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Darbhanga: दरभंगा नृत्य महोत्सव में कलाकारों ने नृत्य एवं गीत से बांधा समां

Updated at : 29 Mar 2025 10:44 PM (IST)
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Darbhanga: दरभंगा नृत्य महोत्सव में कलाकारों ने नृत्य एवं गीत से बांधा समां

कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय प्रांगण में शनिवार को सृष्टि फाउंडेशन के 19वें वार्षिकोत्सव में आयोजित दरभंगा नृत्य महोत्सव में कलाकारों ने प्रस्तुतियों से समां बांध दिया.

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दरभंगा. कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय प्रांगण में शनिवार को सृष्टि फाउंडेशन के 19वें वार्षिकोत्सव में आयोजित दरभंगा नृत्य महोत्सव में कलाकारों ने प्रस्तुतियों से समां बांध दिया. संस्थान के संस्थापक जेपी पाठक के नेतृत्व में आयोजित कार्यक्रम का दरभंगा राज के युवराज कुमार कपिलेश्वर, कुलपति प्रो. लक्ष्मी निवास पाण्डे, विधायक प्रो. विनय कुमार चौधरी आदि ने दीप जलाकर उदघाटन किया. कुमार कपिलेश्वर ने कहा कि भारत अपनी विभिन्न संस्कृतियों के लिए जाना जाता है. नृत्य का संबंध हर किसी से है. सृष्टि की संरचना भी भगवान महादेव के तांडव नृत्य के बाद शुरू हुई. उनके डमरू के स्वर से सारी भाषा एवं संगीत की उत्पत्ति हुई. कहा कि राज दरभंगा शुरू से ही सनातन संस्कृति एवं लोक कला का संरक्षक रहा है. महाराजा माधव सिंह द्वारा राधा कृष्ण और कर्ता राम को यहां लाकर अमता नाम के ग्राम में बसाया गया. 900 बीघा जमीन उपहार स्वरूप दिया साथ में मल्लिक की पदवी दी. मल्लिक घराना ध्रुपद गायन का झंडा पूरे विश्व में ऊंचा किए हुए है. युवराज ने कार्यक्रम की सराहना की. कहा कि वे पूर्वजों द्वारा संरक्षित एवं संवर्धित नृत्य एवं संगीत कार्यक्रमों में पूर्ण सहयोग देते रहेंगे.

नृत्य और संगीत का मानव जीवन पर गहरा प्रभाव

कुलपति प्रो. लक्ष्मी निवास पाण्डे ने कहा कि नृत्य और संगीत का मानव जीवन पर गहरा प्रभाव होता है. यह केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक रूप से लोगों को प्रभावित करता है. विधायक प्रो. विनय कुमार चौधरी ने कहा कि नृत्य और संगीत तनाव को कम करने में मदद करता है.

सम्मानित किये गये विजेता प्रतिभागी

कार्यक्रम दो चरणों में हुआ. प्रथम सत्र में नृत्य प्रतियोगिता हुई. अतिथियों ने विजेताओं को प्रशस्ति पत्र, स्मृति चिन्ह आदि प्रदान किया. दूसरे सत्र में सृष्टि फाउंडेशन के कलाकारों और अतिथि कलाकारों ने मुक्ताकाश प्रस्तुति दी. फाउंडेशन के सुबोध दास, अंकिता झा, सत्यम कुमार झा, जयश्री जयंती, श्रेया झा, रितु रानी, पलक राज, श्रुति सिंह, संवेदना कुमारी, कुमुद शर्मा, आराध्या झा, पीयूष सागर, सिद्धि सुमन, नेहा गुप्ता, अमाया प्रसाद, आर्या कुमारी, बिनीत कुमारी, इशानी आनंद, रिद्धि श्री, अधीरा झा, प्रणय कुमार, श्रेया कुमारी, श्रेयांस कुमार, संध्या कुमारी, वंदना रानी, माही पाठक,अयुक्ता श्रीवास्तव, प्रार्थना झा, पारिषी प्रजना, उर्वीषा, प्रथम कुमार, पार्थ कुमार, श्रुति कुमारी, अक्षिता गुप्ता, सृष्टि पाठक, सिद्दीका पाठक, शिवांश कुमार, श्रुति झा, कृतिका झा, माही गुप्ता, कृषा चौधरी, प्रीति प्रसाद, सांवेति प्रसाद, बानया महासेठ, समृद्धि महासेठ, अर्णव रावत, आशिता शाह, सारनया गुप्ता, इशिता ओझा, कनक कुमारी, शारदा कुमारी आदि ने प्रस्तुति दी. इसके अलावा ओडिशा के संचिकांत प्रधान, रास बिहारी नाथ, प्रदीप कुमार महाराणा, सौम्य रंजन जोशी, आलोक रंजन दास, सोमा मंडल ने प्रस्तुति दी. मौके पर डॉ हेमपति झा, कैलाश नाथ मिश्रा, मंजेश चौधरी, संतोष कुमार, आशुतोष दत्त, अमरकांत झा, राम कृष्ण लाल दास, ठाकुर भूपेंद्र सिंह, कमलेश सिन्हा, शैलेश झा, प्रियांशु झा, सत्यम सिंह, जितेंद्र ठाकुर आदि संगीत एवं नृत्य प्रेमी उपस्थित थे. संस्थान के सचिव डॉ एम के पाठक ने धन्यवाद ज्ञापन किया.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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