्टी ऑडिट

विज्ञापन
KALENDRA PRATAP SINGH

लेखक के बारे में

By KALENDRA PRATAP SINGH

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन