Darbhanga: ज्ञान और दर्शन के साथ क्रांति और प्रतिरोध की भूमि रही है बिहार

लनामिवि के पीजी इतिहास विभाग में शुक्रवार को बिहार में क्रांतिकारी आंदोलन विषय पर विशेष व्याख्यान हुआ.
दरभंगा. लनामिवि के पीजी इतिहास विभाग में शुक्रवार को बिहार में क्रांतिकारी आंदोलन विषय पर विशेष व्याख्यान हुआ. विभागाध्यक्ष प्रो. संजय झा की अध्यक्षता में हुये व्याख्यान में मुख्य अतिथि सह जीडी कॉलेज बेगूसराय के प्राध्यापक डॉ अभिमन्यु प्रसाद ने कहा कि बिहार की भूमि केवल ज्ञान और दर्शन की नहीं, बल्कि क्रांति और प्रतिरोध की भी भूमि रही है. जब भगत सिंह बिहार आए थे, तब उन्हें “रॉबिनहुड ऑफ बिहार” कहे जाने वाले योगेंद्र शुक्ल से हथियार चलाने का प्रशिक्षण मिला था. यह तथ्य दर्शाता है कि बिहार ने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में न केवल विचार, बल्कि संगठित संघर्ष की ऊर्जा भी दी.
फणीश्वर नाथ रेणु के समग्र साहित्य में जनता की आवाज
आंचलिक उपन्यास के प्रणेता फणीश्वर नाथ रेणु के समग्र साहित्य में मौजूद क्रांतिकारी भावना की चर्चा करते हुए कहा कि रेणु ने अपने कथा संसार में उसी जनता की आवाज दर्ज की, जो अक्सर इतिहास की पुस्तकों में दबा दी जाती है. भगवान बिरसा मुंडा के नेतृत्व में जनजातीय चेतना को भारत के स्वाभिमान का प्रतीक बताते हुए डॉ प्रसाद ने कहा कि जनजातीय गौरव दिवस केवल स्मरण दिवस नहीं, बल्कि संग्राम और अस्मिता का उत्सव है.अध्यक्षता करते हुए प्रो. संजय झा ने कहा कि इतिहास केवल अतीत का लेखा-जोखा नहीं, बल्कि विचार, विमर्श और चेतना का जीवंत प्रवाह है. इतिहास की आत्मा संवाद में बसती है. जब तक प्रश्न जीवित है, इतिहास जीवित है. इससे पहले डॉ अमिताभ कुमार ने विषय प्रवेश कराया. कार्यक्रम में प्रो. नैयर आजम, डॉ अमीर अली खान, डॉ अमित कुमार, डॉ ज्योति प्रभा, सहित शोधार्थी और छात्र-छात्रा मौजूद थे. संचालन डॉ मनीष कुमार और धन्यवाद ज्ञापन डॉ ज्योति प्रभा ने की.
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