6 साल से सूखा पड़ा चापाकल, 3 साल से बंद नल-जल योजना, शेरघाटी में बूंद-बूंद पानी को तरस रहे ग्रामीण

Published by : Sakshi kumari Updated At : 20 May 2026 2:09 PM

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गड्ढे में पानी इक्ठ्ठा कर कपड़ा धो रही महिला

शेरघाटी के घोड़ीजरा गांव में छह साल से खराब चापाकल और तीन साल से बंद नल-जल योजना के कारण ग्रामीण भीषण जल संकट झेल रहे हैं. लोग दूर-दूर से पानी लाने को मजबूर हैं, जबकि विभाग अब जल्द मरम्मत कर व्यवस्था बहाल करने का दावा कर रहा है.

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Gaya News: (नवीन कुमार मिश्रा) शेरघाटी प्रखंड के बेला पंचायत अंतर्गत घोड़ीजरा गांव में भीषण गर्मी के बीच पेयजल संकट गंभीर रूप ले चुका है. गांव में पीएचईडी विभाग द्वारा लगाया गया चापाकल पिछले करीब छह वर्षों से खराब पड़ा है, जबकि मुख्यमंत्री नल-जल योजना भी पिछले तीन सालों से बंद है. इसके कारण ग्रामीणों को पानी के लिए भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.

दूसरों के बोरिंग और मोटर पंप पर निर्भर ग्रामीण

हालात ऐसे हैं कि गांव के लोग दूसरों के बोरिंग और मोटर पंप के सहारे किसी तरह अपनी जरूरतें पूरी कर रहे हैं. ग्रामीणों का कहना है कि पानी की समस्या लंबे समय से बनी हुई है, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकाला गया.

महिलाओं और बच्चों की बढ़ी परेशानी

ग्रामीण सुषमा देवी, सुनती कुमारी, सोनवा देवी, आदित्य मंडल, बिरजू मंडल, जगलाल मंडल और मलवा देवी समेत अन्य लोगों ने बताया कि उन्हें दूर बधार में लगे मोटर पंप से पानी लाकर घरों में जमा करना पड़ता है, ताकि दो-तीन दिनों तक उसका उपयोग किया जा सके. सबसे ज्यादा कठिनाई महिलाओं और बच्चों को झेलनी पड़ रही है.

बिजली कटते ही और बिगड़ जाते हैं हालात

ग्रामीणों के अनुसार बिजली कटने पर स्थिति और गंभीर हो जाती है. कई बार लगातार दो से तीन दिनों तक पानी नहीं मिल पाता, जिससे पीने, खाना बनाने और रोजमर्रा के कामों में भारी दिक्कत होती है. लोगों ने बताया कि नल-जल योजना का मोटर भी निकाल लिया गया है, जबकि पानी की टंकी पहले ही अंधड़ में क्षतिग्रस्त हो चुकी है.

शिकायत के बावजूद नहीं हुई कार्रवाई

ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने कई बार जनप्रतिनिधियों और संबंधित अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई. इससे लोगों में विभाग के प्रति नाराजगी बढ़ती जा रही है.

मुखिया ने बताया विभागीय लापरवाही

बेला पंचायत की मुखिया उमा भारती ने कहा कि ग्रामीणों की शिकायत पर विभाग के कनीय अभियंता शुभम कुमार को समस्या से अवगत कराया गया था, लेकिन विभाग की ओर से अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई. उन्होंने इसे विभागीय लापरवाही बताया.

जल्द मरम्मत का दावा

वहीं कनीय अभियंता शुभम कुमार ने बताया कि शिकायत मिलने के बाद चापाकल और नल-जल योजना की मरम्मत प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. मोटर को मरम्मत के लिए भेजा गया है और जल्द ही योजना को फिर से चालू करा दिया जाएगा.

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लेखक के बारे में

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साक्षी देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की धरती सीवान से आती हैं. पत्रकारिता में अपनी करियर की शुरुआत News4Nation के साथ की. 3 सालों तक डिजिटल माध्यम से पत्रकारिता करने के बाद वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल के साथ कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. बिहार की राजनीति में रुचि रखती हैं. हर दिन नया सीखने के लिए इच्छुक रहती हैं.

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