प्रशासनिक अधिकारियों केे लिए आवास नर्मिाण जल्द

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प्रशासनिक अधिकारियों केे लिए आवास निर्माण जल्द आवास निर्माण के लिए प्रस्ताव भेजा गया मंत्री परिषद को बबुरा के पास होना है आवास का निर्माण प्रतिनिधि, भभुआ (नगर) प्रशासनिक अधिकारियों व कर्मियों के लिए जल्द ही आवास निर्माण की प्रक्रिया शुरू की जायेगी. इसके लिए प्रस्ताव बना कर मंत्री परिषद में स्वीकृति के लिए पत्र […]

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प्रशासनिक अधिकारियों केे लिए आवास निर्माण जल्द आवास निर्माण के लिए प्रस्ताव भेजा गया मंत्री परिषद को बबुरा के पास होना है आवास का निर्माण प्रतिनिधि, भभुआ (नगर) प्रशासनिक अधिकारियों व कर्मियों के लिए जल्द ही आवास निर्माण की प्रक्रिया शुरू की जायेगी. इसके लिए प्रस्ताव बना कर मंत्री परिषद में स्वीकृति के लिए पत्र भेजा गया है. मंत्री परिषद से स्वीकृति मिलते ही आवास निर्माण शुरू कर दिया जायेगा. इसके लिए आवश्यक कार्रवाई पूरी की जा रही है.गौरतलब है कि कैमूर को जिले का दर्जा प्राप्त हुए करीब 25 वर्ष हो गये, लेकिन अब तक डीएम सहित अन्य पदाधिकारियों व कर्मियों के लिए स्थायी आवास नहीं बनाया जा सका है. डीएम से लेकर अन्य कर्मचारी अभी भी दूसरे विभाग के भवनों में रह रहे हैं. कई कर्मचारी किराये के मकानों में रहने को मजबूर हैं.2012 में आवास के लिए कवायद हुई थी शुरू जिले में प्रशासनिक अधिकारियों को आवास उपलब्ध कराये जाने की कवायद 2012 में शुरू की गयी थी. इसको लेकर प्रशासनिक पदाधिकारियों ने रैयतों से बातचीत भी शुरू की. इसके बाद भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया भी शुरू की गयी. लेकिन, कुछ कारणों से इसे आगे नहीं बढ़ाया जा सका. विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, प्रशासनिक पदाधिकारियों व कर्मियों के आवास को बनाये जाने के लिए सदर प्रखंड के बबुरा और सिकठी गांव के रैयतों की जमीन अधिग्रहित किये जाने की प्र्रक्रिया वर्ष 2012 में की गयी थी. इसके अंतर्गत बबुरा गांव में 12.24 व सिकठी में 4.76 एकड़ जमीन को अधिग्रहित किया गया. इसके मुताबिक 15 करोड़ रुपये रैयतों को भुगतान किये जाने का प्रपोजल सरकार को भेजा गया था.आवासीय भूमि के मुताबिक मिलेगी कीमत वर्ष 2015 में सभी प्रशासनिक प्रक्रिया को पूरा करते हुए भूमि अधिग्रहण की फाइल को मंत्री परिषद में भेजा गया है.मंत्री परिषद की स्वीकृति मिलते ही इस समस्या का निदान हो जायेगा और लंबे समय से अटके भवन निर्माण का काम शुरू हो सकेगा. वहीं किसानों से अधिग्रहितभूमि को खेती योग्य भूमि के मुताबिक नहीं अब आवासीय भूमि के मुताबिक कीमत का भुगतान सरकार के द्वारा सुनिश्चित किया जायेगा. इसके तहत अधिग्रहित की गयी भूमि के लिए दो अरब की राशि का निर्धारण किया गया है. अब केवल इंतजार सरकार के मंत्री परिषद की स्वीकृति का है.डीएम व एसपी को भी अपना आवास नहीं कैमूर जिले की स्थापना 17 मार्च 1991 को हुई. जिले का दर्जा प्राप्त होने के बावजूद अब तक डीएम, एसपी सहित अन्य पदाधिकारियों व कर्मियों के रहने के लिए उनके आवास की कोई स्थायी व्यवस्था सरकार द्वारा नहीं की गयी. जिलाधिकारी भी सिंचाई विभाग के भवन में रह रहे हैं. वहीं जिला परिषद अध्यक्ष के आवास में एसपी आवास बनाया गया है. इसके अलावा अन्य कर्मचारी शहर में किराये के मकान में रहने को मजबूर हैं. बबुरा के पास आवास निर्माण होना है, जिससे जिले के प्रशासनिक पदाधिकारियों को राहत होगी. फोटो…….. 3.एसपी आवास का फोटो

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