वियोगी ने बिहार को दिलायी पहचान : सदय

गया: गया जिला हिंदी साहित्य सम्मेलन भवन में 132 वीं काव्य संध्या के मौके पर साहित्यिक मासिक पत्रिका ‘साहित्य सलिला’ के प्रवेशांक का विमोचन किया गया. इस अवसर पर पंडित मोहनलाल महतो वियोगी की जयंती भी मनायी गयी. इसके अलावा नाटककार केएम मिश्रा को दो मिनट का मौन रख कर श्रद्धांजलि दी गयी. कार्यक्रम की […]
गया: गया जिला हिंदी साहित्य सम्मेलन भवन में 132 वीं काव्य संध्या के मौके पर साहित्यिक मासिक पत्रिका ‘साहित्य सलिला’ के प्रवेशांक का विमोचन किया गया. इस अवसर पर पंडित मोहनलाल महतो वियोगी की जयंती भी मनायी गयी. इसके अलावा नाटककार केएम मिश्रा को दो मिनट का मौन रख कर श्रद्धांजलि दी गयी.
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे गोवर्द्धन प्रसाद सदय ने कहा कि सबसे पहले मोहनलाल महतो वियोगी ने ही बिहार को राष्ट्रीय मंच पर साहित्यिक पहचान दिलायी. वियोगीजी ने साहित्य की सभी विधाओं पर अपनी कलम चलायी. उन्होंने अपनी रचनाओं में भारतीय संस्कृति को उजागर किया. काव्य संध्या का शुभारंभ सुरेंद्र पांडेय सौरभ ने ‘तन, मन जो आज डूबा देगा- वही युग का मीना होगा, मैं कवि हूं जब तक पीड़ा है, तब तक मुझको जीना होगा’ कविता से किया. गीतकार संजीव कुमार ने ‘यूं ही हमें मुफ्त में बदनाम किया करते हैं लोग, आजकल दूर से सलाम किया करते हैं लोग’ गीत पेश किये. अतिथि कवि प्रवीण परिमल ने ‘सुनो जेवारी सुनो हो भाई, आज गांव से पांती आइ’ गीत प्रस्तुत कर खूब वाहवाही लूटी. उदय शंकर गुड्डु ने ‘कलम की धार को कोई शहंशाह सह नहीं सकता’ कविता पढ़ी.
मुंद्रिका सिंह ने पाकिस्तान की हरकतों पर सराहनीय मगही गीत प्रस्तुत किया. मुकेश कुमार सिन्हा ने ‘आज उनकी आंखों से आंसू निकल रहे हैं, कल तनी थी तलवारें, आज दिल पिषल रहे हैं’ कविता सुनायी. इस मौके पर नवीन नवनीत, अजीत, विनोद कुमार, चंद्रदेव प्रसाद केशरी, नीतू गुप्ता व किरण बाला, वासुदेव प्रसाद, डॉ सुधांशु, डॉ ब्रजराज मिश्र, डॉ राकेश कुमार सिन्हा रवि, जयराम सत्यार्थी, संतोष कुमार आदि ने भी अपनी रचनाएं पढ़ी. इस मौके पर सुरेंद्र सिंह सुरेंद्र, अरुण हरलीवाला, राजेंद्र राज, विजय कुमार सिन्हा, सुशील मिश्र, सुमंत, धीरज आदि मौजूद रहे.
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