मंदिर क्षेत्र की सड़कों पर कम होगा वाहनों का दबाव
Edited by Prabhat Khabar Digital Desk
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दूसरे फेज में बाेधगया में मिल सकती है रिंग रोड को मंजूरी गया : हृदय प्रोजेक्ट के तहत पहले फेज में फोरलेन को मंजूरी के बाद बोधगया को दूसरे फेज में रिंग रोड की सुविधा दी जा सकती है. बोधगया के मंदिर क्षेत्र में वाहनों का प्रेशर कम करने के लिए इस प्रोजेक्ट को तैयार […]
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दूसरे फेज में बाेधगया में मिल सकती है रिंग रोड को मंजूरी
गया : हृदय प्रोजेक्ट के तहत पहले फेज में फोरलेन को मंजूरी के बाद बोधगया को दूसरे फेज में रिंग रोड की सुविधा दी जा सकती है. बोधगया के मंदिर क्षेत्र में वाहनों का प्रेशर कम करने के लिए इस प्रोजेक्ट को तैयार करने के संकेत मिल रहे हैं. रिंग रोड बनने के बाद मंदिर क्षेत्र में वाहनों का दबाव करीब 80 प्रतिशत तक होने की उम्मीद है.
गौरतलब है कि पहले फेज के लिए प्लान तैयार हो चुका है. सिटी लेवल एडवाइजरी व मॉनीटरिंग कमेटी ने इसे मंजूरी भी दे दी है.
आगामी 17 दिसंबर को दिल्ली में प्रस्तावित केंद्रीय कमेटी की बैठक में प्रोजेक्ट को फाइनल मंजूरी मिलने के बाद पहले चरण के प्रोजेक्ट के लिए 35 करोड़ रुपये मुहैया करा दिये जायेंगे. इसके बाद प्रोजेक्ट को टेंडर में भेज दिया जायेगा. जानकारी के मुताबिक, पहले फेज का काम शुरू होने के साथ ही दूसरे फेज की प्लानिंग होने लगेगी.
सूत्रों के अनुसार, दूसरे फेज के लिए प्रस्तावित रिंग रोड का निर्माण नोड वन से शुरू होकर 80 फुट बुद्ध मूर्ति होते मोचारिम गांव स्थित मुचलिंद सरोवर तक किया जायेगा. इसके बाद सड़क का बोधगया की दिशा में वापस मोड़ते हुए निरंजना नदी के किनारे-किनारे बोधगया मठ के पूर्वी छोर से सुजाता पुल के समीप मिलान कर दिया जायेगा. इससे मुचलिंद सरोवर से सुजाता गढ़ और इसके बाद ढूंगेश्वरी व राजगीर जानेवाले यात्रियों को आवागमन में आसानी होगी.
फोरलेन सड़क के साथ ही बोधगया मंदिर क्षेत्र के बाहर से रिंग रोड बनाये जाने के बाद यात्रियों को जाम की समस्या से निजात मिलेगी. साथ ही, बोधगया के दक्षिणी क्षेत्र की करीब 30 गांवों को लोगों को भी गोदाम रोड के जाम से भी मुक्ति मिल जायेगी.
वहीं, वाहनों का दबाव कम होने से महाबोधि मंदिर क्षेत्र में प्रदूषण कम होगा और देश-विदेश के श्रद्धालुओं व पर्यटकों का बोधगया भ्रमण आसान हो जायेगा. इसके अलावा बोधगया का अंतरराष्ट्रीय लुक निखर कर सामने आयेगा व महाबोधि मंदिर को विश्व धरोहर में शामिल करने के यूनेस्को की शर्तों को भी पूरा करने में मदद मिलेगी.
सीताकुंड का भी होगा कायाकल्प, सबसे पहले बनेगा घाट
दूसरे फेज में फल्गु नदी के पूर्वी छोर पर स्थित सीताकुंड के सौंदर्यीकरण की भी योजना है. जानकारी के मुताबिक, सिटी लेवल एडवाइजरी व मॉनीटरिंग कमेटी की बैठक में इस प्रोजेक्ट पर भी चर्चा हुई है.
पहले फेज में शहरी क्षेत्र के नदी घाटों का सौंदर्यीकरण करने के बाद दूसरे फेज में सीताकुंड के सौंदर्यीकरण के प्लान को मंजूरी मिल सकती है. यहां सबसे पहले घाट तैयार किया जायेगा.
धार्मिक महत्व के कारण सीताकुंड में अक्सर पर्यटकों का आना-जाना लगा रहता है. छठ के दौरान भी सूर्य को अर्घ देने के लिए काफी संख्या में लोग आते हैं. लेकिन, सीताकुंड की मौजूदा स्थिति बेहतर नहीं दिखती है. यहां बिजली, पानी व शौचालय आदि सुविधाओं की कमी नजर आती है. सफाई व्यवस्था भी कुछ खास अच्छी नहीं है.
इनटैक टीम ने किया शहर का दौरा
इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज (इनटैक) के सदस्यों ने शनिवार को सिटी लेवल एडवाइजरी व मॉनीटरिंग कमेटी की बैठक के बाद शहर के विभिन्न हिस्सों का दौरा किया.
इस दौरान उन लोगों ने विष्णुपद स्थित तुलसीबाग के पास स्थानीय लोगों से मुलाकात की. शहर का दौरा करनेवालों मेंइनटैक की टीम में सिटी एंकर धर्मेंद्र कुमार मिश्रा, आर्किटेक्ट निमी व अभिषेक के अलावा डीडीसी संजीव कुमार, नगर आयुक्त विजय कुमार व अभियंता विनोद कुमार भी थे.
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