मिथिला विश्वविद्यालय के 400 शोधार्थियों को पीजीआरसी की बैठक का सात माह से इंतजार
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 04 Jul 2024 11:35 PM
शोधार्थियों को सिनोप्सिस स्वीकृति के लिए पोस्ट ग्रेजुएट रिसर्च काउंसिल (पीजीआरसी) की बैठक का इंतजार है.
दरभंगा. लनामिवि के पीएचडी एडमिशन टेस्ट 2021 एवं 2022 के करीब दो दर्जन विषयों के 400 शोधार्थियों को सिनोप्सिस स्वीकृति के लिए पोस्ट ग्रेजुएट रिसर्च काउंसिल (पीजीआरसी) की बैठक का इंतजार है. इन शोधार्थियों का कोर्स वर्ग विषयवार नवंबर 2023 तक संपन्न हो चुका है. कोर्स वर्ग परीक्षा का रिजल्ट भी जारी हो चुका है. कोर्स वर्ग परीक्षा में पास शोधार्थियों का सिनोप्सिस विभागीय शोध परिषद से अनुशंसित कर अधिकांश पीजी विभागों ने ससमय तथा कुछ विभागों ने कुछ दिन बाद विश्वविद्यालय के पीएचडी शाखा को भेज दिया है. बावजूद विवि द्वारा पीजीआरसी की बैठक आयोजित करने में विलंब से शोधार्थी परेशान हैं. शोधार्थियों का कहना है कि पीजीआरसी से जब तक सिनोप्सिस स्वीकृत नहीं हो जाता है, तब तक पीएचडी में पंजीयन कराने के लिए शुल्क जमा नहीं हो सकता. पीजीआरसी से जब तक सिनोप्सिस स्वीकृत नहीं हो जाता है, तब तक विभागीय शोध परिषद से अनुशंसित सिनोप्सिस पर शोध का काम नहीं कर सकते. कारण यह है कि पीजीआरसी में शामिल विशेषज्ञों को यह अधिकार है कि विभागीय शोध परिषद से अनुशंसित सिनोप्सिस में संशोधन अथवा बदलाव का सुझाव दे सकते हैंं. शोधार्थियों का कहना है कि पीएचडी के लिए शोध प्रबंध जमा करने के लिये बिना विस्तार की अनुमति के न्यूनतम एवं अधिकतम समय की प्रभावी तिथि की गणना कोर्स वर्ग में नामांकन की तिथि से ही की जाती है. ऐसे में पीजीआरसी से सिनोप्सिस स्वीकृति में विलंब से शोधार्थियों की न्यूनतम तथा अधिकतम दोनों समय सीमा प्रभावित हो रही है. जानकारों का कहना है कि पीजीआरसी की बैठक में सिनोप्सिस की गुणवत्ता की जांच होती है. इस क्रम में यह देखा जाता है कि सिनोप्सिस के विषय में नयापन क्या है? वह कितना समाजोपयोगी होगा? कितना शिक्षाप्रद है. कहीं ऐसा तो नहीं कि इसे बार- बार प्रस्तुत किया जा रहा है. सिनोप्सिस कितना प्रभावी है. मानक के अनुकूल है या नहीं? अभ्यर्थी की अर्हता, विभागीय शोध परिषद की अनुशंसा, पर्यवेक्षकों की अर्हता, विशेषज्ञता तथा यूजीसी के मानक पर खड़ा उतर रहा है या नहीं? इन सभी बिंदुओं की जांच के बाद ही सिनोप्सिस स्वीकृत की जाती है. परीक्षा नियंत्रक प्रो. विनोद कुमार ओझा ने बताया कि कतिपय विषयों के पीजी विभागों से सिनोप्सिस विलंब से पीएचडी शाखा को प्राप्त हुआ है. सभी विभागों को एक साथ लेकर चलना जरूरी है. इसलिए कुछ समय ज्यादा लग रहा है. पीजीआरसी की बैठक जल्द से जल्द आयोजित हो, इसकी तैयारी चल रही है. बाह्य विशेषज्ञों को नामित करने को लेकर विचार किया गया है. बैठक की तिथि निर्धारण को लेकर प्रस्ताव दिया जा रहा है. संभावना है कि 21 जुलाई से बैठक बुलायी जा सकेगी.
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