Darbhanga News: बाल्यकाल से RSS के समर्पित स्वयंसेवक शमशेर सिंह का निधन, संघ परिवार में शोक

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वरिष्ठ स्वयंसेवक शमशेर सिंह उर्फ गुरुजी

Darbhanga News: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ स्वयंसेवक शमशेर सिंह उर्फ गुरुजी का 86 वर्ष की आयु में निधन हो गया. बाल्यकाल से संघ से जुड़े शमशेर सिंह को दरभंगा में संघ परिवार और शुभचिंतकों ने नम आंखों से अंतिम विदाई दी.

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Darbhanga News: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के वरिष्ठ एवं समर्पित स्वयंसेवक शमशेर सिंह उर्फ गुरुजी का 86 वर्ष की आयु में निधन हो गया. उनके निधन की खबर फैलते ही दरभंगा के जुड़ावन सिंह मोहल्ला स्थित आवास पर अंतिम दर्शन के लिए संघ कार्यकर्ताओं और शुभचिंतकों की भीड़ उमड़ पड़ी. उत्तर बिहार प्रांत से लेकर उपनगर स्तर तक के पदाधिकारी एवं स्वयंसेवकों ने नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी.

शाखा के प्रति आजीवन निभाई अटूट निष्ठा

संघ के वरिष्ठ कार्यकर्ता राजकिशोर ठाकुर ने बताया कि शमशेर सिंह बाल्यकाल से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े थे. एक बार शाखा से जुड़ने के बाद उन्होंने जीवनभर नियमित रूप से शाखा में उपस्थिति दर्ज कराई. मौसम अनुकूल हो या प्रतिकूल, व्यक्तिगत व्यस्तता हो या कोई अन्य परिस्थिति, उनकी शाखा में उपस्थिति लगभग निश्चित रहती थी. इसी समर्पण के कारण इंद्रभवन प्रभात शाखा को लोग ‘शमशेरजी की शाखा’ के नाम से भी पहचानते थे.

योग और अनुशासित जीवनशैली रहे उनकी पहचान

बताया गया कि नियमित योगाभ्यास, सूर्य नमस्कार और अनुशासित दिनचर्या के कारण वे 86 वर्ष की आयु तक भी किसी गंभीर बीमारी से प्रभावित नहीं हुए. पेशे से वे मोटरसाइकिल और चारपहिया वाहनों के कुशल मैकेनिक थे तथा अपने जीवनकाल में उन्होंने सैकड़ों स्वयंसेवकों को संघ से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

संघ परिवार में शोक की लहर

शमशेर सिंह अपने पीछे चार पुत्र और एक पुत्री सहित भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं. सतीस्थान श्मशान घाट पर उनके बड़े पुत्र बबलू सिंह ने मुखाग्नि दी. अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में संघ कार्यकर्ता, सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय लोग शामिल हुए. उनके निधन से संघ परिवार और उनके शुभचिंतकों में शोक की लहर दौड़ गई.

सेवा और समर्पण को किया गया याद

अंतिम विदाई के दौरान संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि शमशेर सिंह का जीवन अनुशासन, राष्ट्रसेवा और संगठन के प्रति समर्पण का प्रेरक उदाहरण रहेगा. उन्होंने समाज और संगठन के लिए जो योगदान दिया, उसे लंबे समय तक याद रखा जाएगा.

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Purushottam Kumar

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