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Bihar: एक माह में गया के सरकारी अस्पताल में 3000 मरीज हुए भर्ती, आधे ने बीच में छोड़ा इलाज

Updated at : 03 May 2024 5:55 AM (IST)
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Bihar: एक माह में गया के सरकारी अस्पताल में 3000 मरीज हुए भर्ती, आधे ने बीच में छोड़ा इलाज

Bihar: गया के सरकारी अस्पताल में मरीज बाते तो हैं, लेकिन यहां इलाज बीच में ही छोड़ निजी अस्पताल की ओर चल देते हैं. एक माह में तीन हजार मरीज भर्ती हुए, लेकिन आधे ने बीच में इलाज करना छोड़ दिया.

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Bihar: गया. प्रमंडल के सबसे बड़े अस्पताल के रूप में जाना जानेवाले एएनएमएमसीएच के मरीजों का बाहर प्राइवेट अस्पतालों में इलाज के लिए चले जाना आम बात हो गयी है. पिछले एक माह का आंकड़ा देखा जाये, तो अप्रैल माह में अस्पताल के इमरजेंसी में करीब 3000 मरीज इलाज के लिए भर्ती हुए. इनमें से 1500 मरीज एलएएमए ( लीव अगेंस्ट मेडिकल एडवाइस ) हो गये. अस्पताल सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, पिछले छह माह में यहां लामा मरीजों की संख्या काफी बढ़ गयी है. कई स्तर से यहां मरीजों को बाहर दिखाने जाने के लिए मजबूर किया जाता है. सूत्रों ने बताया कि यहां पर मरीजों के आते ही ढेर सारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. मरीज को एंबुलेंस से गाड़ी से पहुंचने पर यहां स्ट्रेचर के लिए जद्दोजहद करनी पड़ती है. उसके बाद यहां डॉक्टर के दिखाने के बाद ही पर्ची कट पाता है. जांच लिखे जाने पर मरीज के परिजन को खुद ही दौड़ लगाकर जांच करवानी पड़ती है. इसके बाद इलाज शुरू कराने के लिए मिन्नत करनी पड़ती है. इलाज शुरू होने के बाद कुछ भी पूछने पर परिजन को जानकारी तक नहीं दी जाती है. सूत्रों ने बताया कि इस क्रम में परिजन काफी परेशान हो जाते हैं और इमरजेंसी वार्ड में सक्रिय दलालों के चंगुल में फंस जाते हैं.

60 बेड के इमजेंसी वार्ड में हर दिन पहुंचते हैं 100 से अधिक मरीज

एएनएमएमसीएच में इमरजेंसी वार्ड में 60 बेड लगाये गये हैं. इसके अलावा ग्राउंड फ्लोर पर छह व प्रथम तल्ले पर 14 बेड का आइसीयू भी बनाया गया है. इमरजेंसी में हर दिन यहां 120 से अधिक मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं. इसमें 70-से-80 मरीज भर्ती करने योग्य होते हैं. इतने कम बेड में अधिक मरीजों का इलाज करना संभव नहीं हो पाता है. बेड, कुर्सी व स्ट्रेचर तक पर मरीजों का इलाज किया जाता है. जमीन पर भी लेटा कर मरीजों का इलाज करने की बात कई बार यहां सामने आ चुकी हैं. इमरजेंसी में अराजक स्थिति देख कर कुछ मरीज बिना इलाज के ही अन्यत्र जगह पर चले जाते हैं. इतना ही नहीं विभिन्न विभाग के वार्डों में सही ढंग की व्यवस्था नहीं होने पर वहां से भी हर दिन एक दर्जन की संख्या में मरीज लामा होते हैं.

अस्पताल में बेडों की स्थिति

  • इमरजेंसी वार्ड- 60
  • इमजेंसी आइसीयू वार्ड- 20
  • ऑर्थो विभाग- 60
  • मेडिसिन-110
  • सर्जरी- 110
  • फेब्रिकेटेड- 100
  • इएनटी व आइ- 34
  • पीआइसीयू- 32

‘लामा’ की संख्या को कम करने का हो रहा प्रयास

सच है कि इन दिनों लामा मरीजों की संख्या बढ़ गयी है. इनकी संख्या को कम करने के लिए व्यवस्था को चुस्त किया गया है. मौजूदा संसाधन में ही समुचित इलाज दिया जा रहा है. व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए हाल के दिनों में कई तरह के कदम उठाए गये हैं. आनेवाले दिनों में लामा की संख्या में कमी आयेगी.

डॉ एनके पासवान, उपाधीक्षक, एएनएमएमसीएच

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Ashish Jha

लेखक के बारे में

By Ashish Jha

डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव. लगातार कुछ अलग और बेहतर करने के साथ हर दिन कुछ न कुछ सीखने की कोशिश. वर्तमान में बंगाल में कार्यरत. बंगाल की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को टटोलने के लिए प्रयासरत. देश-विदेश की घटनाओं और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स को सीखने की चाहत.

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