बाबा साहेब के दर्शन को समझना जरूरी : वीसी

Published at :15 Apr 2017 8:28 AM (IST)
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बाबा साहेब के दर्शन को समझना जरूरी : वीसी

अांबेडकर जयंती पर विचार गोष्ठी आयोजित दरभंगा : बाबा साहेब डॉ भीमराव अम्बेदकर क्रांतिकारी एवं लोकतांत्रिक नेता रहे. उस दौर के नेतृत्व करने वालों में डॉ अम्बेदकर उपरी पायदान के लोग थे. भारत में जब भी लोकतंत्र पर खतरा होता है, अम्बेदकर का विचार प्रासंगिक हो जाता है. बुंदेलखंड विवि यूपी के प्रो रामायन राम […]

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अांबेडकर जयंती पर विचार गोष्ठी आयोजित

दरभंगा : बाबा साहेब डॉ भीमराव अम्बेदकर क्रांतिकारी एवं लोकतांत्रिक नेता रहे. उस दौर के नेतृत्व करने वालों में डॉ अम्बेदकर उपरी पायदान के लोग थे. भारत में जब भी लोकतंत्र पर खतरा होता है, अम्बेदकर का विचार प्रासंगिक हो जाता है. बुंदेलखंड विवि यूपी के प्रो रामायन राम ने ये बातें लनामिवि की ओर से शुक्रवार को विवि के नरगौना परिसर स्थित जुबली हॉल में आयोजित विचार गोष्ठी में कही. वर्तमान संदर्भ में बाबा साहेब डॉ भीमराव अम्बेदकर के विचारों की प्रासंगिकता विषयक संगोष्ठी में प्रो राम ने कहा कि अम्बेदकर ने जाति उन्मूलन, समता मूलक समाज की स्थापना एवं भारत में सम्पूर्ण लोकतंत्र को स्थापित करने का काम किया.

वर्तमान समय में डॉ अम्बेदकर के आर्थिक विचार को सामने लाने की जरूरत है. इतना ही नहीं राज्य एवं अल्पसंख्यक नामक दस्तावेज में लिखे गये प्रस्ताव के अनुपालन की आवश्यकता है. उसमें अम्बेदकर ने लिखा है कि कृषि, भारी उद्योग एवं बीमा कंपनियों का राष्ट्रीयकरण आवश्यक है. यह भी लिखा है कि भारतवासी के मौलिक अधिकार की रक्षा करनी है तो कृषि, भारी उद्योग एवं बीमा कंपनियों का निजीकरण नहीं करना चाहिए. जाति उन्मूलन के बाबत डॉ अम्बेदकर ने कहा है कि हिंदू धर्म ग्रंथों में लिखी बातों से वर्ण प्रथा को बल मिलता रहा है जो जाति उन्मूलन में बाधक की भूमिका निभा रहा है.

कुलपति प्रो सुरेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि डॉ अम्बेदकर जैसे महापुरूष के विचारों को शब्दों में बांधना धृष्टता है. इसके लिए उनके जीवन यात्रा को समझना आवश्यक है. इसको समझने से ही उनके विचार एवं उनके दर्शन को समझा जा सकता है.

उन्होंने कहा कि डॉ अम्बेदकर जीवन पर्यंत समानता की लड़ाई लड़ते रहे. जिस उम्र में उन्होंने असमानता की समस्या से जूझा वह उम्र उन्हें विद्राही भी बना सकता था, परंतु शिक्षा के बल पर अर्जित ज्ञान के कारण उन्होंने इस बात को महसूस किया कि शिक्षा के विकास से समानता की भावना को जागृत किया जा सकता है. डॉ अम्बेदकर ने ऐसा ही किया. कुलपति ने कहा कि प्रतिभा प्रत्येक व्यक्ति के भीतर होता है. उसे निखारने के लिए ललक एवं प्रयास जरूरी होता है. प्रतिभा डॉ अम्बेदकर में भी भरा था. उनके सीखने की ललक और किये गये प्रसास की बदौलत वे अर्थशास्त्र विषय में पीएचडी की उपाधि प्राप्त कर वे इस विषय के पहले पीएचडीधारक हुए. उन्होंने कहा कि आर्थिक क्षेत्र में उनके योगदान को नजरअंदाज किया जा रहा है. जब तक आर्थिक एवं शिक्षा के क्षेत्र में कोई भी विकसित नहीं होगा तब तक उपरी पायदान के श्रेणी में शामिल नहीं हो सकता. प्रो सिंह ने कहा कि डॉ अम्बेदकर के विचारों एवं दर्श को वृहत्त रूप से देखने की जरूरत है.

ललितपुर, यूपी के पलावाराबाढ़ स्थित गवर्मेंट डिग्री कॉलेज के प्रो दीपक हरपाल दिवाकर ने कहा कि डॉ अम्बदेकर को अधिकांश लोग केवल दलित के मसीहा एवं संविधान निर्माता के रूप में ही जानते हैं, जबकि उनकी भूमिका राष्ट्रीय स्तर पर इससे इतर भी रहा है. उन्होंने कहा कि भारत के विकास में उनकी अहम भूमिका रही है.

विषय पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बिजली, पानी, मजदूर वर्ग के उत्थान में उनका अमूल्य योगदान रहा है. इसके अलावा डॉ अम्बेदकर का योगदान भूमंडलीकरण एवं औद्योगिकीकरण के लिए भी काफी सराहनीय रहा. पूर्व उपकुलसचिव डॉ केके सुमन ने कहा कि डॉ अम्बेदकर के विचारों को विकसित नहीं होने दिया गया. जातीय बंधन में बांधकर उनके ही वर्ग एवं जाति के लोगों ने राजनीतिक महत्वाकांक्षा को पूरी करने के कारण उनके विचारों व दर्शन को सीमित दायरे में समेटे रखा. संगोष्ठी में सिंडिकेट सदस्य डॉ बैद्यनाथ चौधरी, प्रधानाचार्य डॉ वीरेंद्र कुमार चौधरी, पूर्व कुलसचिव डॉ रामनंदन यादव, डॉ जितेंद्र नारायण आदि ने संबोधित किया. सीसीडीसी डॉ मुनेश्वर यादव ने विषय प्रवर्तन करते हुए कहा कि जातिवाद मानवीय गरिमा एवं समानता के खिलाफ है.

कुलसचिव डॉ अजित कुमार सिंह ने अतिथियों का स्वागत करते हुए डॉ भीमराव अम्बेदकर के बाबत कहा कि वे असंभव को संभव बनाने वाले थे. संचालन भू संपदा पदाधिकारी डॉ सुरेंद्र प्रसाद सुमन ने किया.

संस्कृत विश्वविद्यालय में मनायी गयी जयंती : दरभंगा. संस्कृत विश्वविद्यालय में भारत रत्न बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर की जयंती पर आयोजित कार्यक्रम का उद्घाटन करने के बाद सभा को सम्बोधित करते हुए कुलपति डॉ विद्याधर मिश्र ने कहा कि बाबा के आदर्श कालजयी है.

और उनके बताये मार्गों पर चलने की जरूरत है. कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए वीसी ने कहा कि बाबा साहब युगपुरुष हैं. अपने कर्मों तथा देश सेवा के कारण वे सदियों तक जन जन के ह्रदय में निवास करते रहेंगे. स्वागत करते हुए डीएसडब्ल्यू डॉ श्रीपति त्रिपाठी ने कहा कि आज हम जिस भारतीय संविधान की दुहाई देते हैं, वह भी बाबा की ही देन है.

समरस समाज की परिकल्पना व सब का साथ, सब का विकास उन्हीं की सोच थी. आधुनिक समाज को गढ़ने में बाबा का अमूल्य योगदान है. इस अवसर पर व्याकरण संकायाध्यक्ष प्रो. शशिनाथ झा, प्रधानाचार्य, डॉ प्रभाषचंद्र, भूसंपदा पदाधिकारी डॉ अवधेश कुमार चौधरी, शिक्षा शास्त्र विभाग के डॉ नंदकिशोर चौधरी आदि ने बाबा साहब को स्मरण किया. इस अवसर पर पंकज मोहन झा, विजयशंकर झा, अभिमन्यु कुमार, मन्नू कुमारी, डॉ अमरेश झा आदि दर्जनों कर्मी उपस्थित थे. धन्यवाद ज्ञापन डॉ अमरनाथ शर्मा ने किया. यह जानकारी पीआरओ निशिकांत प्रसाद सिंह ने दी है.

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