Darbhanga News: भारत को विश्व का मार्गदर्शक राष्ट्र बनाने के लिए सभी वर्ग को निभाना होगा अपना दायित्व : होसबाले

Edited by PRABHAT KUMAR
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Darbhanga News:जनगोष्ठी में आरएसएस के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि भारत को विश्व का मार्गदर्शक राष्ट्र बनाने के लिए समाज के प्रत्येक वर्ग को अपने कर्त्तव्यों का निर्वहन करना होगा.

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Darbhanga News: दरभंगा. आरएसएस के सौ वर्ष पूर्ण होने पर शनिवार को आयोजित जनगोष्ठी में आरएसएस के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि भारत को विश्व का मार्गदर्शक राष्ट्र बनाने के लिए समाज के प्रत्येक वर्ग को अपने कर्त्तव्यों का निर्वहन करना होगा. अगर इसका निर्वहन सही रूप से हो तो देश को विश्व में सर्वोत्कृष्ट स्थान पर आसीन होने से कोई नहीं रोक सकता. डीएमसी ऑडिटोरियम में समाज के तमाम क्षेत्रों के प्रमुख लोगों से मुखातिब होसबाले ने संघ की सौ वर्ष की यात्रा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि स्थापना से लेकर आज तक संघ का एक मात्र उद्दश्य राष्ट्र को परम वैभव तक पहुंचाना रहा है. संघ ने समाज को संगठित करने, राष्ट्रभक्ति का भाव जागृत करने एवं सामाजिक समरसता को मजबूत करने में महत्ती भूमिका निभायी है.

किसी व्यक्ति या सत्ता के लिए संघ नहीं

होसबाले ने कहा कि संघ किसी व्यक्ति या सत्ता के लिए नहीं है. यह राष्ट्र और समाज के लिए कार्य करता है. सेवा कार्य, शिक्षा, स्वाबलंबन, पर्यावरण संरक्षण और सांस्कृतिक पुनर्जागरण सरीखे क्षेत्र में नि:स्वार्थ भाव से संघ के कार्यकर्ता निरंतर कार्य कर रहे हैं. आज भारत विश्व मंच पर जब सशक्त रूप से उभर रहा है तब संघ के शताब्दी वर्ष का यह कालखंड आत्ममंथन एवं भविष्य के दायित्वों को समझने का अवसर है.

राष्ट्र के प्रति समर्पण भाव से आगे बढ़े युवा

युवाओं का आह्वान करते हुए सरकार्यवाह ने कहा कि राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है. अनुशासन, चरित्र निर्माण, सेवा भाव और राष्ट्र के प्रति समर्पण के साथ युवा पीढ़ी आगे बढ़े, यही संघ की अपेक्षा है.

भेदभाव राष्ट्र की एकता के लिए घातक

होसबाले ने कहा कि संगठित समाज की सशक्त राष्ट्र की नींव होता है. समाज में किसी भी प्रकार का भेदभाव राष्ट्र की एकता के लिए घातक है. समरस समाज की कल्पना संघ करता है, जहां जातिवर्ग व पंथ के भेद से उपर उठकर सभी एक दूसरे के पूरक बने. सामाजिक समरसता ही सशक्त व अखंड भारत की आधारशिला है.

शताब्दी वर्ष में पांच महत्वपूर्ण परिवर्तन का लक्ष्य

सरकार्यवाह ने संघ के शताब्दी वर्ष में समाज के समक्ष पांच महत्वपूर्ण परिवर्तन का लक्ष्य रखे जाने की जानकारी देते हुए कहा कि इसमें सामाजिक समरसता, पर्यावरण सरंक्षण, स्वदेशी जीवनशैली, नागरिक कर्त्तव्यबोध एवं कुटुम्ब प्रबोधन को शामिल किया गया है. भारतीय संस्कृतिक की सबसे मजबूत इकाई परिवार को बताते हुए कहा कि वर्तमान में परिवार व्यवस्था को सुदृढ करना सबसे महत्वपूर्ण है.

इस अवसर पर संघ के क्षेत्रीय, प्रांत विभाग जिला के पदाधिकारियों के अलावा समाज के आम से लेकर खास सभी वर्गों के प्रमुख लोग हजारों की संख्या में उपस्थित थे. इस दौरान दूसरे सत्र में आयोजित प्रश्नकाल में उपस्थित लोगों ने इमेल के जरिए अपनी जिज्ञासा रखी, जिसका समाधान सरकार्यवाह ने मंच से किया. सभी प्रश्नों के उत्तर बड़ी ही सफाई से दिये.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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