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Darbhanga : प्राचीन शिक्षा प्रणाली और अंग्रेजी भाषा का महत्व विषय पर सेमिनार

Updated at : 29 Aug 2025 6:51 PM (IST)
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Darbhanga : प्राचीन शिक्षा प्रणाली और अंग्रेजी भाषा का महत्व विषय पर सेमिनार

प्राचीन शिक्षा प्रणाली और अंग्रेजी भाषा के महत्व विषय पर प्रधानाचार्य प्रो. मुश्ताक अहमद की अध्यक्षता में सेमिनार हुआ.

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दरभंगा. सीएम कॉलेज में अंग्रेजी विभाग की ओर से शुक्रवार को इंडक्शन प्रोग्राम में प्राचीन शिक्षा प्रणाली और अंग्रेजी भाषा के महत्व विषय पर प्रधानाचार्य प्रो. मुश्ताक अहमद की अध्यक्षता में सेमिनार हुआ. इस दौरान डॉ आशीष कुमार बरियार लिखित पुस्तक का लोकार्पण भी किया गया. प्रधानाचार्य प्रो. अहमद ने कहा कि वर्तमान में सम्पूर्ण विश्व एक बाजार में तब्दील हो गया है. ऐसे प्रतिस्पर्धात्मक और प्रतियोगी युग में शिक्षण संस्थानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्राचीन ज्ञान प्रणाली के साथ-साथ आधुनिक आवश्यकताओं के अनुसार शिक्षा की वैज्ञानिक पद्धति को बढ़ावा देना है, ताकि छात्र विश्व में अपना विशेष स्थान बना सकें. प्रो. अहमद ने कहा कि आज पूरे देश में प्राचीन शिक्षा प्रणाली के महत्व और उपयोगिता पर चर्चा और बहस हो रही है. कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम में हमारी सांस्कृतिक पहचान को प्राथमिकता दी जा रही है. ऐसे समय में इस विषय पर सेमिनार का आयोजन छात्रों के साथ-साथ शिक्षकों के लिए भी अत्यधिक महत्व का है. हमारी राष्ट्रभाषा हिंदी है, लेकिन इस कड़वी सच्चाई से इनकार नहीं किया जा सकता कि आज के वैश्वीकरण के दौर में अंग्रेजी ही संचार की भाषा बन गई है. बिना किसी पूर्वाग्रह के हमें भारतीय भाषाओं के साथ-साथ विदेशी भाषाओं पर भी ध्यान देने की जरूरत है. खासकर अंग्रेजी तक पहुंच बनाने की जरूरत है, ताकि छात्रों का भविष्य उज्ज्वल बन सके.

भारत की विदेश नीति, उभरती प्रवृत्तियां और चुनौतियां पुस्तक का विमोचन

इस दौरान डॉ आशीष कुमार बरियार की अंग्रेजी पुस्तक “भारत की विदेश नीति, उभरती प्रवृत्तियां और चुनौतियां ” का विमोचन किया गया इस पुस्तक में प्राचीन और आधुनिक शिक्षा तथा समकालीन शिक्षा के साथ-साथ भारतीय राजनीति पर भी चर्चा की गई है. सेमिनार के बाद अंग्रेजी विभाग के विद्यार्थियों ने महाभारत और अभिज्ञान शाकुंतलम नाटक की प्रस्तुति दी. इसके माध्यम से यह संदेश देने का प्रयास किया गया कि प्राचीन भारत में किस तरह की दृष्टि विकसित हो रही थी. मौके पर प्रो. सुब्रत कुमार दास, डॉ कुमार गौरव, डॉ उम्मे सलमा, डॉ मयंक श्रीवास्तव, डॉ अबसार आलम, डॉ आलोक रंजन आदि ने भी विचार रखा. धन्यवाद ज्ञापन डॉ उम्मे सलामा ने किया.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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