एमयू में शुरू हुआ इंडियन फिलॉसिफिकल कांग्रेस का 90वां सत्र, दर्शन के बगैर अनुशासन नहीं
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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बोधगया: मगध विश्वविद्यालय में सोमवार को शुरू हुए चार दिवसीय इंडियन फिलॉसिफिकल कांग्रेस के 90वें सत्र के उद्घाटन समारोह में एमयू के कुलपति प्रो एम इश्तियाक ने कहा कि दर्शनशास्त्र के बगैर अनुशासन संभव नहीं है. उन्होंने कहा कि सभी विषयों में दर्शनशास्त्र की भूमिका है. जरूरत इस बात की है कि दर्शनशास्त्र को समझा […]
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बोधगया: मगध विश्वविद्यालय में सोमवार को शुरू हुए चार दिवसीय इंडियन फिलॉसिफिकल कांग्रेस के 90वें सत्र के उद्घाटन समारोह में एमयू के कुलपति प्रो एम इश्तियाक ने कहा कि दर्शनशास्त्र के बगैर अनुशासन संभव नहीं है. उन्होंने कहा कि सभी विषयों में दर्शनशास्त्र की भूमिका है. जरूरत इस बात की है कि दर्शनशास्त्र को समझा जाये. उन्होंने कहा कि दर्शन के बगैर कोई भी विषय आधारहीन होता है व सभी विषयों में दर्शनशास्त्र का समावेश होता है.
कुलपति ने इस कॉन्फ्रेंस में आये सभी प्रतिभागियों का स्वागत किया व दर्शन के नये अनुभवों को प्रसारित होने की उम्मीद जाहिर की. उद्घाटन सत्र में संबोधित करते हुए पटना विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो वाइसी सिमाद्री ने कहा कि दर्शनशास्त्र मात्र एक विषय ही नहीं है, बल्कि यह हमारे जीवन व धर्म से भी जुड़ा है. उन्होंने देश-विदेश के कई दर्शनशास्त्रियों का जिक्र करते हुए कहा कि दर्शन की आवश्यकता राजनीतिक,सामाजिक व धार्मिक क्षेत्रों में भी है. उन्होंने गया को मोक्ष व बोधगया को निर्वाण की धरती बताते हुए कहा कि गया-बोधगया हिंदुइज्म, जैनिज्म व बुद्धिज्म के लिए महत्वपूर्ण स्थल है.
उन्होंने गया के तिलकुट, अनरसा व लाई का भी जिक्र किया. प्रो सिमाद्री ने कहा कि दर्शन का विज्ञान सहित अन्य विषयों से नजदीकी संबंध है. उन्होंने गांधी, आंबेडकर व जिन्ना का जिक्र किया व कहा कि गांधी ने पहले हिंदुइज्म व इस्लाम के दर्शन के बाद अंत में हिंदुइज्म का दर्शन अपनाया और आंबेडकर ने दलित की बात कर बाद में बुद्धिज्म के दर्शन के मार्ग पर चले. इसी तरह जिन्ना ने पहले हिंदुइज्म व इसलाम की राह पर चल कर बाद में इसलाम के दर्शन को अपनाया. एमयू के दर्शनशास्त्र विभाग द्वारा आयोजित इस कॉन्फ्रेंस में स्वागत भाषण डॉ बीबी शर्मा ने दिया. धन्यवाद ज्ञापन दर्शनशास्त्र विभाग के हेड प्रो विजय कुमार सिन्हा ने किया. इसमें देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों से दर्शनशास्त्र के प्रतिभागी व कई विश्वविद्यालयों के कुलपति भी भाग ले रहे हैं. उद्घाटन सत्र के बाद तकनीकी सत्र में अगले चार दिनों तक दर्शनशास्त्री अपने शोध पत्रों को पढ़ेंगे. इसमें इजराइल, जापान, थाइलैंड , कनाडा से भी प्रतिभागी शामिल हो रहे हैं. कॉन्फ्रेंस का उद्घाटन दीप प्रज्वलित कर किया गया.
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