एक चापाकल के सहारे प्यास बुझा रहे भलुआ गांव के लोग
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :06 Apr 2018 4:18 AM (IST)
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दो चापाकलों ने पानी देना किया बंद पानी भरने के लिए अक्सर होती है मारपीट डोभी : गर्मी के शुरुआती दौर में ही डोभी प्रखंड की कई पंचायतों में जलस्तर खिसकने लगा है. कई पंचायतों के गांवों में तो चापाकलों ने पानी देना भी बंद कर दिया है, जिससे पानी संकट गहरा गया है. ऐसी […]
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दो चापाकलों ने पानी देना किया बंद
पानी भरने के लिए अक्सर होती है मारपीट
डोभी : गर्मी के शुरुआती दौर में ही डोभी प्रखंड की कई पंचायतों में जलस्तर खिसकने लगा है. कई पंचायतों के गांवों में तो चापाकलों ने पानी देना भी बंद कर दिया है, जिससे पानी संकट गहरा गया है. ऐसी ही बरी पंचायत के भलुआ गांव के लोग एक ही चापाकल के सहारे अपनी प्यास बुझा रहे हैं. यहां सुबह से शाम तक पानी भरने के लिए लोगों की भीड़ लगी रहती है और अक्सर विवाद भी होता रहता है. कहने के लिए तो यहां पर तीन चापाकल लगाये गये हैं, लेकिन इनमें दो खराब पड़े हुए हैं.
जलस्तर खिसकने से इन चापाकलों से पानी देना बंद कर दिया है. ऐसे में एक मात्र चापाकल पर सुबह से ही पानी भरने के लिए लोगों को भीड़ उमड़ी रहती है. पानी भरने के लिए ग्रामीण आपस में विवाद भी कर बैठते हैं. आये दिन पानी लेने के लिए मारपीट हो रही है. लोगों का कहना है कि इस गांव में हर साल गर्मी के समय पानी के लोग तरसते रहते हैं. कई लोग तो गर्मी आते ही गांव छोड़ कर चले जाते हैं. सरकार को खराब पड़े चापाकलों की मरम्मत करानी चाहिए, जिससे जल संकट दूर हो.
भलुआ महादलित गांव है. यहां पर तीन चापाकल हैं, जिनमें दो खराब हैं. चापाकलों को ठीक कराने के लिए पीएचईडी से लेकर प्रखंड अधिकारियों तक से गुहार लगा चुके हैं, लेकिन कहीं सुनवाई नहीं हो रही.
देवानंद कुमार, बरी पंचायत के पंचायत समिति सदस्य
गर्मी आते ही यहां पर पानी के लिए अक्सर विवाद होते रहते हैं. यहां तक मारपीट जैसी घटना भी पानी के लिए होती है. इसके बाद भी पीएचईडी विभाग सुध नहीं ले रहा है. हर बार गर्मी में यही हाल होता है.
राजू मांझी, ग्रामीण
बारिश कम होने के कारण नदी में पानी नहीं है. जलस्तर धीरे–धीरे खिसक रहा है, जिससे चापाकल कम पानी देने लगा है. यही हाल रहा तो भलुआ में पानी का संकट विकराल रूप ले लेगा.
अर्जुन पासवान,ग्रामीण
भलुआ गांव में जल संकट नयी बात नहीं है. यह महादलित गांव है. यहां के लोग एक मात्र चापाकल पर निर्भर हैं. बाकी चापाकलों ने पानी देना बंद कर दिया है. हर साल ऐसा ही होता है.
संजय कुमार दास, ग्रामीण
गांव में तीन चापाकल हैं, जिनमें दो खराब हैं. पानी के लिए बीडीओ से लेकर मुखिया तक से गुहार लगा चुके हैं. लेकिन, अब तक आश्वासन के सिवाय कुछ नहीं मिला है.
टुन्नू मांझी, ग्रामीण
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