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संस्कृत को राष्ट्रभाषा बनाने के पक्षधर थे डॉ भीमराव आंबेडकर

2 दिवसीय आवासीय संस्कृत प्रशिक्षण वर्ग का उद्घाटन गुरुवार को दरबार हॉल में हुआ

दरभंगा. संस्कृत भारती बिहार न्यास एवं कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय की ओर से आयोजित 12 दिवसीय आवासीय संस्कृत प्रशिक्षण वर्ग का उद्घाटन गुरुवार को दरबार हॉल में हुआ. बिहार एवं झारखंड के प्रशिक्षुओं का प्रशिक्षण वर्ग 17 जून तक चलेगा. कुलपति प्रो. लक्ष्मी निवास पांडेय ने कहा कि आज से करीब 40 वर्ष पूर्व चमूकृष्ण शास्त्री ने कुछ छात्रों के साथ संस्कृत संभाषण कार्य की शुरुआत की थी. इसका परिणाम आज देश और विदेशों में दिख रहा है. कहा कि डॉ भीमराव आंबेडकर संस्कृत को राष्ट्रभाषा बनाने के पक्षधर थे. हमें संस्कृत शास्त्रों के संरक्षण के साथ- साथ संस्कृत संभाषण पर बल देना होगा. कहा कि भाषा शिक्षण सरकार द्वारा नहीं किया जा रहा है. यदि संस्कृत संभाषण नहीं होंगे, तो इसे लोग कैसे सुनेंगे और यदि सुनेंगे नहीं तो वे बोलेंगे कैसे. इसकी व्यापकता के लिए संभाषण प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाना होगा. कहा कि तोता रटंत संस्कृत से यह व्यवहारिक भाषा नहीं बन सकती है. संस्कृत में सामर्थ्य है, परंतु इसके लिए अभ्यास नहीं हो रहा है. अभ्यास के लिए इस तरह के आवासीय प्रशिक्षण वर्ग का आयोजन किया जाना आवश्यक है. पूर्व कुलपति प्रो. शशिनाथ झा ने कहा कि इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम से संस्कृत वातावरण का निर्माण होता है. प्रशिक्षणार्थी अपने दैनिक व्यवहार में संस्कृत को आत्मसात कर लोगों को संस्कृत संभाषण के लिए प्रेरित करें. कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए संस्कृत भारती के प्रांत अध्यक्ष प्रो. इंद्रनाथ झा ने कहा कि विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में संस्कृत पढ़ने के लिए छात्रों को प्रेरित करना चाहिए. संस्कृत भारती के कार्यकर्ताओं के लिए संस्कृत सेवा ईश्वरीय कार्य है, ऐसा मानकर ही वे राष्ट्रहित में कार्य करते हैं. संस्कृत भाषा जनभाषा व लोकभाषा के साथ साथ व्यवहारिक भाषा बने, इसके लिए वे संकल्पित होते हैं. इस भावना को और दृढ़ करने की जरूरत है. पूर्व कुलपति सह आरएसएस के जिला संघचालक प्रो. रामचंद्र झा ने कहा कि संस्कृत विश्वविद्यालयों में संस्कृत माध्यम से पढ़ाई होने पर यह आसानी से बोलचाल की भाषा बनेगी. पूर्व में संस्कृत मिथिला की बोलचाल की भाषा थी. संस्कृत भारती 54 देशों में संस्कृत संभाषण का प्रशिक्षण कार्य चला रही है. कहा कि भारत की प्रतिष्ठा संस्कृत एवं संस्कृति में निहित है. इस ओर सभी का ध्यान आवश्यक है. संस्कृत भारती के क्षेत्रमंत्री प्रो. श्रीप्रकाश पांडेय ने कहा कि संस्कृत भारती के कार्यकर्ताओं के परिश्रम से कर्नाटक, मध्यप्रदेश आदि प्रदेशों में संस्कृतग्राम का निर्माण हुआ है. बिहार में भी संस्कृतग्राम निर्माण के लिए संस्कृत भारती कार्यकर्ताओं को अथक प्रयास करना होगा. प्रांत मंत्री डॉ रमेश कुमार झा ने कहा कि भाषा शिक्षण, व्यवहार शिक्षण व कौशल विकास इस प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य है. पीआरओ निशिकान्त ने बताया कि बिहार के 17 जिले से 101 तथा झारखंड के छह जिले से 25 कुल 126 प्रतिभागी शिविर में पंजीकृत हुए हैं. बताया कि डीएसडब्ल्यू डॉ शिवलोचन झा तथा सीसीडीसी डॉ दिनेश झा, एनएसएस पदाधिकारी डॉ सुधीर कुमार झा तथा भू सम्पदा पदाधिकारी डॉ उमेश झा टीम प्रशिक्षुओं की व्यवस्था देख रहे हैं. इससे पूर्व शुभारंभ वैदिक एवं लौकिक मंगलाचरण एवं दीप प्रज्ज्वलन से हुआ. अतिथियों का सम्मान डॉ दिनेश झा, डॉ घनश्याम मिश्र, डॉ दीनानाथ साह, डॉ संजीत कुमार झा, डॉ त्रिलोक झा ने किया. डॉ रामसेवक झा के संयोजकत्व में आयोजित कार्यक्रम में स्वागत भाषण डॉ घनश्याम मिश्र, संचालन डॉ चंद्रमाधव सिंह, धन्यवाद ज्ञापन डॉ त्रिलोक झा ने किया. मौके पर प्रो. लक्ष्मीनाथ झा, प्रो. पुरेंद्र वारिक, प्रो. रेणुका सिन्हा, प्रो. दयानाथ झा, डॉ विनय कुमार मिश्र, डॉ संदीप तिवारी, श्रवण कुमार, अखिलेश कुमार मिश्र, डॉ वीरसनातन पूर्णेंदु राय, अंकुश कुमार, डॉ उमेश झा, डॉ महानंद ठाकुर, डॉ शंभूशरण तिवारी, डॉ अयोध्यानाथ झा आदि मौजूद रहे.

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