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Darbhanga News: सभी में स्वयं को देखना भारतीय मनोविज्ञान का मूल आधार

Updated at : 27 Nov 2024 10:53 PM (IST)
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Darbhanga News: सभी में स्वयं को देखना भारतीय मनोविज्ञान का मूल आधार

Darbhanga News:मारवाड़ी कॉलेज में “भारतीय परंपरा में मनोविज्ञान” विषय पर बुधवार को ऑन एवं ऑफलाइन मोड में राष्ट्रीय संगोष्ठी हुई.

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Darbhanga News: दरभंगा. मारवाड़ी कॉलेज में “भारतीय परंपरा में मनोविज्ञान” विषय पर बुधवार को ऑन एवं ऑफलाइन मोड में राष्ट्रीय संगोष्ठी हुई. मुख्य वक्ता सह डीयू के डिप्टी प्रॉक्टर डॉ सौरभ ने भारतीय मनोविज्ञान की गहराई और विविधता को रेखांकित किया. कहा कि “सभी में स्वयं को देखना” भारतीय मनोविज्ञान का मूल आधार है. भारतीय परंपरा में उपस्थित तत्वों, आत्मवत सर्वभूतेषु (सभी प्राणियों में आत्मा का भाव), पंचमहायज्ञ और धर्म की राष्ट्रीय दृष्टि का विश्लेषण करते हुए कहा कि यह केवल आध्यात्मिक शांति प्रदान नहीं करते, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य और समाज के सामूहिक कल्याण के लिए भी आवश्यक हैं. मुख्य अतिथि सह सम्पूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय, वाराणसी के प्रो. रमेश प्रसाद ने बौद्ध दृष्टिकोण से मनोविज्ञान की व्याख्या की. बताया कि किस प्रकार बौद्ध मनोविज्ञान ध्यान और सति (स्मृति) के माध्यम से मानसिक शांति और स्थिरता प्रदान करता है.

भारतीय धर्मग्रंथ आधुनिक मनोविज्ञान के लिए प्रेरणास्त्रोत- प्रो. सुलतानिया

पीजी मनोविज्ञान विभागाध्यक्ष प्रो. एमके सुलतानिया ने श्रीमद भगवद्गीता और उपनिषद के मनोवैज्ञानिक पहलुओं पर चर्चा की. कहा कि इन ग्रंथों में वर्णित सिद्धांत आधुनिक मनोविज्ञान के लिए प्रेरणा स्त्रोत हो सकते हैं. दक्षिण कोरिया से ऑनलाइन जुड़े भंते धम्मदीप ने ध्यान की मनोवैज्ञानिक तकनीकों पर प्रकाश डाला. उन्होंने “सति ध्यान” के अभ्यास का पर बल दिया.

भारतीय परंपरा केवल आध्यात्मिकता तक सीमित नहीं- डॉ कविता

प्रधानाचार्य डॉ कुमारी कविता ने अध्यक्षता करते हुए कहा कि भारतीय परंपराएं केवल आध्यात्मिकता तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे मानसिक स्वास्थ्य, सामाजिक समरसता और वैश्विक कल्याण के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं. कहा कि संगोष्ठी का उद्देश्य भारतीय परंपरा के मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोणों को न केवल उजागर करना है, बल्कि उनके आधुनिक मनोविज्ञान के साथ अंतर्संबंध को स्थापित करना भी है. आयोजन सचिव डॉ विकास सिंह ने कहा कि संगोष्ठी भारतीय परंपरा में निहित गहरे मनोवैज्ञानिक ज्ञान और आधुनिक विचारधारा के बीच सेतु के रूप में कार्य की है. डॉ गौडी शंकर रॉय ने इससे पूर्व विषय प्रवेश कराते हुए भारतीय मनोवैज्ञानिक सिद्धांतों की आधुनिक चुनौतियों और उनके समाधान पर विचार व्यक्त किया. डीएमसीएच के पूर्व अधीक्षक डॉ सूरज नायक ने कहा कि भारतीय परंपरा में समाहित मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण मानसिक स्वास्थ्य, भावनात्मक संतुलन और आत्म-विकास में सहायक हो सकता है.

भारतीय मनोविज्ञान का मूल उद्देश्य सामूहिक कल्याण- डॉ राजेंद्र

डीयू के जानकी देवी मेमोरियल कॉलेज के डॉ राजेंद्र कुमार ने वैदिक मनोविज्ञान और भगवद्गीता के मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण पर चर्चा की. “शिवसंकल्पसूक्त” का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय मनोविज्ञान का मूल उद्देश्य केवल व्यक्ति की शांति नहीं, बल्कि सामूहिक कल्याण है. संगोष्ठी में दक्षिण कोरिया, थाइलैंड, श्रीलंका और वियतनाम सहित कई देशों के विद्वानों ने विचार रखा. गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के डॉ प्रियदर्शिनी मित्रा और डॉ विनोद बैठा ने भी विचार रखा. अतिथियों का स्वागत डॉ सुनीता कुमारी एवं धन्यवाद ज्ञापन डॉ अवधेश प्रसाद यादव ने किया.

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