सेल्स टैक्स जमा नहीं किया, अब मिलेगा नोटिस

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गया: समय पर बिक्री कर (सेल्स टैक्स) का भुगतान नहीं करने पर वाणिज्य कर विभाग द्वारा जिले के पंजीकृत कारोबारियों को नोटिस जारी किया जायेगा. विभाग ने इसके लिए तैयारी शुरू कर दी है. इसके अलावा नये कारोबारियों से भी संपर्क कर सेल्स टैक्स का भुगतान कराने की कोशिश की जा रही है. हालांकि, शनिवार […]

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गया: समय पर बिक्री कर (सेल्स टैक्स) का भुगतान नहीं करने पर वाणिज्य कर विभाग द्वारा जिले के पंजीकृत कारोबारियों को नोटिस जारी किया जायेगा. विभाग ने इसके लिए तैयारी शुरू कर दी है. इसके अलावा नये कारोबारियों से भी संपर्क कर सेल्स टैक्स का भुगतान कराने की कोशिश की जा रही है. हालांकि, शनिवार व रविवार को बैंक बंद होने व सोमवार को बैंक कर्मचारियों की हड़ताल की घोषणा से मुश्किलें बढ़ गयी हैं. ऐसे में महीने की आखिरी दिनों में सेल्स टैक्स देनेवाले व्यावसायियों के समक्ष समस्या खड़ी हो गयी है.
वाणिज्य कर विभाग ने इस वित्तीय वर्ष (2015-16) में गया जिले के पंजीकृत व्यवसायियों से सेल्स टैक्स के रूप में 200 करोड़ रुपये वसूलने का लक्ष्य रखा है. विभाग को दिसंबर तक सेल्स टैक्स के रूप में 137 करोड़ रुपये प्राप्त हो चुके हैं. इस तरह विभाग अपने लक्ष्य से अभी 63 करोड़ रुपये दूर है. अब जनवरी, फरवरी व मार्च में सेल्स टैक्स वसूल कर विभाग लक्ष्य तक पहुंचने की कोशिश में जुटा है. इसके लिए अब तक सेल्स टैक्स नहीं जमा किये कारोबारियों से संपर्क किया जा रहा है और उन्हें टैक्स जमा करने के लिए प्रेरित भी किया जा रहा है.
टैक्स भुगतान हमारा दायित्व : चैंबर
सेंट्रल बिहार चैंबर ऑफ कॉमर्स, गया के अध्यक्ष हरिप्रकाश केजरीवाल ने कहा कि सेल्स टैक्स का भुगतान करना हर कारोबारियों का दायित्व है. समय पर टैक्स देने से विभाग आधा प्रतिशत छूट भी देता है. उन्होंने बताया कि अगर कोई व्यवसायी समय पर टैक्स का भुगतान नहीं करते हैं, तो वे इस छूट से वंचित होने के साथ-साथ उन्हें 1.5 प्रतिशत का जुर्माना भी देना पड़ता है. इस प्रकार व्यवसायियों को दो प्रतिशत का नुकसान उठाना पड़ता है.

उन्होंने सभी पंजीकृत कारोबारियों को टैक्स जमा करने का सुझाव दिया. श्री केजरीवाल ने कहा कि वैसे सेल्स टैक्स की वसूली के लिए वाणिज्य कर विभाग स्वतंत्र है. सेंट्रल बिहार चैंबर ऑफ कॉमर्स, पटना के कार्यकारिणी सदस्य सह गया के पूर्व अध्यक्ष डॉ कौशलेंद्र प्रताप ने बताया कि वित्तीय वर्ष में मार्च के अंत तक अधिकतर व्यावसायी टैक्स भुगतान कर ही देते हैं. वैसे भी बाजार में होनेवाले कारोबार (खरीदारी) पर भी निर्भर करता है कि सेल्स टैक्स के एवज में कितने रुपये जमा हो पाते हैं. उन्होंने कहा कि महीने के आखिरी दिनों में बैंकों के बंद होने से भी कारोबारियों को टैक्स जमा करने में परेशानी का सामना करना पड़ता है.

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