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जिले के 247 वार्ड फ्लोरिसिस से प्रभावित

Updated at : 01 Jul 2024 11:40 PM (IST)
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जिले के 247 वार्ड फ्लोरिसिस से प्रभावित

कवायद : कॉम्यूनिटी सर्विलांस से फ्लोरिसिस रोगियों की होगी पहचान

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कवायद : कॉम्यूनिटी सर्विलांस से फ्लोरिसिस रोगियों की होगी पहचान

जेपीएन सदर अस्पताल सभागार में स्वास्थ्य कर्मियों का प्रशिक्षण

फ्लोराइड के कारण दांत व शरीर की हड्डी हो जाती है विकृत

काली चाय, काला नमक, सुपारी, गुटखा व फ्लोराइड युक्त टूथपेस्ट से परहेज

पानी में फ्लोराइड की जांच के लिए टॉल फ्री नंबर 18001231121

फोटो गया जितेंद्र-03- कार्यक्रम का संबोधित करते हुए डॉक्टर एमइ हक व अन्य.

वरीय संवाददाता, गया

नेशनल प्रोग्राम फॉर प्रीवेंशन एंड कंट्रोल ऑफ फ्लोरिसिस के तहत कॉम्युनिटी सर्विलांस के माध्यम से आमजन में फ्लोरिसिस की पहचान आशा स्वास्थ्यकर्मी करेंगी. स्कूलों में जाकर राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के चिकित्सक बच्चों में फ्लोरिसिस होने की पहचान करेंगे. इसके लिए सोमवार को जयप्रकाश नारायण अस्पताल सभागार में सिविल सर्जन डॉ रंजन कुमार सिंह की अध्यक्षता में प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इस प्रशिक्षण में अलग-अलग बैच में पहले दिन आमस, इमामगंज, मानपुर, टिकारी, वजीरगंज और बोधगया प्रखंड के स्वास्थ्य पदाधिकारी व कर्मियों का प्रशिक्षण हुआ. दूसरे दिन मंगलवार को डुमरिया, खिजरसराय, नीमचक बथानी, बांकेबाजार, नगर प्रखंड तथा बाराचट्टी प्रखंड से प्रशिक्षु कार्यक्रम में शामिल होंगे. बिहार में फ्लोरिसिस की समस्या व निदान के लिए यूनिसेफ तथा पटना स्थित अनुग्रह नारायण कॉलेज के सेंटर फॉर फ्लोरिसिस रिसर्च सेंटर की ओर से संयुक्त रूप से कार्य किया जा रहा है. मौके पर गैर संचारी रोग पदाधिकारी डॉ एमइ हक, रिसर्च सेंटर के डायरेक्टर प्रोफेसर बिहारी सिंह, आइडीएसपी कंस्लटेंट व दंत चिकित्सक डॉ प्रियंका व यूनिसेफ से प्रशांतचंद्रा ने फ्लोरिसिस जैसे रोग की पहचान व उपचार पर जरूरी जानकारी दी.

जिले के 247 वार्ड फ्लोरिसिस प्रभावित

गैर संचारी रोग पदाधिकारी ने बताया कि फ्लोराइड मानव शरीर में प्राकृतिक तरीकों जैसे पानी, फसल तथा बाजार में तैयार खाद्य पदार्थों से आता है. औद्योगिक उत्सर्जन के माध्यम से भी फ्लोराइड शरीर तक पहुंचते हैं. बिहार के 11 जिलों में फ्लोरिसिस हैं. इसमें एक गया शामिल है. जिले के 12 प्रखंडों के 247 वार्ड फ्लोरिसिस प्रभावित वार्ड हैं. उन्होंने बताया कि पानी में फ्लोराइड नामक तत्व की अत्यधिक मात्रा के कारण दांत के अलावा शरीर की हड्डी का आकार विकृत हो जाती है. व्यक्ति शारीरिक रूप से अपंग हो जाता है. दांतों में फ्लोरिसिस के कारण दांत पीले हो जाते हैं.

पत्तेदार सब्जी का सेवन फायदेमंद

प्रोफेसर बिहार सिंह ने बताया कि फ्लोरिसिस से बचाव के लिए दूध, दही, गुड़, चकोरे और मुनगे की पत्तियां, हरी पत्तेदार सब्जी, आंवला, अमरूद, पपीता, गाजर, टमाटर, नींबू, संतरा का सेवन अधिक करें. पीने के पानी की जांच अवश्य कराएं. पानी में फ्लोराइड की जांच के लिए टॉल फ्री नंबर 18001231121 या अपने जिला के कार्यपालक अभियंता, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण प्रमंडल से संपर्क कर जानकारी ले सकते हैं. फ्लोरिसिस रोग से संबंधित जानकारी के लिए स्वास्थ्य विभाग, बिहार सरकार का टॉल फ्री नंबर 104 पर संपर्क कर सकते हैं. फ्लोराइड की रोकथाम के लिए फ्लोराइड संदूषित पेयजल नहीं पीएं. काली चाय, काला नमक, सुपारी, गुटखा और फ्लोराइड युक्त टूथपेस्ट से परहेज जरूरी है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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