Darbhanga News: लहलहाती फसल के साथ किसानों की सपने को रौंद रहे नीलगाय व जंगली सुअरों के झुंड

Darbhanga News:जिले के विभिन्न प्रखंडों में नीलगायों व जंगली सुअरों का आतंक दिन-प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है.
Darbhanga News: पुरुषोत्तम चौधरी, बहादुरपुर. जिले के विभिन्न प्रखंडों में नीलगायों व जंगली सुअरों का आतंक दिन-प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है. नीलगायों के झुंड किसानों की लहलहाती फसल को रौंद व खा जाती है. अब तो बंदरों ने भी परेशान करना शुरू कर दिया है. ये जानवर लहलहाती फसलों के साथ किसानों की उम्मीदों को रौंद रहे हैं. इस कारण किसान आलू, मसूर, सरसों, गेहूं सहित अन्य फसलों की खेती करने से अब कतराने लगे हैं. हालांकि किसानों द्वारा फसल बचाने के लिए तरह-तरह के उपाय भी किये गये, बावजूद नीलगायों का आतंक थमने का नाम नहीं ले रहा है. लहलहाती फसल को नुकसान से बचाने के लिए सरकार ने नीलगाय के शिकार का रास्ता अपनाया है. वहीं इस समस्या से निजात दिलाने के लिए स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने किसान हित में वन विभाग को नीलगायों के शूट किए जाने का अनुरोध किया है.
इन प्रखंडों में समस्या अधिक
वैसे तो जिले के करीब करीब सभी प्रखंडों में नीलगाय व जंगली सुअरों का आंतक बना हुआ है. इसमें हनुमाननगर, बहादुरपुर, हायाघाट, केवटी, कमतौल, सदर, सिंहवाड़ा, मनीगाछी, बिरौल, तारडीह, बहेड़ी, कुशेश्वरस्थान, कुशेश्वरस्थान पूर्वी, अलीनगर, गौड़ाबौराम सहित अन्य प्रखंडों में इन जानवरों का आतंक है. इस कारण किसानों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.राज्य में 13 शूटर निबंधित
पूरे राज्य में 13 शूटर (आखेटक) रजिस्टर्ड हैं. इसमें दरभंगा के आलोक कुमार, गया के क्याम अख्तर, पटना के तारीख राजा खान, उत्तर प्रदेश के नवाब साद बिन आसिफ, पश्चिम बंगाल के सुमन मंडल, मो. अशरफउल हक, हैदराबाद के पी. राज गोपाल रेड्डी, इरला चंदन, असगर अली खान, मो. शैलुउद्दीन फारुकी, नबाव शफथ अली खान, शास्त्री नगर के शक्ति कुमार, सिकंदराबाद के मारकस जी कैंपोस शूटर हैं. सरकारी स्तर पर इन शूटरों का नंबर उपलब्ध है. प्रति नीलगाय व जंगली सूअर को मारने के लिए शूटरों को 750 रुपये देने का प्रावधान है. साथ ही आने-जाने के लिए 750 रुपये व नीलगाय व जंगली सूअर को जमीन में दफन करने के लिए 1250 रुपये निर्धारित हैं. यह राशि ग्राम पंचायत द्वारा दी जाती है.एक बार में 50 जानवरों को मारने की अनुमति
नीलगाय व जंगली सुअरों से निबटने के लिए किसानों को संबंधित मुखिया को लिखित देना होगा. मुखिया इस शिकायत को रजिस्टर्ड करते हुए जिला पंचायती राज पदाधिकारी को पत्र लिखेंगे. इसके बाद जंगली सूअर व नीलगाय को मारने की रणनीति पंचायत में तैयार की जायेगी. एक बार में 50 ऐसे जानवरों को मारा जा सकता है. बताया गया है कि प्रभावित क्षेत्रों में नीलगाय व जंगली सुअरों को मारने के लिए अभियान शुरू करने से पहले एक रणनीति तैयार करनी होगी. पर्यावरण, वन व जलवायु परिवर्तन, कृषि और पंचायती राज विभाग के संबंधित अधिकारी संयुक्त रूप से जिलों में नीलगाय व जंगली सुअरों को मारने के लिए अभियान शुरू करने की रणनीति तैयार करेंगे. वहीं जंगली सुअरों व नीलगायों को मारने से लेकर दफनाने तक की पूरी प्रक्रिया में मुखिया की भूमिका महत्वपूर्ण है.
दो लाख नीलगाय व सुअरों की संख्या 65 हजार
जिले के प्राय: सभी प्रखंडों में बड़ी संख्या में नीलगाय हैं. एक अनुमान के अनुसार जिले में नीलगायों की संख्या लगभग दो लाख व जंगली सुअरों की संख्या करीब 65 हजार है.मिथिला वन प्रमंडल पदाधिकारी, दरभंगा भास्कर चंद्र भारती ने बताया कि नीलगाय व जंगली सुअरों की संख्या बढ़ती जा रही है. वन विभाग व राज्य सरकार ने पंचायत स्तर पर ही निदान का निर्णय लिया है. इसे लेकर पर्यावरण, वन जलवायु परिवर्तन विभाग के प्रधान सचिव ने पंचायती राज विभाग के प्रधान सचिव को 18 जनवरी 2023 को ही संयुक्त निर्देश जारी किया है. वन विभाग में किसानों का आवेदन मिलने पर उसे जिला पंचायती राज पदाधिकारी को भेज दिया जाता है.
डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar News Desk
यह प्रभात खबर का न्यूज डेस्क है। इसमें बिहार-झारखंड-ओडिशा-दिल्ली समेत प्रभात खबर के विशाल ग्राउंड नेटवर्क के रिपोर्ट्स के जरिए भेजी खबरों का प्रकाशन होता है।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए




