DMCH: चूहों ने कुतर डाली करोड़ों की कैथलैब मशीन, मरीज भुगत रहे खामियाजा, बढ़ी परेशानी

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चूहों से खराब हुई DMCH की करोड़ों की कैथलैब, मरीजों को झटका

करोड़ों की कैथलैब मशीन पड़ी-पड़ी हुई खराब, चूहों ने कुतरे तार

दरभंगा मेडिकल कॉलेज अस्पताल में करोड़ों की लागत से लगाई गई कैथलैब मशीन चूहों के हमले से खराब हो गई है. वर्षों से यह मशीन चालू न होने के कारण स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं. यदि मशीन ठीक हो जाती है, तो मिथिला क्षेत्र के हृदय रोगियों को बड़ी राहत मिलेगी.

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DMCH Cath Lab: दरभंगा मेडिकल कॉलेज अस्पताल (DMCH) के सुपरस्पेशलिटी अस्पताल में करोड़ों रुपये की लागत से लगाई गई अत्याधुनिक कैथलैब (Cath Lab) मशीन वर्षों तक चालू नहीं हो सकी. लंबे समय तक उपयोग नहीं होने के कारण अब यह मशीन खराब हो गई है. अस्पताल सूत्रों के अनुसार मशीन के अंदर चूहों के घुस जाने और तार कुतर देने से यह उपकरण क्षतिग्रस्त हो गया है. इस मामले ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली और महंगे चिकित्सा उपकरणों के रखरखाव पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

वर्षों से चालू नहीं हो सकी कैथलैब मशीन

जानकारी के अनुसार डीएमसीएच के सुपरस्पेशलिटी अस्पताल में कार्डियोलॉजी विभाग पहले से संचालित है और विशेषज्ञ चिकित्सकों की भी तैनाती की जा चुकी है. इसके बावजूद कैथलैब मशीन का संचालन शुरू नहीं हो पाया. इसका सबसे बड़ा नुकसान हृदय रोगियों को उठाना पड़ रहा है. हार्ट अटैक और गंभीर हृदय रोग के मरीजों को आज भी इलाज के लिए पटना या अन्य बड़े अस्पतालों में रेफर करना पड़ता है.

अब कंपनी के इंजीनियर करेंगे जांच

अस्पताल प्रशासन ने मशीन खराब होने की सूचना संबंधित कंपनी को दे दी है. कंपनी के इंजीनियर जल्द अस्पताल पहुंचकर मशीन का निरीक्षण करेंगे और तकनीकी रिपोर्ट तैयार करेंगे. रिपोर्ट के आधार पर तय होगा कि मशीन की मरम्मत संभव है या नहीं और इसे दोबारा चालू करने में कितना समय और खर्च लगेगा.

चालू हुई तो मिथिला के मरीजों को मिलेगी बड़ी राहत

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कैथलैब मशीन फिर से चालू हो जाती है तो दरभंगा सहित पूरे मिथिला क्षेत्र के हजारों हृदय रोगियों को बड़ी राहत मिलेगी. हार्ट अटैक के मामलों में एंजियोग्राफी और एंजियोप्लास्टी जैसी जीवनरक्षक सेवाएं स्थानीय स्तर पर उपलब्ध हो सकेंगी. इससे मरीजों को दूसरे शहर रेफर करने की जरूरत काफी कम हो जाएगी और गोल्डन आवर में इलाज मिलने से कई जानें बचाई जा सकेंगी.

सरकारी संसाधनों के रखरखाव पर उठे सवाल

मामले ने यह भी उजागर किया है कि करोड़ों रुपये की लागत से खरीदे गए चिकित्सा उपकरणों के रखरखाव और समय पर संचालन के लिए प्रभावी व्यवस्था नहीं होने से सरकारी संसाधनों का नुकसान हो रहा है. अब मरीजों और स्थानीय लोगों की नजर स्वास्थ्य विभाग की अगली कार्रवाई और इंजीनियर की रिपोर्ट पर टिकी है.

क्या बोले डीएमसीएच अधीक्षक?

डीएमसीएच के अधीक्षक डॉ. जगदीश चंद्रा ने बताया कि कैथलैब मशीन को ठीक कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. संबंधित कंपनी को सूचना दे दी गई है. मशीन दुरुस्त होने के बाद हार्ट अटैक के मरीजों का स्थानीय स्तर पर ही इलाज संभव हो सकेगा.

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अजय कुमार मिश्रा

लेखक के बारे में

By अजय कुमार मिश्रा

अजय कुमार मिश्रा पिछले 10 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. स्वास्थ्य, एयरपोर्ट, परिवहन, सामाजिक एवं राजनीतिक मुद्दों पर गंभीर और तथ्यपूर्ण रिपोर्टिंग इनकी पहचान है. आम जनजीवन से जुड़े विषयों को प्रमुखता से उठाना इनकी कार्यशैली की विशेष पहचान रही है.

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