नवजात की हुई मौत, 30 हजार के लिए प्रसूता को बनाया बंधक

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 16 Jul 2018 7:08 AM

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गया : डॉक्टर को धरती का भगवान कहा जाता है. लेकिन, कई जगहों पर यह रूप दूसरे तरीके से भी उजागर होते दिखते हैं. ऐसा ही एक मामला रविवार को शहर के नयी गोदाम स्थित एक प्राइवेट अस्पताल में देखने को मिला. अस्पताल में खिजरसराय थाना क्षेत्र के खैरा गांव के रहनेवाले कृष्णा मांझी की […]

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गया : डॉक्टर को धरती का भगवान कहा जाता है. लेकिन, कई जगहों पर यह रूप दूसरे तरीके से भी उजागर होते दिखते हैं. ऐसा ही एक मामला रविवार को शहर के नयी गोदाम स्थित एक प्राइवेट अस्पताल में देखने को मिला. अस्पताल में खिजरसराय थाना क्षेत्र के खैरा गांव के रहनेवाले कृष्णा मांझी की गर्भवती पत्नी कोशमी देवी को भर्ती कराया गया, जहां ऑपरेशन के दौरान नवजात की मौत हो गयी.
उसके बाद मरीज को 30 हजार रुपये के लिए बंधक बनाने का मामला सामने आया. मामले की जानकारी मिलते ही कई राजनीतिक दलों के नेता इसमें कूद पड़े. श्री साई अस्पताल प्रबंधन पहले ही मरीज के परिजन से 30,500 रुपये भी वसूल चुके थे. सबसे पहले जन अधिकार पार्टी के नेता ओम यादव अपने कुछ साथियों के साथ नयी गोदाम स्थित श्री ओम साई अस्पताल में पहुंचे.
बाद में भाजपा जिलाध्यक्ष धनराज शर्मा अपने समर्थकों के साथ अस्पताल में पहुंच कर प्रशासनिक अधिकारियों को इसकी जानकारी दी. कोतवाली थाने को सूचना मिलने पर पहुंची पुलिस ने जांच पड़ताल की और अस्पताल के कर्मचारियों को इस व्यवहार के लिए फटकार लगायी. बाद में मरीज को जय प्रकाश नारायण अस्पताल भेज दिया गया. मरीज के परिजन ने सिविल सर्जन व कोतवाली थाने को लिखित शिकायत पत्र दिया है. हालांकि अंत-अंत तक अस्पताल प्रबंधन मामले को सलटाना चाहता था.
यह कहना है पुलिस का : सिटी डीएसपी राजकुमार साह ने बताया कि मरीज के परिजनों के फोन आने पर मौके पर पुलिस भेजी गयी थी. मरीज के परिजन की लिखित शिकायत पर जांच कर कार्रवाई की जायेगी. इस संबंध में संबंधित थानाध्यक्ष को निर्देश दे दिया गया है. इधर, कोतवाली थानाध्यक्ष अजय कुमार ने कहा कि उनकी जानकारी में इस तरह का कोई मामला सामने नहीं आया है. आश्चर्य की बात है कि श्री ओम साई अस्पताल में पुलिस पहुंची और यह इलाका कोतवाली थाना क्षेत्र में ही आता है.
ऐसे नर्सिंग होम पर होनी चाहिए कार्रवाई : जाप : जाप नेता ओम यादव ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों से दलालों के माध्यम से मरीज को फांस कर लाया जाता है. यहां उसका आर्थिक दोहन बड़े अस्पताल के मालिक करते हैं. गरीब किसी तरह मामले को सलटा कर यहां से जाना चाहता है. अस्पताल के प्रबंधक खुद शराब के नशे में मरीजों से बात कर रहा था. उसके बाद यह सोचने की बात है कि यहां मरीज का इलाज किस ढंग से किया जाता है. जिले के प्रशासनिक अधिकारियों को इस पर तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए.
अस्पताल को किया जाये सील : भाजपा :भाजपा जिलाध्यक्ष धनराज शर्मा ने कहा कि पैसा के लिए किसी मरीज को बंधक बनाना बहुत ही गंभीर मामला है. सूचना मिलते ही वे व उनके साथ अस्पताल पहुंच कर यहां सारी स्थिति की जानकारी ली. इस संबंध में सिविल सर्जन व पुलिस अधिकारी से बात की गयी है. जांच कर अस्पताल को सील करने की मांग अधिकारियों से की गयी है. उन्होंने कहा कि अस्पताल प्रबंधक ने कहा है कि उन्होंने लाइसेंस के लिए फॉर्म जमा किया है. लाइसेंस से पहले यह बात है, तो बाद में इनका और ही रूप सामने आ सकता है.
यह है परिजनों का आरोप
वहां मौजूद मरीज के भाई उपेंद्र मांझी ने बताया कि पांच दिन पहले गर्भवती कोशमी देवी को अस्पताल में लाकर भर्ती कराया. इससे पहले प्राइवेट डॉक्टर खिजरसराय ले गये. वहां से ही डॉक्टर ने श्री साई हॉस्पिटल में भेज दिया. मरीज भर्ती कराते ही विभिन्न किस्तों में 30,500 रुपये अस्पताल प्रबंधन ने ले लिया. इसके बाद बच्चा भी नहीं बच सका और अब मरीज को छोड़ने के नाम पर 30,000 रुपये मांग रहे हैं. जब पैसे देने से मना किया, तो अस्पताल के कर्मचारी ने कहा कि पैसा नहीं जमा करोगे, तो जहर की सूई देकर मरीज को मार देंगे.
मांझी ने बताया कि इस समस्या को लेकर पिछले दो दिनों से कोतवाली थाने के गेट पर गया, लेकिन अंदर नहीं जा पाया. इसके बाद नेताओं का सहयोग लिया. अस्पताल पहुंचने पर पहले नेताओं से अस्पताल प्रबंधक उलझ गये. अस्पताल प्रबंधक लोहा पाठक इस आरोप को मानने को तैयार नहीं थे. जब नेताओं ने कहा कि आप शराब पीकर मरीज के परिजनों से बात करते हैं, तो अस्पताल प्रबंधक भाग खड़े हुए.
इतना ही नहीं उनके जाते ही वहां डॉ बेबी नंद नाम की एक डॉक्टर पहुंची और लोगों से सुलह करने का प्रस्ताव रखीं. पहले से अस्पताल में मौजूद डॉक्टर उमेश कुमार ने मामले को बढ़ते देख कहा कि वे यहां फीस लेकर मरीज को देखने आते हैं. ऐसे वह मगध मेडिकल कॉलेज में पोस्टेड हैं.
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