अब देश के दुश्मनों के होश उड़ायेंगे बाल अपराधी, पढें पूरी बात

Published at :22 Apr 2018 5:32 AM (IST)
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अब देश के दुश्मनों के होश उड़ायेंगे बाल अपराधी, पढें पूरी बात

गया : बाल सुधार गृह में विभिन्न अपराधों में बंद बाल अपराधी अब फौज और पुलिस में भर्ती होकर देश की सेवा करेंगे. सीआरपीएफ की 159 बटालियन इन बच्चों के अंदर से अपराधी की भावना को हटाने के लिए उन्हें देश सेवा की ट्रेनिंग दे रही है. ट्रेनिंग का उद्देश्य फौज व पुलिस में भर्ती […]

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गया : बाल सुधार गृह में विभिन्न अपराधों में बंद बाल अपराधी अब फौज और पुलिस में भर्ती होकर देश की सेवा करेंगे. सीआरपीएफ की 159 बटालियन इन बच्चों के अंदर से अपराधी की भावना को हटाने के लिए उन्हें देश सेवा की ट्रेनिंग दे रही है. ट्रेनिंग का उद्देश्य फौज व पुलिस में भर्ती होकर देश सेवा में योगदान देना और खुद को एक जिम्मेदार नागरिक होने का भाव पैदा करना है. बाल सुधार गृह में यह ट्रेनिंग पिछले पांच मार्च से चल रही है. इसमें 100 से ज्यादा बाल अपराधी भाग ले रहे हैं. समाज कल्याण विभाग व सीआरपीएफ के आला अधिकारी के सहयोग से यह ट्रेनिंग चल रही है.
सीआरपीएफ के ट्रेनर दे रहे प्रशिक्षण :
बाल सुधार गृह में सप्ताह में छह दिन सीआरपीएफ के ट्रेनर सुबह साढ़े छह से साढ़े सात बजे तक बच्चों को ट्रेनिंग देते हैं. फिलहाल, फिजिकल ट्रेनिंग पर जोर दिया जा रहा है. उन्हें बताया जा रहा है कि कैसे शरीर को हर विपरीत परिस्थिति में अनुकूल रखा जाता है. उन्हें योग करना भी सिखाया जाता है, ताकि उनका मानसिक संतुलन मजबूत बन सके. ट्रेनर अपने हाव-भाव से उन्हें यह बताते हैं कि कोई भी दुश्मन आंखों से ओझल नहीं हो पाये. बीच-बीच में उन्हें बहादुर जवानों की शौर्यगाथा के बारे में भी बताया जाता है, ताकि उनके अंदर एक नया व्यक्तित्व जन्म ले सके.
एक सप्ताह के अंदर लिखित परीक्षा की तैयारी भी शुरू
सीआरपीएफ के उप-कमांडेंट मोती लाल ने बताया कि फौज व पुलिस में भर्ती होने के लिए लिखित परीक्षा जरूरी होती है. इसके लिए सीआरपीएफ के डीआईजी के निर्देशानुसार कुछ संस्थानों से बात हुई है. एक सप्ताह में उन संस्थानों के शिक्षक बाल सुधार गृह आकर लिखित परीक्षा की तैयारी की ट्रेनिंग देंगे, ताकि वे लिखित परीक्षा को आसानी से पास कर सकें. ट्रेनिंग देनेवाले शिक्षकों का खर्च सीआरपीएफ वहन करेगी.
बिहार पुलिस में आधा दर्जन से अधिक जवान बाल सुधार गृह के
बाल सुधार गृह के अधिकारियों का दावा है कि वर्ष 2016-17 में आधा दर्जन से अधिक बच्चे जो बाल सुधार गृह में रह रहे थे, वे आज बिहार पुलिस में जवान के पद पर हैं. एक अनुमान के मुताबिक आधा दर्जन से अधिक युवक प्रदेश की सेवा में तैनात हैं. बाल सुधार गृह अधिकारियों का कहना है कि यहां यह ट्रेनिंग लगातार जारी रहेगी. ट्रेनिंग के पीछे उद्देश्य यही है कि यहां से निकलनेवाला हर युवक बेहतर इंसान बन कर देश व समाज के काम आ सके.
इन बच्चों को दी जायेगी प्राथमिकता
बाल सुधार गृह के 15 बाल अपराधियों ने दसवीं की परीक्षा, तीन ने इंटर की व दो ने बीएससी की परीक्षा दी है. रिजल्ट आना बाकी है. फौज और पुलिस में भर्ती के लिए न्यूनतम योग्यता 10वीं व इंटर है. बताया गया है कि जिनका रिजल्ट आना बाकी है, उन्हें फौज व पुलिस की भर्ती में प्राथमिकता दी जायेगी.
बाल अपराधियों को एक बेहतर इंसान बनाने के लिए प्रोबेशन ऑफिसर सुगंधा शर्मा, हाउस फादर नुरूल हक और काउंसेलर प्रेरणा सहाय जी-जान से जुटे हैं. उन्होंने बताया कि जब से फौज में जाने की ट्रेनिंग यहां पर शुरू हुई है, तब से बाल अपराधियों के अंदर बदलाव दिखना शुरू हो गया है. ट्रेनिंग के बाद से बच्चों में सकारात्मक फीलिंग आने लगी है. यही नहीं, बच्चे खुद को ऊर्जावान भी महसूस कर रहे हैं. बच्चे यह भी कहते हैं कि अब उनका जीवन व्यर्थ नहीं जायेगा.
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