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Darbhanga: दरभंगा - मधुबनी के बीच महिलाओं के लिए चलाई जा रही पिंक बस सेवा बनी घाटे का सौदा

Updated at : 01 Aug 2025 8:55 PM (IST)
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Darbhanga: दरभंगा - मधुबनी के बीच महिलाओं के लिए चलाई जा रही पिंक बस सेवा बनी घाटे का सौदा

दरभंगा- मधुबनी के बीच महिलाओं के लिये संचालित पिंक बस सेवा घाटे का सौदा बन गयी है. बस को महिला यात्री नहीं मिल रही.

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दरभंगा. दरभंगा- मधुबनी के बीच महिलाओं के लिये संचालित पिंक बस सेवा घाटे का सौदा बन गयी है. बस को महिला यात्री नहीं मिल रही. इस कारण हर फेरी में बस की अधिकांश सीट खाली रह जा रही है. बिहार राज्य पथ परिवहन निगम की दो बसें प्रतिदिन दरभंगा- मधुबनी के बीच चार फेरे लगा रही है. जानकारी के अनुसार बस चलाने के लिये विभाग को प्रतिदिन लगभग 2000 रुपये का सीएनजी भराना होता है. चालक व संवाहक के वेतन का बोझ उपर से उठाना पड़ रहा है. बसों के रखरखाव लागत तथा प्रशासनिक खर्च वित्तीय बोझ को और बढ़ा रहा है. मिली जानकारी के अनुसार किराए से प्रतिदिन महज 800 से 900 रुपये ही आ रहे हैं. ऐसे में इंधन (सीएनजी) का पैसा भी नहीं निकल पा रहा है. विभाग को हर दिन करीब 1200 रुपये का इंधन अन्य श्रोत से पैसा लेकर खरीदना पड़ रहा है. बता दें कि रोजाना सुबह सात व आठ बजे कादिराबाद सरकारी बस अड्डा से दोनों बसें मधुबनी के लिये रवाना होती है. बस में 22 सीट है.

महिलाओं की सुरक्षा व सुविधा को लेकर शुरू की गयी थी सेवा

महिलाओं की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखकर सरकार ने पिंक बस सेवा शुरू की है. इन बसों में सीसीटीवी, जीपीएस, और पैनिक बटन जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध है. किराया भी अन्य बसों की तुलना में महज 25 रुपये रखा गया है. वैसे दरभंगा से मधुबनी का सामान्य किराया 50 रुपये बताया गया है. बावजूद, अपेक्षित संख्या में महिला यात्री इस सेवा का नहीं मिल रही है. इस कारण आय और खर्च के बीच भारी असंतुलन बना हुआ है.

पति व बच्चों को साथ में यात्रा करने की इजाजत नहीं

महिला यात्रियों ने बताया कि पति व बच्चों के साथ इस बस पर यात्रा नहीं करने दी जाती है. विभागीय निर्देश के मद्देनजर कंडक्टर उन्हें बस में नहीं चढ़ने देती है. इस कारण परिवार के साथ यात्रा करने वाली महिलायें इस बस का उपयोग नहीं कर पा रही है. वहीं परिवहन विभाग के एक अधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि पिंक बस सेवा को शुरू करने का उद्देश्य महिलाओं को सुरक्षित और सस्ता परिवहन साधन उपलब्ध कराना था, लेकिन कम यात्री संख्या के कारण यह योजना आर्थिक रूप से व्यावहारिक नहीं रह गई है.

अजय कुमार मिश्रा

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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