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हुजूर! राशनकार्ड में मेरे बच्चे का नाम जोड़ दीजिए, भागलपुर में हाथ के सहारे चलकर ब्लॉक पहुंचा दिव्यांग

Updated at : 18 Apr 2023 3:06 AM (IST)
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हुजूर! राशनकार्ड में मेरे बच्चे का नाम जोड़ दीजिए, भागलपुर में हाथ के सहारे चलकर ब्लॉक पहुंचा दिव्यांग

राशन कार्ड में मेरा व मेरे बच्चे का नाम जोड़ दीजिए. हाथ के सहारे चल कर पहुंचा हूं ब्लॉक. इतना निवेदन करने के बावजूद करहरिया पंचायत देवधा के दिव्यांग अंजनी कुमार को कोई सुनने को तैयार नहीं हुआ.

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भागलपुर. हुजूर! राशन कार्ड में मेरा व मेरे बच्चे का नाम जोड़ दीजिए. हाथ के सहारे चल कर ब्लॉक पहुंचा हूं. इतना निवेदन करने के बावजूद करहरिया पंचायत देवधा के दिव्यांग अंजनी कुमार को कोई सुनने को तैयार नहीं हुआ. दिव्यांग छह माह से राशन कार्ड में अपना और अपने तीन बच्चों का नाम जुड़वाने कार्यालय का चक्कर लगा रहा है. दिव्यांग प्रत्येक दो से तीन दिन बाद प्रखंड कार्यालय पहुंचता है. आरटीपीएस काउंटर के बरामदे पर बैठ कर घंटों कागजात को निहारता हैं. आरटीपीएस काउंटर पर राशन कार्ड में नाम जुड़वाने की गुहार लगाता है.

राशन कार्ड में नाम जोड़ने का फॉर्म जमा नहीं किया गया.

दिव्यांग लगभग छह महीने से राशन कार्ड में अपना और अपने तीन बच्चों का नाम जुड़वाने कार्यालय का चक्कर लगा कर परेशान हो गया है. उसके बार बार गुहार लगाने पर उसे बताया जाता है कि अभी नाम जुड़वाने की प्रक्रिया नहीं चल रही है. सोमवार को दिव्यांग ने बताया कि 20 किलोमीटर दूर करहरिया पंचायत के देवधा गांव से सौ रुपये भाड़ा देकर आता हैं. राशन कार्ड में नाम जोड़ने का फॉर्म तो मिल गया लेकिन अब तक जमा नहीं किया गया है. फार्म जमा नहीं होने से निराश दिव्यांग घर वापस लौट गया.

पत्नी के नाम से बना है राशन कार्ड

दिव्यांग ने बताया कि काफी प्रयास के बाद पत्नी बंटी देवी के नाम से राशन कार्ड बना है. राशन कार्ड बनाने के दौरान अपना नाम और तीन बच्चे का आधार कार्ड संलग्न किये थे, लेकिन सिर्फ पत्नी के नाम से ही राशन कार्ड बन पाया है. इससे पांच किलो ही अनाज मिलता है. घर चलाना मुश्किल है.

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पंचर दुकान चला करता है जीवन यापन

दिव्यांग पैर से चलने में असमर्थ है. हाथ के सहारे चलता हैं. उसने बताया कि गांव से प्रखंड कार्यालय आने में काफी परेशानी होती है. गांव में ही पंचर की दुकान चलाता हूं. उसी से परिवार का भरण पोषण होता है. राशन कार्ड में नाम जुड़वाने के लिए जब प्रखंड कार्यालय आते हैं, तो दूसरों से कर्ज लेना पड़ता है. दिव्यांग को दो लड़का और एक लड़की है. पांच किलो अनाज से हर माह परेशानी हो रही है. उसने अविलंब राशन कार्ड में नाम जुड़वाने के लिए गुहार लगायी.

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