बहादुरपुर-हनुमाननगर में 385 एकड़ भूमि अधिग्रहण के खिलाफ किसान गोलबंद, रद्द करने की मांग
भूमि अधिग्रहण के विरोध में धरना देते किसान.
बहादुरपुर और हनुमाननगर के दर्जनों किसानों ने समाहरणालय पर धरना दिया। उन्होंने बिना सहमति के 385.45 एकड़ उपजाऊ भूमि के अधिग्रहण को रद्द करने की मांग की है। किसानों की मांगें न मानने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी गई है।
Darbhanga News: बहादुरपुर एवं हनुमाननगर प्रखंड के दर्जनों किसानों ने जमीन बचाओ किसान संघर्ष मोर्चा के बैनर तले समाहरणालय परिसर में धरना दिया. किसानों ने बिना सहमति के 385.45 एकड़ उपजाऊ भूमि के अधिग्रहण का विरोध करते हुए इसे तत्काल रद्द करने की मांग की. किसानों ने चेतावनी दी कि मांग नहीं मानी गयी तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और तेज किया जाएगा.
बिना सहमति भूमि अधिग्रहण का आरोप
मोर्चा के संयोजक डॉ. लक्ष्मेश्वर प्रसाद सिंह ने कहा कि बहादुरपुर अंचल के मौजा तारालाही तथा हनुमाननगर अंचल के मौजा बिहारी मुकुंद और असाढ़ी में किसानों की उपजाऊ जमीन का अधिग्रहण बिना उनकी सहमति के किया जा रहा है.
उन्होंने कहा कि एएन सिन्हा इंस्टीट्यूट की ओर से कराये गये सामाजिक प्रभाव मूल्यांकन के दौरान किसानों ने स्पष्ट रूप से भूमि अधिग्रहण पर असहमति जतायी थी. इसके बावजूद सामाजिक प्रभाव मूल्यांकन की रिपोर्ट सार्वजनिक किये बिना सीधे गजट प्रकाशित कर दिया गया.
600 किसान परिवार होंगे प्रभावित
किसानों का कहना है कि भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया से करीब 600 किसान परिवार प्रभावित होंगे. इनमें लगभग 55 प्रतिशत किसान पूरी तरह भूमिहीन हो जाएंगे.
मोर्चा के संयोजक ने कहा कि किसानों की आजीविका मुख्य रूप से कृषि भूमि पर निर्भर है. ऐसे में उपजाऊ जमीन के अधिग्रहण से प्रभावित परिवारों के सामने गंभीर आर्थिक संकट पैदा हो सकता है.
वैकल्पिक भूमि का दिया सुझाव
किसानों ने कहा कि जिले और आसपास के क्षेत्रों में कई पुरानी औद्योगिक इकाइयां वर्षों से बंद पड़ी हैं. उन्होंने अशोक पेपर मिल की करीब 400 बीघा जमीन, जूट मिल समस्तीपुर, रैयाम चीनी मिल और सकरी चीनी मिल सहित अन्य बंद औद्योगिक इकाइयों की जमीन का उपयोग करने का सुझाव दिया.
किसानों का कहना है कि जब पहले से उपलब्ध औद्योगिक जमीन का इस्तेमाल किया जा सकता है, तो उपजाऊ कृषि भूमि का अधिग्रहण करना उचित नहीं है.
मुख्यमंत्री और मंत्रियों से लगायी गुहार
धरना दे रहे किसानों ने जिला प्रशासन के माध्यम से मुख्यमंत्री, उद्योग मंत्री और राजस्व मंत्री से भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया तत्काल रद्द करने की मांग की.
किसानों ने कहा कि वे अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से संघर्ष कर रहे हैं. यदि सरकार और प्रशासन की ओर से उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आने वाले दिनों में उग्र आंदोलन करने के लिए किसान बाध्य होंगे.
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लेखक के बारे में
By राज कुमार रंजन
राज कुमार रंजन दो दशक से अधिक समय से हिंदी पत्रकारिता में सक्रिय हैं. राष्ट्रीय समाचार पत्रों में काम कर चुके रंजन प्रशासनिक गतिविधियों के साथ-साथ राजनीतिक व सामाजिक क्षेत्रों में गहरी पैठ रखते हैं.
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