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Darbhanga : रैयाम चीनी मिल के चालू होने की घोषणा से क्षेत्र में पुन: खुशहाली लौटने की आहट

Updated at : 02 Jan 2026 10:35 PM (IST)
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Darbhanga  : रैयाम चीनी मिल के चालू होने की घोषणा से क्षेत्र में पुन: खुशहाली लौटने की आहट

जिला के इकलौते रैयाम चीनी मिल को चालू किये जाने की सरकारी घोषणा से इलाके में फिर से खुशहाली के लौटने की आहट का एहसास होने लगा है.

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मिल में उस समय 135 स्थायी, 554 सिजनल व 125 दैनिक कर्मी करते थे काम एक सीजन में उन्नत किस्म की 1.25 लाख क्विंटल चीनी का होता था उत्पादन 41 साल बाद सरकारी स्तर से मिल चालू करने की कवायद केवटी. जिला के इकलौते रैयाम चीनी मिल को चालू किये जाने की सरकारी घोषणा से इलाके में फिर से खुशहाली के लौटने की आहट का एहसास होने लगा है. पुराने दिनों की यादें मानस पटल पर तैरने लगी है. इलाके में रौनक लौटने व विकास की रोशनी फैलने के लिए लोग दशकों से लालायित हैं. इस बीच सरकार की घोषणा ने उनके शरीर में मानो नई जान फूंक दी है. रजौड़ा डीह निवासी मिल के पूर्व कर्मी भोगेंद्र यादव, रजौड़ा निवासी कर्मी के पुत्र रामविलास यादव बताते हैं कि रैयाम चीनी मिल जब चालू था तब इलाके के लोग खेती-बाड़ी, मकान, दुकान, बिटिया की शादी, बाल-बच्चों की पढ़ाई इसी के सहारे किया करते थे. गन्ना नकदी फसल है. क्षेत्र के लोग खेतों में उन्नत किस्म के गन्ने का उत्पादन कर मिलर के हाथों बेचते थे. यही आमद घर-परिवार की खुशहाली का मूल था. मिल चालू रहने से युवाओं सहित लोगों को रोजगार का साधन उपलब्ध था. आश्रित हजारों परिवार के जीवन का साधन था. पुन: मिल चालू होने की घोषणा से जनमानस में खुशी व्याप्त है. रैयाम चीनी मिल का इतिहास आजादी से पूर्व वर्ष 1914 में चीनी मिल की स्थापना 68 एकड़ जमीन पर हुई थी. वर्ष 1977 में यह मिल बिहार राज्य शूगर काॅरपोरेशन के जिम्मे आ गयी, लेकिन वर्ष 1994 में मिल बंद हो गयी. इसके बाद वर्ष 2011 में तिरहुत इंडस्ट्रीज को चालू करने के लिए मिल सौंपी गयी. उस समय लोगों में दिन बहुरने की आस जगी, परंतु मिल चालू तो नहीं हो सकी, लेकिन कहा जाता है कि तिरहुत इंडस्ट्रीज कंपनी ने मिल के सभी उपकरण को कबाड़ के नाम पर बेच दिया. इसके बाद सरकार ने तिरहुत इंडस्ट्रीज कंपनी को ब्लैक लिस्टेड करते हुए मिल की चाबी वापस ले ली थी. एक सीजन में होती थी 12 लाख क्विंटल गन्ने की पेराई रैयाम चीनी मिल में एक सीजन में 12 लाख क्विंटल तक गन्ना कि पेराई होती थी. 1.25 लाख क्विंटल उन्नत किस्म के चीनी का उत्पादन होता था. इलाके से गन्ना चीनी मिल तक लाने के लिए ट्रॉली की व्यवस्था थी. रैयाम से मोहम्मदपुर 12 किमी, रैयाम से मुरिया 10 किमी ट्रॉली से किसान मिल तक गन्ना भेजा करते थे. इसके अलावा ट्रक, ट्रैक्टर, छोटे वाहन पर लादकर मिल को पेराई के लिए गन्ना उपलब्ध कराते थे. मिल में उस समय 135 स्थायी कर्मी, 554 सिजनल व 125 दैनिक कर्मी कार्यरत थे. उस समय अधिकांश किसान गन्ना की खेती कर खुशी से जीवन व्यतीत कर रहे थे. फिर से वैसी ही खुशहाली लौटने की दस्तक क्षेत्रवासी महसूस कर रहे हैं.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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