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25 मवेशियों के साथ दम घुटने से 500 मुर्गियों की भी गयी जान

Updated at : 27 Dec 2019 8:20 AM (IST)
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25 मवेशियों के साथ दम घुटने से 500 मुर्गियों की भी गयी जान

बोधगया : बोधगया के महिमापुर गांव में बुधवार की रात एक डेयरी फार्म में आग लग जाने से उसमें रही 15 गायें, दो भैंस व आठ बछड़ों की मौत हो गयी. अभी भी सात भैंसें व दो गायें गंभीर हालत में हैं और मामूली रूप से झुलसीं पांच गायों का इलाज जारी है. गांव के […]

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बोधगया : बोधगया के महिमापुर गांव में बुधवार की रात एक डेयरी फार्म में आग लग जाने से उसमें रही 15 गायें, दो भैंस व आठ बछड़ों की मौत हो गयी. अभी भी सात भैंसें व दो गायें गंभीर हालत में हैं और मामूली रूप से झुलसीं पांच गायों का इलाज जारी है. गांव के ही उपेंद्र नाथ के बेटे प्रिंस कुमार के डेयरी फार्म में घटना हुई है. चार कमरों में कुल 70 मवेशी बंधे थे.

प्रिंस कुमार ने बताया कि संभवत: बिजली के शॉर्ट सर्किट के कारण ही डेयरी फॉर्म में आग लग गयी. सुबह चार बजे जब गाय व भैंस का दूध निकालने पहुंचे तब देखा कि फार्म की तरफ से धुआं व आग की लपटें उठ रही हैं.
फूस व करकट की छप्पर पर ऊपर से प्लास्टिक डाला हुआ था. अगलगी की घटना के बाद मवेशियों में भगदड़ मची और इस दौरान 10 गायें पास में जमा गोबर के ढेर में जाकर फंस गयी थीं, जिन्हें सुबह में निकाला गया. उन्होंने बताया कि डेयरी फार्म से सटे पोल्ट्री फार्म भी है, जहां फिलहाल 500 देशी मुर्गियां थी.
धुएं के कारण दम घुटने से सभी मुर्गियों की भी मौत हो गयी. इसके अलावा यहां रखा 200 बोरा चोकर, 100 बोरा मक्के का दर्रा, 50 बोरा जौ का दर्रा, 50 बोरा अमूल व सुधा के दाने के साथ ही मवेशियों को दिया जाने वाला कैलशियम व अन्य दवाएं भी जल कर राख हो गयीं. एक कमरे में रखे एक हजार मन गेहूं का भूसा भी जल गया.
इसकी सूचना पर मगध विश्वविद्यालय थाने की पुलिस व दमकल की गाड़ियां सुबह में पहुंचीं और आग को नियंत्रित किया. प्रिंस कुमार ने बताया कि डेयरी फार्म से हर दिन 350 लीटर दूध प्रमोद लड्डू भंडार के कारखाने में भेजा जाता था. अगलगी की सूचना पर बोधगया सीओ शिव शंकर राय ने भी राजस्व कर्मचारियों को भेज कर रिपोर्ट ली है. सीओ ने बताया कि जांच के बाद नियमानुसार मुआवजे की प्रक्रिया शुरू की जायेगी.
प्रभात अपील : विशेष स्थिति के लिए हर वक्त तैयार रहें
बोधगया : ठंड के दिनों में ज्यादातर पशुपालक अपने मवेशियों को ठंड से बचाने के लिए गोशाला में आग जला कर मवेशियों को ठंड से बचाने का हर संभव प्रयास करते हैं.
ऐसे में इस बात की सावधानी रखनी बेहद जरूरी है कि गोशाला में आग जलाने के बाद उसे बुझने तक ठहरें और यह तस्दीक कर लें कि आग की कोई चिनगारी गोशाला में रहे पुआल व भूसा के साथ ही मवेशियों के पीठ पर ओढ़ाये गये बोरा आदि के संपर्क में नहीं आने पाये. इसके साथ ही, खास कर डेयरी संचालक यह भी ध्यान रखें कि अगर वे बिजली का उपयोग करते हैं तब गोशाला में वायरिंग मुकम्मल रूप से की गयी हो और शॉर्ट सर्किट की गुंजाइश नहीं रहे.
इन सबके बावजूद अगर किसी कारण से डेयरी फार्म में अगलगी की घटना घट जाती है तब इससे प्रभावित व झुलसे या जले मवेशियों को तीसी का तेल व चूने का पानी बरामर मात्रा में मिला कर प्रभावित जगह पर लगायें. इससे त्वरित लाभ पहुंचेगा. राजकीय पशु चिकित्सालय, गया के पशुपालन पदाधिकारी डॉ संजय कुमार ने बताया कि बराबर मात्रा में तीसी का तेल व चूने का पानी लगाया जा सकता है.
साथ ही, मवेशी के गर्भवती होने की स्थिति में एवील का इंजेक्शन व गर्भवती नहीं होने पर डेक्सोना का इंजेक्शन दिया जा सकता है. एंटीबायोटिक के रूप में जेंटामायसीन इंजेक्शन दिया जा सकता है. मवेशियों को लिक्विड फूड जैसे नमक व गुड का घोल बना कर व इलेक्ट्रॉल पाउडर भी पिलाया जा सकता है.
इसके बाद पशु चिकित्सक से संपर्क कर विशेष उपचार भी आवश्यक है. डॉ संजय कुमार ने बताया कि कोशिश होनी चाहिए कि मवेशियों की पहुंच से आग को दूर रखें व खास कर रात में निगरानी करते रहें. हो सके तो डेयरी फॉर्म में आग बुझाने का छोटा यंत्र भी रख सकते हैं.
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