पब्लिक के "16 लाख हुए बरबाद
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 20 May 2016 9:04 AM
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फिजुलखर्ची. कूड़ा उठाने के लिए खरीदे गये रिक्शों का आज तक इस्तेमाल नहीं नगर निगम में उपकरणों की कमी नहीं हैं. पहले खरीदे गये उपकरण रखरखाव के अभाव में बरबाद हो रहे हैं. इसके बाद भी निरंतर उपकरणों की खरीदारी की जा रही है. 2008 में नगर निगम ने कूड़ा कलेक्शन के लिए 53 रिक्शों […]
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फिजुलखर्ची. कूड़ा उठाने के लिए खरीदे गये रिक्शों का आज तक इस्तेमाल नहीं
नगर निगम में उपकरणों की कमी नहीं हैं. पहले खरीदे गये उपकरण रखरखाव के अभाव में बरबाद हो रहे हैं. इसके बाद भी निरंतर उपकरणों की खरीदारी की जा रही है. 2008 में नगर निगम ने कूड़ा कलेक्शन के लिए 53 रिक्शों की खरीदारी की थी, लेकिन एक दिन भी इन रिक्शों से काम नहीं लिया गया. सभी रिक्शे कहां गये, इसका कोई अता-पता तक नहीं है. कुछ रिक्शों के अवशेष जरूर बच गये हैं.
गया : नगर निगम ने 2008 में डाेर टू डोर कूड़ा कलेक्शन के लिए 53 रिक्शों की खरीदारी की थी. पर, इन रिक्शों से एक दिन भी कूड़े का कलेक्शन नहीं किया गया. गया क्षेत्रीय विकास प्राधिकार के पुराने कार्यालय में ये रिक्शे सड़ गये, जंग खा गये. जानकारी के अनुसार, निगम में ऐसे कितने सामान हैं, जो कैंपस में बरबाद हो रहे हैं.
इस पर अब तक किसी पार्षद या अधिकारी ने ध्यान तक नहीं दिया है. पब्लिक का पैसा पानी की तरह बहाया जा रहा है. इस बार फिर डाेर टू डोर कूड़ा कलेक्शन के लिए टेंपो की खरीदारी की गयी है. लेकिन, इससे पहले खरीदे गये रिक्शों का हाल जाननेवाला कोई नहीं है. हर बार बोर्ड की बैठक में संसाधन बढ़ाने के लिए सामान की खरीदारी कर ली जाती है, पर रखरखाव की कोई व्यवस्था नहीं की जाती है.
इन रुपयों से किये जा सकते थे दूसरे काम
नगर निगम सूत्रों की मानें, तो करीब 23 हजार रुपये में एक रिक्शा खरीदा गया गया. 53 रिक्शों की खरीदारी पर 12.19 लाख रुपये खर्च किये गये. ये रुपये आम जनता के थे, जिससे उन्हें कोई फायदा नहीं हुआ. पूरा शहर वर्षों से गरमी के दिनों में पानी की समस्या से जूझता रहता है. इसके मद्देनजर इन पैसों से फल्गु नदी के किनारे एक नया जलमीनार बनाया जा सकता था. इन पैसों को अगर बैंक में रख दिया जाता, तो साधारण खाते में भी 2008 से आज तक 3.90 लाख रुपये सूद के रूप में मिलते. इन पैसों को किसी वार्ड में गली-नली के निर्माण या अन्य विकास कार्यों में लगाये जा सकते थे, जिससे आमलोगों को फायदा होता.
आखिर कहां गये रिक्शे
रिक्शे की खरीदारी 2008 में की गयी थी, जिनका इस्तेमाल एक दिन भी नहीं किया गया. आज की तारीख में कई रिक्शों के अवशेष तक नगर निगम के पास नहीं बचे हैं. वार्डों में रिक्शा चलाने की जिम्मेवारी तत्कालीन नगर आयुक्त द्वारा वार्ड जमादार को दी गयी थी.
पर, लेबर उपलब्ध नहीं होने के कारण रिक्शा चलाया नहीं गया. दो साल में सभी वार्ड जमादारों ने निगम के स्टोर में रिक्शे जमा करा दिये, जो जर्जर हालत में थे. आज नगर निगम के पास महज कुछ रिक्शों के ढांचे बच गये हैं. अन्य रिक्शों के बारे में जवाब देने वाला कोई नहीं है.
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