बालू अवैध खननः बिहटा के तत्कालीन थानाध्यक्ष अवधेश कुमार झा के पटना और मुजफ्फरपुर ठिकानों पर EOU का रेड
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 06 May 2022 8:20 PM
अवधेश कुमार झा की बहाली 2009 बैच के दारोगा के रूप में हुई थी. शुरुआती दिनों में इनकी तैनाती पूर्वी चंपारण तथा पटना जिले के कई थानों में रही. इंस्पेक्टर रैंक में प्रोन्नति के बाद उन्हें बिहटा में थानाध्यक्ष बनाया गया
पटना. आर्थिक अपराध इकाई (इओयू) ने शुक्रवार को बालू के अवैध खनन में बिचौलियों और माफियाओं के साठगांठ कर लाखों रुपये कमाने वाले थानाध्यक्ष पर कार्रवाई की है. इसी क्रम में बिहटा के तत्कालीन थानाध्यक्ष अवधेश कुमार झा के दो ठिकानों पटना स्थित पाटलीपुत्रा थाना क्षेत्र के कुर्जी बलुआपर में श्रीचंद हाई स्कूल के पास स्थित किराये के आवास तथा मुजफ्फरपुर जिला के सकरा थाना क्षेत्र के मझौलिया सकरा के वार्ड नंबर 5 में मौजूद पैतृक आवास की एक साथ तलाशी ली गयी. दोनों स्थानों पर तलाशी के दौरान पत्नी एवं मां के नाम पर दानापुर, बिक्रम और सकरा (मुजफ्फरपुर) में जमीन के पांच प्लॉट के कागजात मिले हैं.
इसकी खरीद का सरकारी मूल्य 59 लाख से अधिक है. इसके अलावा जीवन बीमा से जुड़ी 25 पॉलिसी के कागजात, करीब एक दर्जन बैंक खाते और सुगौली थाना की पुरानी स्टेशन डायरी के अलावा निवेश से जुड़े कुछ अन्य महत्वपूर्ण कागजात भी मिले हैं. बीमा की पॉलिसी में लाखों रुपये के निवेश किये गये हैं. सभी बैंक पासबुक में जमा राशि और लेन-देन से जुड़ी पूरी स्थिति की जांच चल रही है. इसके बाद ही पूरी हकीकत सामने आयेगी.
अवधेश कुमार झा की बहाली 2009 बैच के दारोगा के रूप में हुई थी. शुरुआती दिनों में इनकी तैनाती पूर्वी चंपारण तथा पटना जिले के कई थानों में रही. इंस्पेक्टर रैंक में प्रोन्नति के बाद उन्हें बिहटा में थानाध्यक्ष बनाया गया. इस पोस्टिंग के दौरान उन्होंने बालू के अवैध कारोबार से लाखों रुपये की अवैध संपत्ति जमा कर ली. अब तक की जांच में उनकी वास्तविक आय से 83 फीसदी अधिक की अवैध संपत्ति पायी गयी है. वास्तविक या आय के ज्ञात स्रोतों से 49 लाख 77 हजार रुपये से ज्यादा की अवैध संपत्ति उन्होंने जमा कर रखी है, जिसके जांच पूरी होने के बाद बढ़ने की पूरी संभावना है.
बालू के अवैध धंधे में उनका नाम सामने आने के बाद उन्हें पिछले वर्ष निलंबित कर दिया गाय था. वर्तमान में उनका मुख्यालय पूर्णिया आइजी कार्यालय है. इसके बाद से ही वे छापेमारी की कार्रवाई को लेकर अलर्ट थे. इसी कारण उनके घर से बहुत संख्या में चल संपत्ति बरामद नहीं हुई है. परंतु निवेश से जुड़े कई महत्वपूर्ण बातों का पता चला है.
जांच में यह बात सामने आयी कि इन्होंने अपने परिजनों के नाम से अकूत संपत्ति जमा कर रखी है. कई वित्तीय संस्थानों में लाखों के निवेश का पता चला है. इसकी जांच पूरी होने के बाद इनकी अवैध संपत्ति का ग्राफ बढ़ेगा.
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