डेढ़ माह में पिछले वर्ष से 297 एमएम कम हुई बारिश

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 16 Jul 2018 7:04 AM

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गया : माैसम की बेरुखी से जिले काे सुखाड़ क्षेत्र घाेषित होने में अब कोई कसर बाकी नहीं रह गयी है. पिछले करीब 10 दिनाें से बारिश नहीं हाेने से किसानाें का धैर्य टूट रहा है. पूरा जनजीवन परेशानी में है. चिलचिलाती धूप व उमस भरी गर्मी से हर काेई परेशान है. आषाढ़ महीने का […]

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गया : माैसम की बेरुखी से जिले काे सुखाड़ क्षेत्र घाेषित होने में अब कोई कसर बाकी नहीं रह गयी है. पिछले करीब 10 दिनाें से बारिश नहीं हाेने से किसानाें का धैर्य टूट रहा है. पूरा जनजीवन परेशानी में है. चिलचिलाती धूप व उमस भरी गर्मी से हर काेई परेशान है. आषाढ़ महीने का दूसरा पक्ष (शुक्ल पक्ष) शुरू हाे गया है. साथ ही अंग्रेजी के जुलाई महीने के भी 15 दिन समाप्त हाे गये हैं.
बावजूद रविवार तक महज 42.8 मिलीमीटर ही बारिश हाे पायी है. जुलाई महीने में 294.5 मिलीमीटर बारिश की आवश्यकता है. जून आैर जुलाई के मध्य तक कृषि विभाग के मुताबिक जिले काे 276 मिलीमीटर बारिश की जरूरत है. इसके विपरीत अब तक महज 133.8 मिलीमीटर बारिश हुई है. गाैरतलब है कि पिछले साल 2017 में जून व जुलाई के मध्य तक 330.2 मिलीमीटर बारिश हाे चुकी थी. जून महीने में 128.5 मिलीमीटर बारिश की जरूरत रहती है. इसके विपरीत इस वर्ष 91 मिलीमीटर बारिश हुई है, जबकि पिछले वर्ष मात्र 45.8 मिलीमीटर ही बारिश हुई थी.
लक्ष्य से पांच फीसदी कम बाेये गये धान के बीज: चिंता की बात ताे यह है कि माैसम की बेरुखी की वजह से धान के बीज भी 100 फीसदी नहीं बाेये जा सके हैं. आैर, अब ताे बिचड़ों (माेरी) के ट्रांसप्लांटेशन का समय भी काफी निकल चुका है. किसान व कृषि विभाग के अधिकारी खरीफ फसल काे लेकर खासा चिंतित हैं. जिला कृषि विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक अब तक 15,300 हेक्टेयर में धान के बीज बाेने के लक्ष्य के विपरीत 14,556 हेक्टेयर में ही बीज बाेये जा सके हैं. इस प्रकार 95.13 प्रतिशत जमीन पर ही धान के बीज बाेये गये हैं.
अब तक लक्षय के विपरीत महज 1.34 प्रतिशत ही बिचड़ों का हुआ ट्रांसप्लांटेशन
अब तक एक लाख 53 हजार हेक्टेयर में धान के बिचड़ों (माेरी) के ट्रांस्प्लांटेशन के लक्ष्य के विपरीत मात्र 2053 हेक्टेयर भूमि पर ही यानी महज 1.34 प्रतिशत ही धान के बिचड़ों का ट्रांसप्लांटेशन किया जा सका है. डीजल अनुदान की स्वीकृति, आवंटन नहीं, माेरी व लगाये गये धान के पाैधाें काे बचाने के लिए डीजल अनुदान की स्वीकृति का आदेश जिला कृषि पदाधिकारियाें काे राज्य सरकार की आेर से भेजा जा चुका है.
किसानाें काे मिलेगा डीजल अनुदान का पैसा
जिला कृषि पदाधिकारी अशाेक कुमार सिन्हा ने बताया कि हालांकि डीजल अनुदान मद में अब तक आवंटन नहीं मिला है. लेकिन, स्वीकृति मिली है. स्वीकृति में यह वर्णित है कि एक किसान काे प्रति हेक्टेयर तीन सिंचाई के लिए 1200 रुपये दिये जायेंगे. यानी चार साै रुपये एक सिंचाई के लिए दिये जायेंगे. 40 रुपये प्रति लीटर डीजल खरीद के लिए किसानाें काे उक्त रुपये दिये जायेंगे.
ये रुपये डीबीटी के माध्यम से उनके बैंक खाते में चले जायेंगे. जिले में जैसी कड़ी धूप, गरमी रह रही है, उससे इसे सूखाग्रस्त जिला घाेषित किया जा सकता है. माैसम विज्ञानी के मुताबिक अभी बारिश की संभावना दाे-तीन दिनाें तक आैर नहीं दिख रही है. गरमी की वजह से बादलाें के हवा के साथ नीचे आ जाने से जहां-कहीं बारिश हाे जा सकती है, लेकिन यह बरसात की बारिश की तरह सभी जगहाें पर नहीं हाेगी.
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