सस्टिम में फंसी इ-लर्निंग

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सिस्टम में फंसी इ-लर्निंग गया कॉलेज. लाइब्रेरी में धूल फांक रहे 20 कंप्यूटरकॉलेज प्रशासन का पक्ष, कंप्यूटर से जुड़े अन्य संसाधन नहीं मिलेफोटो: लाइब्रेरी , कंप्यूटर रूम का, प्राचार्य का.संवाददाता, गयाउच्च शिक्षा विभाग द्वारा गया कॉलेज को 2013 में इ-लर्निंग के लिए 20 कंप्यूटर उपलब्ध कराये गये थे. पर, आज तक न तो कंप्यूटर चालू […]

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सिस्टम में फंसी इ-लर्निंग गया कॉलेज. लाइब्रेरी में धूल फांक रहे 20 कंप्यूटरकॉलेज प्रशासन का पक्ष, कंप्यूटर से जुड़े अन्य संसाधन नहीं मिलेफोटो: लाइब्रेरी , कंप्यूटर रूम का, प्राचार्य का.संवाददाता, गयाउच्च शिक्षा विभाग द्वारा गया कॉलेज को 2013 में इ-लर्निंग के लिए 20 कंप्यूटर उपलब्ध कराये गये थे. पर, आज तक न तो कंप्यूटर चालू हुआ और न ही इ-लर्निंग सिस्टम.सभी कंप्यूटर लाइब्रेरी के हॉल में धूल फांक रहे हैं. बताया जाता है कि कंप्यूटर तो मुहैया करा दिया गया, पर कंप्यूटर से जुड़े अन्य संसाधन नहीं दिये गये.गौरतलब है कि मगध विश्वविद्यालय के 44 अंगीभूत कॉलेजों में गया कॉलेज की सेंट्रल लाइब्रेरी हाइटेक मानी जाती है. लाइब्रेरी में स्नातकोत्तर स्तर के 42430, इंटर व स्नातक स्तर के विभिन्न संकायों के 71230 किताबें मौजूद हैं. लाइब्रेरी में छात्र-छात्राओं के लिए अलग-अलग स्टडी रूम के साथ अन्य संसाधन भी मौजूद हैं. पर, कर्मचारियों के अभाव में सभी संसाधनों का उपयोग नहीं हो पाता है. इ-लर्निंग नहीं शुरू होने का कारण भी यही है.कॉलेज में बंद है वाइ-फाइ सर्विसवाइ-फाइ व इंटरनेट सर्विस लगभग दो साल से बाधित है. इंटरनेट सुविधा प्रदान करनेवाली कंपनी का बकाया भुगतान कर नयी कंपनी को जिम्मेवारी सौंपी गयी है. उम्मीद है कि एक महीने में काम शुरू हो जायेगा. इ-लर्निंग के लिए लगाये गये कंप्यूटर को जल्द शुरू किया जायेगा. इसके लिए आइटी के कुछ कर्मचारियों की प्रतिनियुक्ति की गयी है. देर होने का कारण रहा कि उच्च शिक्षा विभाग द्वारा व्यवस्था शुरू कराने के लिए जरूरी संसाधन उपलब्ध नहीं कराया गया. इसके लिए कंप्यूटर उपलब्ध करानेवाली कंपनी को कॉलेज द्वारा उपयोगिता प्रमाणपत्र नहीं दिया गया है. डॉ शमसुल इसलाम, प्राचार्य, गया कॉलेजसजगता के आभाव में सभी का बंटाधारकंप्यूटर व्यवसाय से जुड़े निकेत के अनुसार, 20 कंप्यूटरों की कीमत बाजार मूल्य पर लगभग चार लाख होगी. (कंप्यूटर के ब्रांड व गुणवत्ता के हिसाब से कीमत घट-बढ़ सकती है) गया कॉलेज के संदर्भ में इसे समझें, तो 20 कंप्यूटरों को वर्ष 2013 में उपलब्ध कराया गया था. अगर, इसे शुरुआती महीने से ही मानें, तो कॉलेज को कंप्यूटर उपलब्ध कराये अब तक 35 महीने हो गये. सभी कंप्यूटर 35 महीने से लैब में बंद धूल फांक रहे हैं. उसका अब तक कोई उपयोग नहीं हुआ. यानी चार लाख रुपये पर यों ही धूल बरस रहे हैं. भारतीय स्टेट बैंक के क्षेत्रीय प्रबंधक मोहम्मद अयाजुद्दीन के अनुसार, अगर चार लाख रुपये को किसी भी बैंक में साधारण तौर पर जमा किया जाता, तो 35 महीने में लगभग 48000 रुपये ब्याज के तौर पर मिलते. लेकिन, सजगता के आभाव में न कॉलेज को लाभ हुआ न ही स्टूडेंट्स को. सरकारी पैसों का दुरुपयोग हुआ, सो अलग.

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