''रियो में लहराया परचम देश का साक्षी-सिंधु ने मिल कर मान...''

Updated at :22 Aug 2016 8:41 AM
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''रियो में लहराया परचम देश का साक्षी-सिंधु ने मिल कर मान...''

जिला हिंदी साहित्य सम्मेलन भवन में काव्य संध्या आयोजित गया : गया जिला हिंदी साहित्य सम्मेलन भवन में काव्य संध्या आयोजित की गयी. इसमें कवियों ने ओलिंपिक खेल के दौरान भारतीय लड़कियों के प्रदर्शन पर अपनी भावना प्रस्तुत की. मुकेश कुमार सिन्हा ने कहा ‘भारत का अंतिम बिंदु हाे या कश्मीर से रांची, हर तरफ […]

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जिला हिंदी साहित्य सम्मेलन भवन में काव्य संध्या आयोजित
गया : गया जिला हिंदी साहित्य सम्मेलन भवन में काव्य संध्या आयोजित की गयी. इसमें कवियों ने ओलिंपिक खेल के दौरान भारतीय लड़कियों के प्रदर्शन पर अपनी भावना प्रस्तुत की.
मुकेश कुमार सिन्हा ने कहा ‘भारत का अंतिम बिंदु हाे या कश्मीर से रांची, हर तरफ बस जय हाे सिंधु, जय हाे बिटिया साक्षी… ’, संजीत कुमार ने कहा ‘रियाे में लहराया परचम देश का, साक्षी-सिंधु ने मिल कर मान रखा देश का…’, नवीन नवनीत ने नारी शक्ति पर कहा- ‘अब किसी बहन काे न हाे भाई का इंतजार, भर लाे अपनी मुट्ठी में इतनी शक्ति आैर बन जाआे हाेशियार…’, सुरेंद्र पांडेय साैरभ ने गजल गायी- ‘शाेहरतें जिनकी वजह से दाेस्त दुश्मन हाे गये, सब यहीं रह जायेगा, मैं साथ क्या ले जाऊंगा…’, जन्माष्टमी से पहले चंद्रदेव केसरी ने गाया- ‘कन्हैया नटखट माखनचाेर, ग्वाल-बाल संग उधम मचावे छलिया नंदकिशाेर…’, डॉ राकेश कुमार सिन्हा रवि ने गयाजी काे श्रीकृष्ण का स्थान बताते हुए बखान किया- ‘जहां छाेड़लन मुरली तान उ हे मुरली पहड़िया, जहां गऊ के सेवा करलन उ गाेखुर वेदिया…’, वासुदेव प्रसाद ने कहा- ‘पहिले के अजबे कुछ हाल हल, घरे के कुट्टल, पिसल चाउर आउ दाल हल…’, विनाेद कुमार ने पाकिस्तान के संदर्भ में कहा- ‘कश्मीर के राग तू छाेड़अ अब जएताे बलुचिस्तान जी, जइसन करनी आेइसन भरनी, अब भाेगअ पाकिस्तान जी…’, खालिक हुसैन परदेशी ने अपने गजल में कहा- ‘पड़ेगी जब भी जरूरत ताे देख लेना तुम, वतन के वास्ते देता हूं अपना सिर कैसे…’? इस दौरान काव्य संध्या की अध्यक्षता कर रहे सम्मेलन के सभापति गाेवर्द्धन प्रसाद सदय ने रियाे आेलिंपिक में कांस्य पदक विजेता साक्षी मलिक व बैडमिंटन में रजत पदक विजेता पीवी सिंधु काे बधाई दी.
उन्होंने कहा कि ‘यह काव्य संध्या नहीं, बल्कि एक कार्यशाला है, जहां व्यक्तित्व का निखार हाेता है. हम अकेले नहीं हमारे अंदर सारा संसार हाेता है’. इस माैके पर संताेष कुमार, मुंद्रिका सिंह, शिववचन सिंह, डॉ ब्रजराज मिश्र, गजेंद्र लाल अधीर व अन्य कवियों ने काव्य पाठ किया.
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