गया-पटना रेलखंड पर एक साल में 106 लोगों की गयी जान

Updated at :30 Jan 2017 9:12 AM
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गया-पटना रेलखंड पर एक साल में 106 लोगों की गयी जान

रेल इंस्पेक्टर ने शव भवन बनाने की रखी मांग रेलवे प्रबंधन के पास एक एंबुलेंस नहीं रोहित कुमार सिंह गया : चाहे रेलयात्रियों की लापरवाही हो, या रेलवे की व्यवस्था की चूक, गया-पटना रेलखंड रेल यात्रियों के लिए जानलेवा बनता जा रहा है. यह बात हम नहीं, बल्कि रेल पुलिस में दर्ज आकस्मिक मौत की […]

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रेल इंस्पेक्टर ने शव भवन बनाने की रखी मांग
रेलवे प्रबंधन के पास एक एंबुलेंस नहीं
रोहित कुमार सिंह
गया : चाहे रेलयात्रियों की लापरवाही हो, या रेलवे की व्यवस्था की चूक, गया-पटना रेलखंड रेल यात्रियों के लिए जानलेवा बनता जा रहा है. यह बात हम नहीं, बल्कि रेल पुलिस में दर्ज आकस्मिक मौत की सूची कह रही है. बीते वर्ष 2016 में रेल हादसे में 106 लोगों की मौत इस रेलखंड पर हादसों में हुई है. इनमें से 36 लोग लावारिस की सूची में शामिल हैं, जिनका अब तक कोई अता-पता नहीं चल सका है. इसके अलावा 32 लोग रेल हादसे में घायल हो चुके हैं. हैरानी की बात है कि गया-पटना रेलखंड पर रेल प्रबंधन के पास एक सामान्य एंबुलेंस भी नहीं है. हादसे के दौरान घायल पड़े लोगों को अस्पताल में भरती कराना रेल पुलिस के लिए बड़ी मुसीबत बन जाती है.
घायल पड़े लोगों को अस्पताल में भरती कराने के लिए पुलिसवालों को ऑटोचालकों से गुहार लगानी पड़ती है. इसके बाद ही, जख्मी रेल यात्री किसी तरह से पुलिस की मदद से अस्पताल पहुंच पाता है.
कई बार हुई एंबुलेंस की मांग: रेल इंस्पेक्टर सुशील कुमार ने रेलवे बोर्ड सुविधा कमेटी के सदस्यों से एक एंबुलेंस की मांग की है. उन्होंने सदस्यों से कहा कि गया जंकशन पर एंबुलेंस नहीं हाेने के कारण आये दिन पुलिसवालों को परेशानी झेलनी पड़ती है. ट्रेन की चपेट में आने से घायल होने पर अस्पताल में भरती करने के लिए ले जाने के लिए कोई सुविधा नहीं है. इस कारण अॉटो खोजने के चक्कर में घायल व्यक्ति की मौत भी हो जाती है. अगर समयसीमा में घायल व्यक्ति को सेवा दी जाये, तो शायद उसकी जान बच जाये. वहीं, ईस्ट सेंट्रल यूनियन कर्मचारी के सचिव मिथिलेश कुमार ने भी एंबुलेंस की मांग की है. लेकिन, अब तक एंबुलेंस की सुविधा नहीं मिल पायी है.
शव रखने के लिए भवन नहीं : इंस्पेक्टर ने कमेटी के सदस्यों से कहा कि ट्रेन की चपेट में आने से लोगों की मौत हो जाती है. इसके बाद शव की पहचान नहीं होने पर शव को जीआरपी थाने के बाहर रखना पड़ता है. उन्होंने बताया कि जिस शव की पहचान नहीं होती है, उसको 72 घंटे रखा जाता है. लेकिन, शव रखने की व्यवस्था नहीं है. जैसे-तैसे करके शव को रखते हैं. उन्होंने कहा कि गया जंकशन एक बड़ा स्टेशन है, लिहाजा रेल यात्रियों के लिए हरसंभव सुविधा होनी चाहिए.
सदस्यों ने दिया पुलिस अधिकारियों को आश्वासन: रेलवे बोर्ड के ओर से आये यात्री सुविधा कमेटी के सदस्य आर त्रिपाठी व एम चटर्जी ने समस्याओं को सुनते ही निदान करने का आश्वासन दिया है. उन्होंने कहा कि रेलवे बोर्ड में गया जंकशन पर समस्याओं से संबंधित एक सूची सौंपी जायेगी. उन्होंने कहा कि जल्द ही, इन समस्याओं का निदान किया जायेगा.
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