Bihar News: बिहार के इस जिला में स्वास्थ्य सेवा का संकट, क्या मिलेगा समय पर इलाज?

Updated at : 25 Sep 2024 7:18 PM (IST)
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Bihar News: बिहार के इस जिला में स्वास्थ्य सेवा का संकट, क्या मिलेगा समय पर इलाज?

Bihar News: बिहार के गया में एएनएमएमसीएच में दो वर्षों की तुलना में फिलहाल मरीजों की संख्या दोगुनी हो गयी है, लेकिन बेडों की संख्या पहले जैसी ही है. यह हाल इमरजेंसी व ओपीडी दोनों का है.

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Bihar News: बिहार के गया में एएनएमएमसीएच में दो वर्षों की तुलना में फिलहाल मरीजों की संख्या दोगुनी हो गयी है, लेकिन बेडों की संख्या पहले जैसी ही है. यह हाल इमरजेंसी व ओपीडी दोनों का है. हर दिन यहां बेड नहीं मिलने पर मरीजों के परिजन व अस्पताल कर्मचारियों के बीच हो-हल्ला होता है. इमरजेंसी में आइसीयू व अतिरिक्त बेड लगाने के बाद बेडों की संख्या 70 पहुंची है. वहीं, हर दिन यहां पर सिर्फ इमरजेंसी में 150 से अधिक लोग भर्ती होते है.

मरीजों की संख्या बढ़ते जा रही है

किसी दिन मरीज की संख्या 200 भी पार कर जाती है. पहले यहां इमरजेंसी में मरीजों की संख्या 50 से 60 व ओपीडी में यह संख्या 700 से भी कम होती थी. इलाज से अधिक शिकायतें बेड नहीं दिये जाने को लेकर अधीक्षक कार्यालय में पहुंचती हैं. इतना ही नहीं सुबह से देर रात तक अधीक्षक के फोन पर बेड दिलाने के लिए पैरवी होती है. इसमें रसूखदार के साथ मंत्री तक की पैरवी होती है. विभाग की ओर से इमरजेंसी वार्ड में बेड बढ़ाने को लेकर कोई विचार नहीं किया जा रहा है. इस समस्या का समाधान बेड बढ़ाने के बाद ही हो सकता है.

यहां भी देखने को मिलती है दिक्कत

इमरजेंसी वार्ड में मरीजों को भर्ती बेड, स्ट्रेचर, कुर्सी, टेबल सब कुछ पर किया जा रहा है. बेड की कमी के कारण मरीज जमीन पर तक इलाज कराने को मजबूर रहते हैं. किसी मरीज को सीटी स्कैन, एक्सरे आदि कराने के लिए ले जाने के वक्त स्ट्रेचर फुल रहने के कारण नहीं मिल पाता है. अब मरीज को जांच कराने के लिए काफी हाथ-पांव मारते हैं.

स्ट्रेचर मिल भी जाता है, तो इमरजेंसी वार्ड से पुराने बिल्डिंग में जाने के लिए रास्ता में कई लोगों को स्ट्रेचर में जोर लगाना पड़ता है. किसी भी मरीज को ट्रॉली मैन अकेले जांच के लिए नहीं ले जा सकता है. इसका मुख्य कारण है कि किसी भी तरफ से रोड ही सही नहीं है.

सबसे अधिक दिक्कत ऑर्थो वार्ड में

इमरजेंसी में अगर ऑर्थो विभाग का कोई मरीज भर्ती हो जाता है, तो स्टेबल होने के बाद उसे वार्ड में आगे के इलाज के लिए बेड के लिए कई दिनों तक इंतजार करना पड़ता है. यहां पर बेड से करीब डेढ़ गुना मरीज हर वक्त भर्ती रहते हैं. इमरजेंसी, इएनटी आदि वार्ड में इस विभाग के मरीज रहते हैं. अब यहां पर इलाज कराने के लिए भी डॉक्टर को सूचना देनी होती है.

इमरजेंसी वार्ड में मरीजों का तीन दिनों का आंकड़ा

  • 23 सितंबर को 223 मरीज
  • 24 सितंबर को 160 मरीज
  • 25 सितंबर को दोपहर तीन बजे तक 120 मरीज

ओपीडी मरीजों की संख्या

  • 23 सितंबर- 1641
  • 24 सितंबर- 1284
  • 25 सितंबर- 1166

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मौजूद संसाधनों में बेहतर की हो रही कोशिश

फिलहाल मरीजों का एएनएमएमसीएच के इलाज पर विश्वास अधिक बढ़ा है. इसके चलते मरीजों की संख्या यहां काफी बढ़ गयी है. इतना ही नहीं इन दिनों छोटे-बड़े सरकारी अस्पतालों से भी अधिक मरीज को यहां रेफर कर भेज दिया जाता है. ऐसे यहां पर मौजूदा संसाधन में मरीजों को बेहतर सुविधा उपलब्ध करायी जा रही है. कोशिश है कि इलाज से संबंधित किसी को कोई दिक्कत नहीं हो.

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Anshuman Parashar

लेखक के बारे में

By Anshuman Parashar

अंशुमान पराशर पिछले दो वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल के लिए बिजनेस की लेटेस्ट खबरों पर काम कर रहे हैं. इसे पहले बिहार की राजनीति, अपराध पर भी इन्होंने खबरें लिखी हैं. बिहार विधान सभा चुनाव 2025 में इन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग और विस्तृत राजनीतिक कवरेज किया है.

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