होल्डिंग रसीद देना बंद, डिमांड जमा करने का आदेश, नगर निगम समेत शहर में पांच स्थानों पर खोले जायेंगे काउंटर
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :26 Oct 2018 5:48 AM (IST)
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गया : टैक्स वसूली में निगम के कर्मचारियों पर लापरवाही बरतने का आरोप लंबे समय से लगता आ रहा है. अब निगम प्रशासन ने टैक्स वसूली की जिम्मेदारी एक प्राइवेट कंपनी को दे दी है. कंपनी के साथ निगम का 9.4 प्रतिशत कमीशन पर एग्रीमेंट हो गया है. निगम प्रशासन ने टैक्स कलेक्टर को नयी […]
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गया : टैक्स वसूली में निगम के कर्मचारियों पर लापरवाही बरतने का आरोप लंबे समय से लगता आ रहा है. अब निगम प्रशासन ने टैक्स वसूली की जिम्मेदारी एक प्राइवेट कंपनी को दे दी है. कंपनी के साथ निगम का 9.4 प्रतिशत कमीशन पर एग्रीमेंट हो गया है. निगम प्रशासन ने टैक्स कलेक्टर को नयी रसीद देने पर रोक लगाते हुए होल्डिंग की डिमांड जमा करने का आदेश दिया है.
इसके बाद टैक्स कलेक्शन करनेवालों में असंतोष दिख रहा है. सूत्रों की मानें तो कई टैक्स कलेक्टर अपने प्राइवेट आदमी को रखकर टैक्स वसूली करवाते थे. अब उन्हें प्राइवेट कंपनी के कामों की मॉनीटरिंग करने की जिम्मेदारी दी जा रही है. वहीं निगम में टैक्स वसूली का काम कर रहे 10 कमीशन एजेंटों के बारे में भी अब तक निगम प्रशासन कोई फैसला नहीं लिया है.
इनको लेकर कर्मचारी यूनियन भी विरोध दर्ज करा चुका है. निगम सूत्रों का कहना है कि शहर के 69 हजार होल्डिंग से करीब सात करोड़ रुपये ही निगम के कर्मचारी व कमीशन एजेंट अबतक वार्षिक वसूलते रहे हैं. प्राइवेट कंपनी से निगम को आशा है कि यह वसूली दोगुनी हो जायेगी. वसूली आसान हो इसके लिए निगम कार्यालय परिसर, डेल्हा, इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम, टावर चौक व मुफस्सिल मोड़ पर टैक्स जमा करने के लिए काउंटर खोले जायेंगे. यहां लोग आसानी से टैक्स जमा कर सकते हैं.
टैक्स कलेक्टरों में दिख रहा है असंतोष : प्राइवेट कंपनी को टैक्स वसूलने की जिम्मेदारी देते ही टैक्स कलेक्टरों में असंतोष दिख रहा है. टैक्स कलेक्टर के काम बदल जायेंगे, उसके साथ ही सहयोगी के रूप में काम करनेवाले भी बेरोजगार हो गये. सूत्र बताते हैं कि प्राइवेट तौर पर रखे गये टैक्स कलेक्टरों द्वारा सहयोगी को निगम से कोई पेमेंट नहीं दिया जाता था.
बल्कि लोगों से होनेवाली अवैध वसूली से ही उनका पेमेंट होता रहा है. निगम में इस बात की जानकारी राजस्व पदाधिकारी को होने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं होती थी. जबकि टैक्स कलेक्टर के साथ काम करनेवाले प्राइवेट आदमी ही पैसा जमा करने भी निगम में पहुंचते थे. आश्चर्य की बात यह है कि पहले से इस घालमेल में शामिल रहनेवाले राजस्व पदाधिकारी को ही सेवानिवृत्ति के बाद भी दो वर्ष का सेवा विस्तार उसी पद पर दिया गया है. इस बात का भी विरोध राजस्व पदाधिकारी के पद पर काबिज होने की आश में बैठे कर्मचारी अंदर-ही-अंदर कर रहे हैं.
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