”चलती ट्रेन में स्कूल” के जनक थे पूर्व डीइओ

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गया : चलती रेलगाड़ी में चलता-फिरता स्कूल चलाने के लिए मशहूर रहे विश्वनाथ विश्वकर्मा अब लोगों के बीच नहीं रहे. उनकी मौत एक शादी समारोह में भाग लेने के लिए जाते वक्त रामपुर थाना क्षेत्र के क्रेन स्कूल के पास एक क्रेन की चपेट में आने से मंगलवार को हो गयी. इस दौरान उनकी बेटी […]

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गया : चलती रेलगाड़ी में चलता-फिरता स्कूल चलाने के लिए मशहूर रहे विश्वनाथ विश्वकर्मा अब लोगों के बीच नहीं रहे. उनकी मौत एक शादी समारोह में भाग लेने के लिए जाते वक्त रामपुर थाना क्षेत्र के क्रेन स्कूल के पास एक क्रेन की चपेट में आने से मंगलवार को हो गयी. इस दौरान उनकी बेटी प्रीति को भी चोटें आयी थी.

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उनके साथ ही चलंत स्कूल का प्रचलन इतिहास बनकर रह गया. विश्वनाथ विश्वकर्मा का जन्म नवादा शहर के मिर्जापुर लाइन पार मुहल्ले में 28 फरवरी 1957 को हुआ था. पेशे से वह सरकारी शिक्षक थे. जेठियन स्थित सर्वाेदय विद्यालय में प्रभारी के अलावा वह जिला स्कूल गया में शिक्षक भी रहे. वह ने शिक्षा विभाग में डीपीओ व बाद में सीवान के डीइओ बने.
नवादा से गया आने के क्रम में ट्रेन पर वह खाने-पीने की व अन्य सामान बेचने वालों को सामाजिक व्यवहार, सामाजिक उन्नति आदि के बारे में बताते थे.
इसके लिए उन्होंने अपनी एक अलग सिलेबस भी बना रखी थी. उनके इस चलंत विद्यालय की शिक्षा को मीडिया जगत के बड़े-बड़े अखबारों व पत्रिकाओं में महत्वपूर्ण स्थान दिया गया. उन्हें शिक्षा के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान के लिए पांच सितंबर 2008 को पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा देव सिंह पाटिल ने राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित किया था. इसके अलावा भी कई स्थानीय व प्रदेश के संगठनों ने उन्हें उनके कामों के लिए पुरस्कृत किया था.
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