Darbhanga News: दरभंगा. प्रकृति में होने वाले बदलाव के अनुरूप खुद को तैयार करने का संदेश देने वाला पर्व मकर संक्रांति नई पीढ़ी को बुजुर्गों के प्रति उनके दायित्व का बोध कराने के साथ संपन्न हो गया. इसे लेकर एक दिन पूर्व मंगलवार से ही परिवार में उत्सवी वातावरण नजर आ रहा था. घर की महिलाओं ने त्योहार में उपयोग आने वाले चूरा, मुरही, तिल आदि की लाइ तैयार कर लिया था. बुधवार की सुबह मुंह अंधेरे लोगों ने बिस्तर छोड़ दिया. इस सीजन का सबसे राहत भरा दिन होने के कारण श्रद्धालुओं में अधिक उत्साह नजर आया. लोगों ने पवित्र जल से स्नान कर पूजा की. भिगोए हुए अरवा चावल, तिल एवं गुड़ का प्रसाद भोग लगाया. इसके बाद अपने से छोटे घर के सदस्यों के बीच प्रसाद स्वरूप इसका वितरण किया. इस दौरान तिल खेत बहबऽ? के जवाब में स्वीकारोक्ति नई पीढ़ी की ओर से मिली. उल्लेखनीय है कि इस पर्व के मौके पर तिल देकर नई पीढ़ी को भविष्य में आवश्यकता पड़ने पर बुजुर्गों की सेवा का दायित्व बोध कराया जाता है. इधर, मकर संक्रांति पर्व पर बच्चों का उत्साह चरम पर नजर आया. सुबह-सुबह स्नान आदि से निवृत्त होकर कुरकुरे चूरा, मुरही, तिल आदि के गुड़ की चासनी में लिपटकर लजीज बनी लाइ का आनंद लिया. तिलकुट भी खाए. दिन में लोगों ने परंपरा के अनुसार चूरा-दही भोजन किया. रात में आलू, गोभी, मटर, टमाटर आदि सब्जियों के साथ तैयार स्वादिष्ट खिचड़ी के साथ विभिन्न तरह के तरुआ का स्वाद लिया.
मौके पर बच्चों एवं युवाओं ने जमकर पतंगबाजी भी की. दोपहर बाद सर्द मौसम होने के बावजूद अपने घर की छत से जहां पतंग उड़ाने लगे, वहीं राज परिसर में भी बड़ी संख्या में लोग रंग-बिरंगे पतंग लेकर पहुंच गए. इसमें बच्चों व नौजवानों की संख्या अधिक थी, लेकिन अधेड़ आयु वर्ग के लोग भी शरीक दिखे.
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