बिहार में ठंड के दौरान नहीं बढ़ेंगे बिजली के दाम, शिकायतों की सुनवाई के लिए हुई ये व्यवस्था
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 08 Nov 2022 7:52 AM
बिजली कंपनियों की अनुमानित बिक्री 32587.01 मिलियन यूनिट रहती है तो 48.89 पैसे प्रति यूनिट की वृद्धि की जा सकेगी. यह वृद्धि वर्तमान वित्तीय वर्ष में नहीं, बल्कि अगले वित्तीय वर्ष (2023-24) में ही हो सकेगी. बिजली कंपनी की पुनर्विचार याचिका पर बिहार विद्युत विनियामक आयोग ने यह फैसला सुनाया है.
पटना. अगर वित्तीय वर्ष 2023-24 में बिजली कंपनियों की अनुमानित बिक्री 32587.01 मिलियन यूनिट रहती है तो 48.89 पैसे प्रति यूनिट की वृद्धि की जा सकेगी. यह वृद्धि वर्तमान वित्तीय वर्ष में नहीं, बल्कि अगले वित्तीय वर्ष (2023-24) में ही हो सकेगी. बिजली कंपनी की पुनर्विचार याचिका पर बिहार विद्युत विनियामक आयोग ने यह फैसला सुनाया है. इस मामले में 14 अक्तूबर, 2022 को हुई अंतिम सुनवाई के बाद आयोग ने फैसले को सुरक्षित रख लिया था. आयोग के अध्यक्ष शिशिर सिन्हा के इस फैसले को सोमवार को जारी कर दिया गया.
आयोग ने राज्य सरकार से मिले अनुदान को स्वीकार करते हुए कंपनी के अन्य सभी तर्कों को खारिज कर दिया. आयोग ने कहा है कि वित्तीय वर्ष 2020-21 के ट्रूइंग-अप आदेश की समीक्षा के तत्काल आदेश में राज्य सरकार से प्राप्त एटीएंडसी हानि को सब्सिडी के कारण 1264.38 करोड़ के अतिरिक्त ही निर्णय सुनाये थे. इसलिए 1264.38 करोड़ के अतिरिक्त एआरआर को वित्तीय वर्ष 2021-22 के ट्रूइंग- अप में शामिल किया गया. मौजूदा वित्तीय वर्ष में बिजली दर में कोई वृद्धि नहीं होगी. वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिए दायर की जाने वाली जनहित याचिका में इस अनुदान को शामिल किया जाये.
ऊर्जा विभाग के प्रधान सचिव और बिहार स्टेट पावर होल्डिंग कंपनी के सीएमडी संजीव हंस ने स्वीकार किया कि आयोग के आदेश में राज्य सरकार द्वारा किये गये 1264 करोड़ रुपये के खर्च को शामिल कर लिया गया है. कंपनी अगले साल के लिए दायर होने वाले पिटीशन में इसे शामिल करेगी. मालूम हो कि वित्तीय वर्ष 2022-23 के बिजली टैरिफ को लेकर आयोग के सुनाये गये फैसले के खिलाफ बिजली कंपनी ने पुनर्विचार याचिका दाखिल की थी.
कंपनी ने तर्क दिया कि टैरिफ सुनाये जाते वक्त टैरिफ सुनाये जाते वक्त कंपनी को सरकार से मिली 1264 करोड़ रुपये की गणना नहीं की गयी. इसके साथ ही आरडीएसएस में केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित 19 फीसदी बिजली हानि की जगह 15 फीसदी बिजली हानि को माना गया. यही नहीं, कंपनी द्वारा समय समय पर जरूरत के हिसाब से खरीदी गयी महंगी बिजली की भी गणना नहीं की गयी. बिजली कंपनी की दलील पर आयोग ने सभी पक्षों के विचार लेने के बाद अपना फैसला सुनाया है.
बिजली से जुड़ी शिकायतों की अंतिम सुनवाई को ऑम्बुडसमैन यानी लोकपाल की बहाली होगी. इसको लेकर बिहार विद्युत विनियामक आयोग ने जिला जज या राज्य सरकार में सचिव रैंक से रिटायर अधिकारियों से आवेदन की मांग की है. आवेदन की न्यूनतम आयु 60 वर्ष होनी चाहिए. उनकी सेवा अधिकतम तीन वर्षों या 65 वर्ष उम्र तक के लिए होगी. इच्छुक आवेदकों को 24 नवंबर तक आयोग के सचिव के समक्ष आवेदन करना होगा.
अधिकारियों के मुताबिक विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 42 की उपधारा (6), (7) तथा (8) के तहत विद्युत लोकपाल का प्रावधान है. सीजीआरएफ (उपभोक्ता शिकायत निवारण मंच) की शिकायत के निवारण से असहमत कोई भी उपभोक्ता लोकपाल के समक्ष अपनी शिकायत निवारण के लिए आवेदन दे सकते हैं. लोकपाल आयोग द्वारा निर्धारित समय के भीतर व नियमों के अनुसार उपभोक्ता की समस्या का निवारण करेगा.
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