Darbhanga News: संस्कृत विश्वविद्यालय में 10 माह से नहीं हो रही सिंडिकेट की बैठक

Updated at : 09 Feb 2025 10:53 PM (IST)
विज्ञापन
Darbhanga News: संस्कृत विश्वविद्यालय में 10 माह से नहीं हो रही सिंडिकेट की बैठक

Darbhanga News:कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय में करीब 10 माह से सिंडिकेट की बैठक नहीं हुई है.

विज्ञापन

Darbhanga News: दरभंगा. कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय में करीब 10 माह से सिंडिकेट की बैठक नहीं हुई है. प्रावधान के अनुसार प्रत्येक माह सिंडिकेट की कम से कम एक बैठक होनी चाहिए. 10 माह से सिंडिकेट की बैठक नहीं होना शिक्षाकर्मियों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है. लोग इसे विवि प्रशासन की उदासीनता बता रहे हैं. जानकारी के अनुसार अंतिम बार बैठक अप्रैल 2024 में हुई थी. इसके बाद से अब तक बैठक नहीं हुई है. जबकि प्रावधान अनुसार इस बीच 10 बैठकें हो जानी चाहिए थी.

वित्तीय एवं प्रशासनिक मामले में अंतिम निर्णय लेता है सिंडिकेट

जानकारों का कहना है कि विवि का एग्जीक्यूटिव काउंसिल कहलाने वाला सिंडिकेट वित्तीय एवं प्रशासनिक मामले में अंतिम निर्णय लेने वाली सबसे महत्वपूर्ण कमेटी है. बिना सिंडिकेट के निर्णय के विवि के वित्तीय एवं प्रशासनिक कार्यों का संचालन किया जाना कई सवालों को जन्म दे सकता है. प्रावधानों के अनुसार जितनी भी अधिनियमित या परिनियमित समितियां है, उसके निर्णय को सिंडिकेट से पास कराना अनिवार्य होता है. इसके बाद ही निर्णय काे कार्यान्वित किया जा सकता है. वित्त समिति व विद्वत परिषद सहित अन्य सभी 18 परिनियमित समितियां केवल अनुशंसा कर सकती है. अनुमोदित करने का अधिकार सिर्फ सिंडिकेट को है. इसलिए विवि के सभी कार्यों को संचालित करने के लिए प्रत्येक माह सिंडिकेट की कम से कम एक बैठक की अनिवार्यता है. कुलपति चाहें तो जरूरत अनुसार इसमें बढ़ोत्तरी भी कर सकते हैं.

बैठक नहींं होना विवि अधिनियम का उल्लंघन

बताया जाता है कि सिंडिकेट की नियमित बैठक नहींं होना विवि अधिनियम की धारा 22(3) का उल्लंघन है. जानकारी के अनुसार किसी भी परिनियमित समिति के प्रस्ताव को तब ही कार्यरूप दिया जा सकता, जब उसका अनुमोदन सिंडिकेट कर दे. वैसे कोर्ट केस जैसे कतिपय विशेष मामले, जिसमें तत्क्षण निर्णय लेना आवश्यक है, सिंडिकेट से अनुमोदन की प्रत्याशा में कुलपति निर्णय ले सकते हैं.

प्रशासनिक आदेश के तहत हो रहा काम

जानकारी के अनुसार सिंडिकेट की बैठक काफी दिनों से नहीं होने के कारण सभी कार्य प्रशासनिक आदेश के तहत हो रहा है. इस कारण पूर्व के निर्णय का कार्यान्वयन एवं आगे की योजना पर विचार नहीं हो पा रहा हैै. प्रशासनिक आदेश से किये जा रहे कार्यों की समीक्षा नहीं हो पा रही है, ताकि स्पष्ट हो सके कि काम प्रावधान के अनुकूल है या प्रतिकूल. कुलपति प्रो. लक्ष्मी निवास पांडेय ने बताया कि

विभिन्न कारणों से सिंडिकेट की बैठक बुलाने की आवश्यकता नहीं महसूस हुई. कभी खुद तो कभी कुलसचिव मुख्यालय से बाहर थे. बैठक की तिथि निर्धारण को लेकर दो- तीन महीने से विचार किया जा रहा है. अब बैठक बुलाने की प्रक्रिया शुरू की जायेगी.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

विज्ञापन
Prabhat Khabar News Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar News Desk

यह प्रभात खबर का न्यूज डेस्क है। इसमें बिहार-झारखंड-ओडिशा-दिल्‍ली समेत प्रभात खबर के विशाल ग्राउंड नेटवर्क के रिपोर्ट्स के जरिए भेजी खबरों का प्रकाशन होता है।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन