बेहतर संस्थान बनेगा जीबीएम कॉलेज

Updated at :24 Jan 2017 10:09 AM
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बेहतर संस्थान बनेगा जीबीएम कॉलेज

गया : लंबे संघर्ष व प्रयास के बाद गौतम बुद्ध महिला (जीबीएम) कॉलेज को दो एकड़ 43 डिसमिल जमीन शिक्षा विभाग द्वारा उपलब्ध करायी गयी है. कॉलेज की जमीन को लेकर विधानसभा के ध्यानाकर्षण, शून्यकाल व तारांकित प्रश्न में सवाल उठाया गया था. इसके बावजूद अब तक कॉलेज के अधीन में एक एकड़ जमीन ही […]

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गया : लंबे संघर्ष व प्रयास के बाद गौतम बुद्ध महिला (जीबीएम) कॉलेज को दो एकड़ 43 डिसमिल जमीन शिक्षा विभाग द्वारा उपलब्ध करायी गयी है. कॉलेज की जमीन को लेकर विधानसभा के ध्यानाकर्षण, शून्यकाल व तारांकित प्रश्न में सवाल उठाया गया था. इसके बावजूद अब तक कॉलेज के अधीन में एक एकड़ जमीन ही आयी है. शेष एक एकड़ 43 डिसमिल जमीन कॉलेज को नहीं मिली है.

उस जमीन को खोजने के लिए डीएम कुमार रवि व सीओ को निर्देश दिया हूं. ताकि, छात्राओं की सुविधाओं से संबंधित हर प्रकार की बिल्डिंग का निर्माण हो सके. उक्त बातें नगर विधायक सह विधानसभा में विपक्ष के नेता डॉ प्रेम कुमार ने गौतम बुद्ध महिला कॉलेज के नवनिर्मित बिल्डिंग के उद्घाटन मौके पर आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए कहीं. डॉ कुमार ने कहा कि राज्य योजना मद से कॉलेज परिसर में एक करोड़ 90 लाख रुपये की लागत से बिल्डिंग बनाने की योजना बनी है. फिलहाल सरकार ने एक करोड़ रुपये उपलब्ध कराये है. बिल्डिंग बनाने के लिए टेंडर हो गया है. वर्क ऑर्डर मिलने का इंतजार हो रहा है. संभावना जतायी जा रही है कि 2018 तक उक्त बिल्डिंग बन कर तैयार हो जायेगी. उन्होंने कहा कि यह कॉलेज गयाजी जैसे शहर में है. दुनिया के कोने-कोने से लोग अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण व पिंडदान करने गयाजी आते हैं. पूरे दुनिया से बौद्ध धर्मावलंबी के लोग भगवान बुद्ध की ज्ञानस्थली बोधगया में आते हैं. इस्लाम धर्मावलंबी के लोग हज को रवाना होने के लिए गयाजी ही आते हैं. ऐसे महत्वपूर्ण गयाजी जैसे शहर में स्थित जीबीएम कॉलेज को एक बेहतर शैक्षणिक संस्थानों की गिनती में लाने के लिए उनका भी प्रयास रहेगा.

64 वर्षों का वनवास हुआ पूरा : रजिस्ट्रार : मगध विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार प्रो (प्रो) एनके शास्त्री ने कहा कि 14 वर्ष में तो भगवान राम का वनवास पूरा हुआ था. पर, 64 वर्ष के बाद इस कॉलेज का वनवास पूरा हुआ. कॉलेज को जीवंतता को जिन्होंने स्फूर्त किया. एक नयी गति प्रदान की. इस कॉलेज की पहली प्रधानाचार्य से लेकर मौजूदा प्रधानाचार्य डॉ सत्येंद्र प्रजापति सशक्त हस्ताक्षर के रूप में अवतरित हुए. अापके परिश्रम, पुरुषार्थ व सौभाग्य के त्रिकोण को मेरा नमन है. आज के इस युगांतकारी क्षण में सबसे पहले गोपाल महाजन, सावित्री महाजन, रामाबल्द प्रसाद, नवल किशोर व गोपाल गुलाबचंदजी अजमेरा को याद करता हूं, जिन्होंने इस कॉलेज की यात्रा की शुरुआत की. इन सबों की एक समन्वय सहमति बनी और कॉलेज अस्तित्व में आया. उन्होंने कहा कि अंत: सलिला फल्गु नदी से जिस कॉलेज को जीवंत आशीर्वाद प्राप्त होता है. जहां पर आधात्यतम व पुरुषार्थ की संगम स्थली पर भगवान विष्णु व मां मंगला का आशीर्वाद प्राप्त होता है. जहां पर शीतल बयार में बोधिसत्व की प्रज्ञा हमेशा इस कॉलेज को स्पंदित करती है. एेसे में यह कॉलेज इस शहर की शान है. आशा इस बात की है कि जिस तरह यहां की छात्राएं विश्व वैश्विक स्तर पर किस प्रकार से अपना योगदान दे सकती हैं. एक छात्र अगर पढ़ता है तो एक व्यक्ति पढ़ता है. लेकिन, एक बिटिया जब पढ़ती है तो पूरा परिवार पढ़ता है. मुझे ज्यादा खुशी होगी, जब इस कॉलेज की छात्रा विश्व स्तर पर हर क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करेंगी.
विदेशी बौद्ध श्रद्धालुओं से उपलब्ध होगा फंड
वहां मौजूद एमयू के पूर्व सिंडिकेट सदस्य सह बीटीएमसी (बोधगया मंदिर प्रबंधकारिणी समिति) के सदस्य डॉ अरविंद कुमार सिंह ने कहा कि इस कॉलेज का नाम गौतम बुद्ध के नाम पर है. उनकी कोशिश होगी कि इस कॉलेज की बिल्डिंग निर्माण सहित अन्य संसाधन मुहैया कराने को लेकर विदेशी बौद्ध श्रद्धालुओं से फंड उपलब्ध हो सके. उन्होंने कॉलेज के प्राचार्य डॉ सत्येंद्र प्रजापति से अपील किया कि इस कॉलेज परिसर में भगवान बुद्ध की प्रतिमा भी लगे. गया शहर स्थित किसी भी कॉलेज में भगवान बुद्ध की प्रतिमा नहीं है. संयोग से इस विद्यालय का नामकरण भगवान बुद्ध के नाम पर है और यहां उनकी प्रतिमा होगी तो आनेवाली पीढ़ियों को उसका लाभ मिलेगा. संबोधन कार्यक्रम के पहले डॉ प्रेम कुमार ने कॉलेज परिसर में बने नवनिर्मित बिल्डिंग का उद्घाटन किया. छात्राओं ने गीत-संगीत पेश किया.
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