मगध मेडिकल में कचरा, औरंगाबाद व नवादा का निबटारा
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 20 Sep 2019 9:01 AM
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गया : मगध मेडिकल में मरीज अपनी बीमारी का इलाज कराने के लिए आते हैं, लेकिन यहां की कुव्यवस्था के कारण वे किन-किन बीमारियों की चपेट में आग गये उन्हें यह पता ही नहीं. इसका प्रमुख कारण अस्पताल से रोजाना 40 से 50 किलो निकलनेवाला मेडिकल वेस्टेज है, जिसे कर्मचारी खुले में ही फेंक देते […]
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गया : मगध मेडिकल में मरीज अपनी बीमारी का इलाज कराने के लिए आते हैं, लेकिन यहां की कुव्यवस्था के कारण वे किन-किन बीमारियों की चपेट में आग गये उन्हें यह पता ही नहीं. इसका प्रमुख कारण अस्पताल से रोजाना 40 से 50 किलो निकलनेवाला मेडिकल वेस्टेज है, जिसे कर्मचारी खुले में ही फेंक देते हैं.
यहां से मेडिकल वेस्टेज निष्पादन के लिए अस्पताल परिसर में ही सिनर्जी वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट लगाया गया है. इस प्लांट में ही औरंगाबाद, जहानाबाद, अरवल, नवादा व गया जिले के अस्पतालों से आनेवाले मेडिकल वेस्टेज का निष्पादन किया जाता है.
आश्चर्य की बात यह है कि जिस परिसर में वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट है, वहीं की हालत सबसे खराब है. पिछले दिनों प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के अधिकारियों ने जांच के दौरान नाराजगी जताते हुए कहा था कि यहां बीमारी को ठीक नहीं, लोगों को और बीमार किया जा रहा है. कर्मचारी किस रंग के डब्बे में कौन सा वेस्टेज रखें यह बात भी नहीं बता पाये थे.
तय है मेडिकल वेस्टेज के लिए जगह
अस्पताल प्रशासन ने दवा वितरण केंद्र के बगल में वार्डों व ऑपरेशन थियेटर से लाकर मेडिकल वेस्टेज जमा करने के लिए जगह तय की है. लेकिन, कर्मचारी यहां तक वेस्टेज लाते तो हैं, पर कचरे को निश्चित स्थान में न फेंक कर इधर-उधर फेंक कर चले जाते हैं.
सुधारने में जुटा अस्पताल प्रशासन
अखबार के प्रतिनिधि ने जब मेडिकल वेस्टेज के बारे में सवाल किया, तो पूरा अस्पताल प्रशासन इसमें सुधार लाने के लिए जुटा दिखा. प्लांट के मैनेजर व अन्य कर्मचारी को अस्पताल बुलाया गया. अस्पताल अधीक्षक ने तुरंत ही एक कर्मचारी को कचरा सुव्यवस्थित ढंग से जमा करने व तय स्थल तक सुरक्षित पहुंचाने का निर्देश दिया.
हर माह 79 हजार दिये जाते हैं निष्पादन के लिए
अस्पताल प्रशासन सिनर्जी वेस्ट मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को मेडिकल वेस्टेज के निष्पादन के लिए 79 हजार रुपये हर महीने देता है. कचरा लेने कंपनी के कर्मचारी आते भी हैं. लेकिन, उन्हें निश्चित जगह पर मेडिकल वेस्ट नहीं मिलने से चले जाते हैं.
कंपनी के एक कर्मचारी ने बताया कि ऑपरेशन थियेटर या फिर वार्ड में मेडिकल वेस्टेज को अलग जगह पर जमा करना होता है. अब तक सभी तरह के मेडिकल वेस्टेज एक ही जगह जमा किये जाते हैं या फिर खुले में फेंक दिया जाता है.
यह भी एक कारण
वार्डों व ऑपरेशन थियेटर से जमा कर कचरा जैसे ही यहां के कर्मचारी तय जगह पर फेंकते हैं. वैसे ही उसमें से प्लास्टिक आदि चुनने के लिए कई लोग जमा हो जाते हैं. प्लास्टिक चुनने के चक्कर में कचरा फैला देते हैं.
अस्पताल में नहीं है इटीपी
मगध मेडिकल में गाइनो, ऑर्थो, व जनरल सर्जरी के अलावा इमरजेंसी में ऑपरेशन थियेटर है. यहां से निकलनेवाले गंदे पानी को सीधे नाली में फेंक दिया जाता है. इतना ही नहीं यहां एक भी जगह इटीपी (एफ्लूएंट ट्रीटमेंट प्लांट) नहीं लगा है. जिसमें इन जगहों से निकलनेवाले गंदे पानी को प्रदूषण रहित कर बाहर फेंका जा सके.
प्लांट के स्थानांतरण की चल रही है बात
प्लांट जब मगध मेडिकल अस्पताल परिसर में लगाया गया था उस समय वहां कोई आबादी नहीं थी. पिछले दो दशक में यहां घरों की संख्या बढ़ गयी है. प्लांट में मेडिकल वेस्ट निष्पादन के वक्त निकलनेवाले धुएं से अब वहां के लोगों ने सवाल खड़े करने शुरू कर दिये हैं.
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, औरंगाबाद, जहानाबाद, अरवल, नवादा व गया जिले के अस्पतालों से दो टन प्रतिदिन कचरा यहां निष्पादन के लिए आता है. लोगों का कहना है कि यहां से निकलनेवाले धुएं से वातावरण प्रदूषित हो रहा है.
और दुर्गंध से लोगों का रहना मुश्किल हो रहा है. अस्पताल प्रशासन ने भी प्लांट के कारण कर्मचारियों व डॉक्टरों को हो रही दिक्कत की बात कही थी. इसके बाद प्रमंडलीय आयुक्त ने प्लांट को बिना आबादीवाली जगह पर स्थानांतरित करने का आदेश दिया है. लेकिन, अब तक जमीन तय नहीं की जा सकी है.
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