Gaya News : चिलोरगढ़ का इतिहास 3000 हजार वर्ष पुराना, मौजूद हैं बौद्ध अवशेष

Updated at : 10 Mar 2025 11:25 PM (IST)
विज्ञापन
Gaya News : चिलोरगढ़ का इतिहास 3000 हजार वर्ष पुराना, मौजूद हैं बौद्ध अवशेष

Gaya News :चिलोरगढ़ पर 50 वर्ष पहले मिली थी बुद्ध की अष्ट धातु की मूर्ति, पटना संग्रहालय में सुरक्षित

विज्ञापन

डॉ प्रमोद कुमार वर्मा, गुरुआ प्रखंड मुख्यालय से पांच किलोमीटर की दूर 50 एकड़ में फैले चिलोरगढ़ 500 वर्ष पहले कोल राजा का किला था. उत्तरी भारत में पाल वंश का पतन 13वीं सदी में हुआ, तो अनेक स्थानों पर जनजातीय राज्यों का उदय हुआ. उन्हीं में से एक थे कोल वंश या कोल राज्य. ऐसे कोल राजा का गढ़ देश के अलग-अलग राज्यों में 14वीं शताब्दी से ही था. चिलोर गढ़ पर आज भी करीब 10 फुट चौड़ी व 10 फुट ऊंची मिट्टी का दीवार सुरक्षित हैं, जहां पहले कोल वंश के लोग रहकर अपना राज चलाते थे. उक्त गढ़ जमीन की सतह से करीब 50 फुट ऊंचाई पर था, जिसका अवशेष आज भी उदाहरण के रुप में मौजूद है. कोल राजा समय समय पर मुगलों व ब्रितानी से युद्ध करते आये है जिनका इतिहास में लिखित उल्लेख है. सामाजिक कार्यकर्ता रूपा रंजन ने बताया कि चिलोरगढ़ की खुदाई में करीब 50 वर्ष पहले अष्ट धातु की मूर्ति बरामद हुआ था. इसके बाद गया के जिला प्रशासन द्वारा उक्त मूर्ति को बरामद कर पटना के संग्रहालय में सुरक्षित रख दिया गया था. इसके बाद से लगातार आसपास में गढ़ की खुदाई होने पर विभिन्न प्रकार की मूर्तियां व पुरातात्विक महत्व की सामग्री प्राप्त होते रहते हैं. पटना विश्वविद्यालय में प्राचीन इतिहास एवं पुरातत्व विभाग के शोध छात्र प्रिंस कुमार ””””बुद्धमित्र”””” का कहना है कि चिलोर गढ़ से समय समय पर बौद्ध एवं हिन्दू धर्म से संबंधित मुर्तिया, पालकालीन ईंट, ब्लैक और रेड वेयर (मध्यकालीन), खपड़ी, टूटी मुर्तिया, प्राप्त होती रहती है. यह स्थान करीब 3000 हजार साल प्राचीन है. यह स्थल उत्तरी कृष्ण मृदभांड से परिपूर्ण है, जिसका काल लगभग 600 ईसा पूर्व से 800 ईसा पूर्व तक जाती है, मोरहार नदी के किनारे अनेक प्राचीन स्थल बसे है, जिनसे एक सभ्यता का ज्ञान हो सकता है. प्रिंस ने बतया कि इस स्थल का सबसे पहला उल्लेख 1847 मे ब्रिटिश पुरातत्विद में किट्टो तथा 1871-72 में बेगलर ने आपने अकाउंट में इसका किया है, तत्पश्चात यहां कोई अन्वेषण या उत्खनन का कार्य नहीं हुआ है, इसी कारण से यहा का महत्वपूर्ण ऐतिहासिक एवं पुरातात्विक तथ्य सामने नहीं आ पाया है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

विज्ञापन
AMIT KUMAR SINGH_PT

लेखक के बारे में

By AMIT KUMAR SINGH_PT

AMIT KUMAR SINGH_PT is a contributor at Prabhat Khabar.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन