किसानों की योजनाओं पर ध्यान दे नीतीश सरकार : राधा मोहन सिंह

कहा-किसानों की आमदनी बढ़ाने पर जोर दे रही केंद्र सरकार गया : राज्य में शराबबंदी और दहेज प्रथा बंद करने की दिशा में पहल का केंद्र सरकार स्वागत करती है, लेकिन इसकी आड़ में हितकारी योजनाओं पर अमल नहीं करना गलत है. यहां किसानों से जुड़ी योजनाओं पर भी ध्यान नहीं दिया जा रहा है. […]
कहा-किसानों की आमदनी बढ़ाने पर जोर दे रही केंद्र सरकार
गया : राज्य में शराबबंदी और दहेज प्रथा बंद करने की दिशा में पहल का केंद्र सरकार स्वागत करती है, लेकिन इसकी आड़ में हितकारी योजनाओं पर अमल नहीं करना गलत है. यहां किसानों से जुड़ी योजनाओं पर भी ध्यान नहीं दिया जा रहा है. ये बातें केंद्रीय कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह ने सोमवार को सर्किट हाउस में प्रेसवार्ता के दौरान कहीं. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश में किसानों को सशक्त और समृद्ध बनाना चाहते हैं. उनके नेतृत्व में कृषि मंत्रालय किसानों के लिए कई योजनाएं चला रहा है. लेकिन अफसोस यह है कि बिहार इन योजनाओं को लागू करने में पीछे रह जा रहा है. राज्य में बड़ी संख्या में किसान हैं.
उन्हें केंद्रीय योजनाओं का लाभ जरूर मिलना चाहिए. केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आजादी के बाद अब तक किसानों के लिए कई योजनाएं विभिन्न सरकारों ने चलायी हैं, लेकिन कभी किसी सरकार ने किसानों को सशक्त करने की नहीं सोची. केंद्र सरकारी चाहती है किसानों को लागत कम लगे और उनकी आमदनी ज्यादा हो. राज्य की सरकारों को भी केंद्र सरकार की योजनाओं को लागू करने में सहयोग करना चाहिए, क्योंकि इससे उनके राज्य के किसानों को ही लाभ होगा.
साॅइल हेल्थ कार्ड योजना सबसे बड़ी उपलब्धि. केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इन तीन वर्षों में किसानों के लिए चलायी गयी योजनाओं में साॅइल हेल्थ कार्ड योजना सबसे बड़ी उपलब्धि रही है. देश भर में अब तक आठ करोड़ किसानों को साॅइल हेल्थ मैनेजमेंट सिखा दिया गया है.
सरकार का लक्ष्य है कि इस साल यह आंकड़ा 14 करोड़ तक पहुंच जाये. उन्होंने कहा कि साॅइल हेल्थ मैनेजमेंट की जानकारी रखनेवाले किसानों को अपनी पैदावार की पूरी जानकारी होगी. ऐसे में उनके लिए खेती करना आसान होगा और वह नुकसान से बचे रह सकेंगे. लेकिन, बिहार की स्थिति इसमें कुछ अच्छी नहीं है. केंद्रीय मंत्री ने बताया कि मई महीने तक राज्य द्वारा साॅइल नमूना परीक्षण व मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरण में प्रगति धीमी है.
इस योजना के तहत बीते तीन वर्षों में राज्य सरकार को 741.56 लाख रुपये दिये गये. इनमें अभी तक राज्य सरकार 390.23 लाख ही खर्च कर सकी है. देश के दूसरे कई राज्यों की स्थिति यहां से बेहतर है. उन्होंने कहा कि वह बार-बार राज्य सरकार से आग्रह कर रहे हैं कि योजना को पूरा करने की गति तेज करें.
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